बिलासपुर - दिगम्बर जैन समाज के सबसे बड़े पर्व दसलक्षण पर्व के छठवें दिन "उत्तम संयम" धर्म के दिन धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में कई धार्मिक प्रतियोगिता धर्म के गणितज्ञ का आयोजन किया गया। पर्युषण पर्व धार्मिक कार्यक्रमों की कड़ी मे 8 कर्मो के बारे मे नाट्य मंचन हुवा। पूज्य 105 अकम्पमति माता जी एवं अचलमति माता जी के सानिध्य में धार्मिक कार्यक्रम एवं प्रवचन संपन्न हो रहे।
"प्रवचन"
जैन धर्म के पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व छठवें दिवस "उत्तम संयम धर्म" के दिन पूज्य 105 अकम्पमति माता जी एवं अचलमति माता जी के सानिध्य में हो रहे धार्मिक आयोजन मे आयोजित धर्म सभा में इस धर्म की व्याख्या करते हुए कहा प्राणी-रक्षण और इन्द्रिय दमन करना संयम है। स्पर्शन, रसना, घ्राण, नेत्र, कर्ण और मन पर नियंत्रण करना इन्द्रिय-संयम है। पृथ्वीकाय, जलकाय, अग्निकाय, वायुकाय, वनस्पतिकाय और त्रसकाय जीवों की रक्षा करना प्राणी संयम है। इन दोनों संयमों में इन्द्रिय संयम मुख्य है क्योंकि इन्द्रिय संयम प्राणी संयम का कारण है, इन्द्रिय संयम होने पर ही प्राणी संयम होता हैं, बिना इन्द्रिय संयम के प्राणी संयम नहीं हो सकता।