पंडरिया :- इस समय देश में भारी वर्षा हो रही है, उससे सभी परेशान हैं, इसी कड़ी में कबीरधाम जिले के पंडरिया नगर के समीप स्थित हरीनाला में बाढ़ का पानी रपटा के ऊपर बहने के कारण आज दिनभर देर शाम तक आवागमन बाधित है। नगर पंचायत पंडरिया की आबादी 20 हजार की है, आजादी के बाद से कवर्धा बिलासपुर आवागमन का एक मात्र साधन सड़क मार्ग है, कई विधानसभा के कद्दावर सत्ता पक्ष-विपक्ष के राजनेता चुनकर जीतकर अपनी राजनीति चमकाते रहे हैं, किसी ने इस छोटी सी नाला पर ध्यान नहीं दिए हैं, परिणाम स्वरूप हर साल बरसात के महीने में हजारों लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। राजनीतिक इच्छा शक्ति अदूरदर्शी सोच के कारण अव्यवस्था बनी रहती है, हर बार बरसात आती है, नेताओं को फिक्र हो जाती है। इस बार बजट में प्रावधान कराए जाने का खोखला आश्वाशन कर भूल जाते हैं, जितनी जिम्मेदारी राजनेताओं की है, उतनी ही जवाबदारी जिले के प्रशासनिक अधिकारी विभाग की भी बनती है। [video width="1920" height="1080" mp4="https://khabarchhattisgarh24.com/wp-content/uploads/2022/07/VID_20220715_090056-1.mp4"][/video] राजनीतिक संगठन के नेतागण विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन तो करते हैं, किन्तु इस ज्वलंत मुद्दों पर कोई आंदोलन नहीं करते हैं। सावन-भादों का महीना छत्तीसगढ़ की पारम्परिक त्योहार तीजा-पोला रक्षाबंधन आता है, और माताएं बहनें बेटियां आती जाति है, उन्हें सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, बावजूद नेताओं व प्रशासनिक अमला सुध नही करे हैं। [video width="640" height="352" mp4="https://khabarchhattisgarh24.com/wp-content/uploads/2022/07/VID-20220715-WA0144.mp4"][/video] 21 साल पूर्व की बात की जाय तो पंडरिया अविभाजित मध्यप्रदेश के हिस्सा होने के कारण पंडरिया बिलासपुर जिला में शामिल रहा है, किन्तु 1998 से कवर्धा जिला में पंडरिया शामिल है। 2000 के बाद से छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हो गया है, उसे बने हुए 21 साल गुजर गया है। इस बीच जिले में 15 साल तक भाजपा की सरकार गृहनिवास के मुख्यमंत्री रहे हैं, वर्तमान प्रदेश सरकार के कद्दावर मंत्री मोहम्मद अकबर विधानसभा पंडरिया से भी विधायक रहे हैं, क्षेत्र के लोगों की उम्मीद भी ज्यादातर अकबर से बंधी थी। अब तो फिर से विधानसभा चुनाव होने में एक बरस ही शेष रह गया है, चुनावी बिगुल बज चुके है, फिर भी किसी भगीरथ जननेता की ओर क्षेत्र की जनता आशाभरी निगाहें टकटकी लगाए निहार रही है, कोई तो हरिनाला की समस्या से निजात दिलाने आयेगा।