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अटैचमेंट उपअभियंता का काम फर्जी सुपरवाईज़र कर रहें।

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                रामकुमार टंडन

पंडरिया - अनुविभाग ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग पंडरिया अन्तर्गत कार्यरत उप यंत्री मुख्यालय में नही रहते हैं, किन्तु निर्माण कार्य के देख रेख के लिए अपने पीछे सुपरवाईज़र रखे हुए हैं, उनके द्वारा दी जाने वाली जानकारी के आधार पर घर बैठे मूल्यांकन सत्यापन कर रहे हैं। वैसे भी प्रभारी बनाने और अटेचमेंट उच्चाधिकारियों के लिए कमाई का जरिया बन गया है। धन में इतनी शक्ति है, कि वरिष्ठ व कनिष्ठ की नियमावली सिविल सेवा संहिता को जिले के प्रशासनिक अधिकारी ताक पर रख दिये हैं। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग पंडरिया कार्यालय में कुछ दिन पहले एक भी इंजिनियर नही था। जो थे वह प्रभारी अधिकारी का कार्य देख रहे थे। आज आलम ये है कि इंजिनियर तो हैं अटेचमेंट पर कार्यरत हैं, जो यदा-कदा समय बेसमय कार्यालय आते-जाते हैं। क्षेत्र में विभाग के देख रेख पर चल रहे निर्माण कार्य के लिए फर्जी सुपरवाईज़र रखे हुए हैं, यही लोग स्थल निरीक्षण करके जानकारी देते हैं। उसी के आधार प्रोग्रेस रिपोर्ट अधिकारी घर बैठे तैयार करता है। इतना ही नही सुपरवाईज़र की जानकारी के मुताबिक मूल्यांकन सत्यापन भी किया जा रहा है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि पंच सरपंच सचिव को मिलना होता है, तो सुपरवाईज़र से ही अपनी बात रखते हैं। इन नान-टेक्निकल लोगों के द्वारा देख रेख पर निर्माण कार्य की गुड़वता कितनी अच्छी होगी, सहजता से ही अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसे अतिरिक्त कार्य का संपादन करने के लिए रखे गए इंजिनियर जो मुख्यालय में न रहकर बाहर से यदाकदा आते जाते हैं, इस की संख्या अकेले आर.ई.एस. पंडरिया में कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार 4 से 5 हैं, उन्हें तत्काल अतिरिक्त प्रभार से हटा दिया जावे या फिर मुख्यालय में रहकर कार्य का संपादन करें नहीं तो वैधानिक कार्रवाई किया जावे, ताकि फर्जी सुपरवाईज़र नही कार्यरत इंजिनियर के मार्ग निर्देशन पर निर्माण कार्य गुड़वत्ता युक्त हो और समय पर कार्य का शुभारंभ व निरीक्षण होता रहे।

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