कवर्धा - विश्व क्षय दिवस 24 मार्च 1882 को जर्मन वैज्ञानिक राबर्ट कोच ने टीबी के बैक्टीरिया की खोज की थी 1905 में राबर्ट कोच को इस खोज के लिए नोबेल पुरस्कार भी दिया गया टीबी के प्रति जन जागरुकता लाने के लिए विश्व क्षय दिवस मनाया जाता है।
विश्व क्षय दिवस 24 मार्च 2025 का थीम
*Yes! We Can End TB*: *Commit,Invest,Deliver*
जन जन का रखे ध्यान, टीबी मुक्त भारत अभियान
विश्व क्षय दिवस के अवसर पर स्वास्थ विभाग के अधिकारी कर्मचारियों एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में रैली एवं रक्त दान महादान कार्यक्रम आयोजित किया गया। पंडरिया बीएमओ सर के द्वारा टीबी के लक्षण की जानकारी देकर संभावित टीबी मरीज मिलने पर ट्रूनाट जांच कराने को कहा गया घर के सभी सदस्यों का स्क्रीनिंग कर जांच एवं टीपीटी देने की जानकारी दी गई एवं अधिक से अधिक निश्चय मित्र बनने सभी को कहा गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.बी.एल. राज के आदेश के परिपालन में एवं डॉ. राकेश कुमार प्रेमी बीएमओ पंडरिया के नेतृत्व में आज विश्व टीबी पखवाड़ा दिवस के उपलक्ष्य में टीबी जागरूकता के लिए नगर में रैली निकाला गया एवं रक्त दान महादान का आयोजन किया गया। जिसमें पंडरिया से 26 एवं ग्राम कोलेगांव से 25 कुल 51 लोगों ने अपना रक्त दान महादान कर कार्यक्रम को सफल बनाया एक हाथ से दिव्यांग शोभान गिरी गोस्वामी आरोग्य मंदिर कोलेगांव से तरुन सोरी, पुरुषोत्तम मानिकपुरी, पार्वती कश्यप, कुंती ध्रुव का विशेष योगदान रहा।
बीएमओ सर के द्वारा सभी वर्गो के लिए संदेश पहुंचाया गया की टीबी की बीमारी कोई छुआछूत की बीमारी नहीं है। इसका सफल ईलाज व जाँच हमारे सरकारी अस्पताल में निःशुल्क उपलब्ध है। टीबी एक जानलेवा बीमारी है जो एक दूसरे के सम्पर्क में आने से खाँसने से, छीकने से फैलती है। इसके मुख्य लक्षण हैं। अगर 2 हफ्ते से ज्यादा खासी, लगातार बुखार आना, रात में पसीना आना, वजन का कम होना, बलगम के साथ में खून आना, भूख न लगना जैसे लक्षण किसी व्यक्ति को हो तो तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में आकर बलगम की जाँच अवश्य कराये। टीबी की बैक्टीरिया जन्म से प्रायः सभी व्यक्ति के शरीर में पाया जाता है। जिस व्यक्ति के शरीर में रोगप्रतिरोधक क्षमता कम होने,तथा टीबी रोगी के संपर्क में आने से उत्तपन्न होता है। जो बलगम के जाँच,और एक्स रे जाँच के माध्यम से पता चलता है। टीबी मुख्यतः दो प्रकार की होती है पहला पल्मोनरी और दूसरा एक्स्ट्रा पल्मोनरी। पल्मोनरी टीबी फेफड़े में पाया जाता है और एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी नाखून और बाल को छोड़ कर शरीर के किसी भी अंग में पाया जा सकता है। टीबी की बिमारी से हमें डरना नहीं है क्योंकि टीबी की दवा एवम् रोकथाम की दवा टीपीटी आ चुका है जो रोगी के परिवार वालों को टीबी फैलने से रोकती है। और सरकार के द्वारा भी टीबी मुक्त 100 दिवस अभियान जोर शोर से चलाया रहा है। इसलिए हम सबने यह ठाना है, टीबी मुक्त गाँव बनाना है। 24मार्च वर्ल्ड टीबी के उपलक्ष में बीएमओ पंडरिया के साथ-साथ सीएससी पंडरिया एवं सीएचसी कुकदुर के स्टॉफ एवम पीएचसी किशनगढ़ व आयुष्मान आरोग्य मंदिर कोलेगांव के द्वारा मिलकर टीबी के संदेश रैली निकाली गई एवम् तीन टीबी मरीज का दवा प्रारंभ भी किया गया।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में जनप्रतिनिधि सांसद प्रतिनिधी चंद्र कुमार सोनी, वरिष्ठ ट्यूबरक्लोसिस लैब पर्यवेक्षक जेम्स जॉन, विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक प्रदीप सिंह ठाकुर, कुसुम सप्रे, रीतू बंजारा, शमसाद खान, जयप्रकाश चंद्रवंशी, राजेश साहू, योगेश चंद्रवंशी, मानसिंग धृतलहरें, कैलाश धिरही, ज्योति दास धिरहि, जॉन निर्मल एक्का, परमेश्वर यादव, विनीष जॉय, होरीलाल यादव, अनिल सिंह, रामकुमार जांगड़े, संजय गुप्ता, लेखनदास मानिकपुरी, आशुतोष शर्मा, पदमनी चंद्राकार, ज्योति कश्यप, बिरबल कुर्रे, राहुल पाठक, गणेश यादव, लमतु, दुष्यंत शर्मा डॉ.सुधा एक्का, पूनम आर्य, मंगल यादव, स्पूटम रनर, भागवत यादव, यशवंत श्रीवास, मोहन सिंह राजपुत, राजीव श्रीवास्तव एवं ब्लड बैंक जिला चिकित्सा से पंचतीलक सिंह मरकाम, छुन्नी चंद्रवंशी, अलिंद साहु, मोनू साहू, मेलाराम यादव व समस्त स्वास्थ्य विभाग अधिकारी कर्मचारी पंडरिया का सहयोग रहा है।