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मेमोरी पाॅवर बढ़ाने अपने क्रोध, जिद व चिंताओं को करें विदाः राष्ट्रसंत ललितप्रभजी

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रायपुर, 23 जुलाई। ‘‘अपना मेमोरी पाॅवर बढ़ाने के लिए हम हमेशा अपने दिमाग को पैना, धारदार या शाॅर्प रखें। आदमी के जीवन में किया हुआ सत्कर्म, धर्म ही हमेशा उसके काम आता है। आपके मेमोरी पाॅवर को कमजोर करने में पहला बाधक तत्व है आपका आवेश या गुस्सा। आदमी के एक बार गुस्सा करने पर उसके 10 हजार ज्ञान के सेल्स जलकर खत्म हो जाते हैं। जो अपने दिमाग को सकारात्मक बनाए रखना चाहते हैं वे गुस्से से बचें। आदमी के दिमाग को कमजोर करने में दूसरा बाधक तत्व है उसकी नकारात्मक जिद। तीसरा- उसके भीतर में पलने वाली चिंता। चिंता ही आदमी के स्वास्थ्य व शरीर को गेंहू के घुन की तरह भीतर ही भीतर धीरे-धीरे खत्म कर देती है। दिमाग का कमजोर करने वाला चैथा तत्व है उसका आलस्य और टाल-मटोल करने की आदत। मेमोरी पाॅवर बढ़ाने के उपाय हैं- अपने क्रोध, जिद व चिंताओं को जीवन से विदा कर दें।’’ ये प्रेरक उद्गार राष्ट्रसंत महोपाध्याय श्रीललितप्रभ सागरजी महाराज ने आउटडोर स्टेडियम बूढ़ापारा में जारी दिव्य सत्संग ‘जीने की कला’ के अंतर्गत युवाओें के लिए जारी व्यक्तित्व विकास सप्ताह के छठवें दिन शनिवार को ‘मेमोरी पाॅवर बढ़ाने के प्रेक्टिकल तरीके’ विषय पर व्यक्त किए। संतप्रवर ने कहा कि अगर पूरे ब्रह्माण्ड में कुदरत का दिया कोई बड़ा उपहार है तो वह है हमारा दिमाग। कल्पना करो कि शरीर के सारे अंग हों और दिमाग न हो तो आदमी कुछ नहीं कर सकता। आदमी अगर सुन रहा है, देख रहा है, चल रहा है तो केवल अपने दिमाग के कारण। सच्चाई तो यह है कि इंसान और कुछ नहीं एक उल्टे पेड़ की तरह है, उसकी जड़ें उसके दिमाग में उुपर की तरफ होती हैं। आदमी का एक नाड़ी तंत्र यदि खराब हो जाए तो वह लकवाग्रस्त हो जाता है, उसे न्यूरोफिजिशियन के पास ले जाना पड़ता है। यही दिमाग है जो किसी को राम, किसी को रावण, किसी को कृष्ण तो किसी को कंस बना देता है। राम-रावण और कृष्ण-कंस की राशियां एक हैं किंतु फर्क है तो केवल दिमाग की दिशा का। तय आदमी को करना होता है कि उसे अपने दिमाग का संचालन कैसे करना है। अर्जुनमाली जैसे हत्यारे को यदि भगवान श्रीमहावीर का सानिध्य मिल जाए तो वह दीक्षा स्वीकार कर संत हो जाता है और मूर्ख कहलाने वाले कालीदास का दिमाग यदि सुधर जाए तो वह महाकवि कालिदास बन जाता है। दुनिया में दो तरह के आदमी होते हैं एक जो पढ़ना जानता नहीं और एक वह जो पढ़ना चाहता नहीं। इनमें से पहला आदमी जो पढ़ना जानता नहीं, उसे विद्यावान का संसर्ग मिल जाए तो वह आज नहीं तो कल पढ़ना सीख ही जाता है। लेकिन जो पढ़ना चाहता नहीं वह जीवन में कुछ कर नहीं पाता। जो व्यक्ति लगन, सही मानसिकता और इच्छाशक्ति से कार्य करता है वह असफल होते हुए भी एक दिन सफल जरूर हो जाया करता है। ज्ञानियों ने कहा है कि इच्छाएं कभी जिंदगी में पूरी होती नहीं हैं पर इच्छाशक्ति कभी अधूरी नहीं रहती। आदमी के जीवन की दिशाएं और दशाएं उसके दिमाग के सकारात्मक व नकारात्मक प्रभाव पर निर्भर हैं। गीता में श्रीकृष्ण ने कहा कि ज्ञान व वैराग्य को प्राप्त करने का सबसे सरल मार्ग है सतत् अभ्यास। संतश्री ने कहा कि आदमी के दिमाग से बड़ा सुपर कम्प्यूटर दुनिया में और कुछ हो ही नहीं सकता। यदि आदमी अपने दिमाग का सदुपयोग करे तो उससे बड़ा ज्ञानी और कोई हो नहीं सकता और यदि वह ईष्र्या, बैर-विरोध, कलह आदि के लिए अपने दिमाग का उपयोग करे तो वह उुंचाइयों से गिरकर रसातल में चला जाता है। उुपर वाले का दिया यह असाधारण, बेशकीमती उपहार है आदमी का दिमाग। आदमी या मस्तिष्क ही जीता-जागता भगवान भी है। दिमाग तीन चरणों में काम करता है संतप्रवर ने बताया कि आदमी के दिमाग या मस्तिष्क के तीन चरण होते हैं- पहला चेतन मस्तिष्क। किसी भी नई वस्तु को जानने या सीखने की क्षमता चेतन मस्तिष्क में होती है। दूसरा उसका अवचेतन मस्तिष्क। अवचेतन मस्तिष्क यह अलादीन के चिराग की तरह है,जो प्रति सेकंड पांच लाख से ज्यादा दृश्यों को पकड़ सकता है। सारी दुनिया के सुपर कम्प्युटर मिलकर भी आदमी के एक दिमाग का मुकाबला नहीं कर सकते। आदमी अपने अवचेतन मस्तिष्क में वर्षों पुरानी स्मृतियों को सहेज कर रखता है। उसमें कडुवी और अच्छी-मधुर यादें भी होती हैं। आदमी का अवचेतन मस्तिष्क भगवान का भी काम कर सकता है और शैतान का भी। यदि आप अच्छा इंसान बनना चाहते हैं तो जब-जब भी श्वांस ले एक अच्छी याद को भीतर ले आएं और जब श्वांस बाहर निकले तो उसके साथ बुरी याद को बाहर निकाल दें। दिमाग का तीसरा चरण है, उसका अति चेतन मस्तिष्क। जो मस्तिष्क के सबसे अंदर के भाग में होता है। इस अति चेतन मस्तिष्क का ही पूरे शरीर के अंगों पर निर्देश चलता है, यही पूरे शरीर का संचालन करता है। आदमी की किस्मत की रेखाओं को काटने में यदि सबसे बड़ी भूमिका किसी की होती है तो वह है उसके दिमाग में पलने वाली बुरी स्मृतियां। क्रोध आदमी के मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाने में सबसे बड़ी भूमिका अदा करता है।

