कवर्धा :- आदिवासी प्रकृति के संरक्षक माने जाते हैं। इस बात को प्रामाणिकता की पहचान नव दाम्पत्य जोड़ी को दो आम के पेड़ भेंट कर यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि जल से है जीवन, पेड़ों से हरियाली हैl
लखनपुर निवासी एम. आर. टेकाम कृषि विस्तार अधिकारी के पुत्री विवाह आयोजन के दौरान देखने को मिला है। विवाहित जोड़े को दो पेड़ आम का टीकावन स्वरूप दिया गया है। इसे एक परंपरा के रूप में समाज ढाल ले तो प्रकृति के ऊपर जल संकट को लेकर बढ़ती दबाव को कम किया जा सकता है।
समाज में शादी ब्याह एक इंसानिय परंपरा प्रवृति में सुमार हो गया है। धरती पर जल संकट की स्थिति निर्मित होती जा रही है। पर्यावरण पर लगातार इंसानी दबाव बढ़ता ही जा रहा है। पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक बहुत ही सुंदर प्रयास कहा जा सकता है। भारत सहित दुनिया में किसी न किसी रूप में एक जोड़ों को जोड़कर शादी ब्याह रचाने की परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है। जन संख्या अधिकता ने पर्यावरण को खतरे में डाल दिया है। संरक्षण और संवर्धन पर ध्यान रखा नही गया तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। इसलिए हम सभी को अपने दायित्व समझकर पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में जन्मदिन शादी ब्याह,अपने स्वजन के पुण्य तिथि जैसे महत्वपूर्ण आयोजन पर पेड़ लगाने को आदत में सुमार कर जीवन का हिस्सा बना लिया जा तो शायद पर्यावरण के ऊपर लगातार बढ़ रही दबाव को कम करने में सहायता मिल सकती हैl
वैसे भी धरती पर मानव जीवन रहने के लिए विवाह जरूरी हैं l ठीक उसी प्रकार "जल से जीवन, पेड़ से पर्यावरण, हरियाली, तभी जीवन में खुशयाली, संभव हैं"l
आशीर्वाद समारोह में गोंड समाज सेवा समिति केंद्र कुकदूर एवं अजजा शास. से.वि.संघ.कवर्धा के पदाधिकारी गण उपस्थित रह कर कन्या के विवाह अवसर पर वर वधु को आम पेड़ उपहार स्वरूप प्रदान कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का प्रयास आदिवासी समाज ने किया है। जिसे जीवन में उतारने की आवश्यकता है।