आदमी के जीवन का गुरू है उसका ज्ञान

संतश्री ने कहा कि आदमी की जिंदगी में उसका सबसे बड़ा गुरू उसका ज्ञान ही है। धन को पाने के लिए एक रात काफी होती होती है मगर ज्ञान को पाने में आदमी को अपनी पूरी जिंदगी खपानी पड़ती है। धन की हमें सुरक्षा करनी पड़ती है मगर ज्ञान की सुरक्षा नहीं करनी पड़ती अपितु ज्ञान ही हमारी सुरक्षा करता है। वही हमें सही दिशा दिया करता है। जब-जब भी हम किसी अनुचित कार्य को करने के लिए कदम आगे बढ़ाते हैं तो हमारे भीतर से एक आवाज आती है, कि तू ये क्या कर रहा है। इसी अंतरआत्मा की आवाज का नाम है विवेक और सद्ज्ञान की आवाज। ज्ञान ही हमारी हर कदम पर रक्षा करता है।

मेमोरी पाॅवर बढ़ाने के 10 गुण

संतप्रवर ने श्रद्धालुओं को मेमोरी पाॅवर बढ़ाने के दस गुण बताए। जिनमें पहला गुण है- अपने दिमाग में फालतू का कचरा मत रखें। दिमाग को हमेशा तरोताजा रखें। दूसरा गुण- रोज सुबह की सैर जरूर करें। तीसरा- जब भी अध्ययन करें, पूरे मनोयोग और एकाग्रता से करें। हर समय पूरे दिन-पूरी रात बच्चों पर पढ़ाई का दबाव न डालें, पढ़ाई के लिए बार-बार टोका-टाकी न करें। क्योंकि पढ़ाई के अलावा उनके सर्वांगीण विकास के लिए खाना-पीना, घूमना-फिरना और अच्छे कार्यों में समय देना भी महत्वपूर्ण है। दिनभर में चार घंटे पढ़ाई के लिए रखें तो भी बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए पर्याप्त हैं। बशर्तें पढ़ाई में उनकी एकाग्रता बनी रहे। मेमोरी पाॅवर को बढ़ाने का चैथा गुण है- अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को तले पदार्थ, मिष्ठान्न का सेवन ज्यादा नहीं करना चाहिए। छठा गुण है- जब भी अध्ययन करें तो यह जरूर याद रखें कि अपने मेरूदण्ड अर्थात् रीढ़ की हड्डी को हमेशा सीधा रखें। सातवा गुण है- सूर्योदय से पहले जाग जाएं। आठवां गुण है- रोज दस मिनट तक आनंद आसन अवश्य करें। यदि व्यक्ति चैबीस घंटे में एक बार भी आनंद में जी लेता है तो उसका मेमोरी पाॅवर जबरदस्त बढ़ जाता है। नवमा गुण है- सुबह-सवेरे भ्रामरी प्राणायाम जरूर करें। इसके अतिरिक्त दिन में पंद्रह बार उठक-बैठक जरूर करें, अपने कान की अंगुलियों की हल्की रगड़ से मालिश करें। आरंभ में संतश्री ने राष्ट्रीय संत श्रीचंद्रप्रभजी रचित गीत ‘जीवन में कुछ करना है तो मन को मारे मत बैठो, आगे-आगे बढ़ना है तो हिम्मत हारे मत बैठो...’ के गायन से धर्मानुरागियों को मोटिवेट किया ध्यान व एकाग्रता ही सफलता का राजःडॉ. मुनि शांतिप्रियजी दिव्य सत्संग के पूर्वार्ध में विषयान्तर्गत डॉ. मुनिश्री शांतिप्रिय सागरजी ने कहा कि हमारी सफलता का राज अध्ययन के समय हमारी एकाग्रता व ध्यान ही है। किसी भी कार्य को सफल बनाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरत हमारी एकाग्रता और मन की शांति की होती है। इसका एक ही मंत्र है- एक समय में एक काम। किसी साधक को यदि अपनी अंतरआत्मा की आवाज सुननी है तो उसे अपने मन को एकाग्र व शांत करने की जरूरत होती है। आज आदमी की सबसे बड़ी समस्या है उसके मन की चंचलता। इसका कारण है आदमी की अव्यवस्थित दिनचर्या। जो भी कार्य करें अपने पूरे कंसन्ट्र्ेशन से करें। परंतु ध्यान रहे हमारी एकाग्रता हमेशा सम्यक रहे। मन की शुद्धता बनी रहे। अपनी एकाग्रता को बढ़ाने का पहला मंत्र है- एक काम-एक मन। दूसरा है- ध्यान, तीसरा है- व्यवस्थित जीवन शैली। अपने जीवन में एक काम-एक मन के सूत्र को अपनाएं। तब आप अपने अच्छे दिमाग के मालिक बन जाएंगे और आपके हर कार्य सफल होते चले जाएंगे।

आज के अतिथिगण

शनिवार की दिव्य सत्संग सभा का शुभारंभ अतिथिगण राजमाता श्रीमती निर्मला डागा, विनोद डागा, विधायक निलेश डागा-बैतूल, प्रणय मारोठी-बैतूल, श्रीमती संगीता बुरड़ धर्मपत्नी रेखचंद बुरड़ विधायक-जगदलपुर, गौरीशंकर व्यास, राजेंद्र पारख, अशोक छाजेड़, चंद्रशेखर वर्मा, जितेंद्रजी, जयनारायण कसार ने दीप प्रज्जवलित कर किया। अतिथि सत्कार पीआरओ समिति के महावीर तालेड़ा, मनोज कोठारी व श्रीऋषभदेव मंदिर ट्र्स्ट के कार्यकारी अध्यक्ष अभय भंसाली द्वारा किया गया। सभी अतिथियों को श्रद्धेय संतश्री के हस्ते ज्ञान पुष्प स्वरूप धार्मिक साहित्य भेंट किये गये। ज्ञान पुष्प के लाभार्थी श्रीमती कमलादेवी पारख, त्रिलोकचंद-शकुनदेवी, अन्नराज-शीलादेवी, चंचलचंद-मीनादेवी, पारस-कविता, जितेंद्र-सरिता, नरेंद्र-सुषमा पारख का बहुमान किया गया। सूचना सत्र का संचालन चातुर्मास समिति के महासचिव पारस पारख ने किया. आज प्रवचन ‘पाॅजीटिव थिंकिंग से बनाएं जीवन को स्वर्ग’ विषय पर

श्रीऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय भंसाली, ट्रस्टीगण राजेंद्र गोलछा व उज्जवल झाबक, दिव्य चातुर्मास समिति के अध्यक्ष तिलोकचंद बरड़िया, महासचिव प्रशांत तालेड़ा, अमित मुणोत ने संयुक्त जानकारी देते बताया कि व्यक्तित्व विकास सप्ताह के अंतर्गत रविवार 24 जुलाई को सुबह 8ः45 बजे से ‘पाॅजीटिव थिंकिंग से बनाएं जीवन को स्वर्ग’ विषय पर प्रवचन होगा। श्रीऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट एवं दिव्य चातुर्मास समिति ने श्रद्धालुओं को चातुर्मास के सभी कार्यक्रमों व प्रवचन माला में भाग लेने का अनुरोध किया है।  

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