अच्छा काम करने वालों को मत रोको, क्योंकि किसी पर टिप्पणी करने का आपके पास लाइसेंस नहीं: साध्वी श्री स्नेहयशाश्रीजी।
रायपुर - किसी पर टीका-टिप्पणी करने का आपके पास लाइसेंस नहीं है। जब कोई अच्छा काम करता है, तो लोग उसे टाेकने लग जाते है। उसके काम और उसके निर्णय में दोष निकालना शुरु कर देते है। यह बातें बुधवार को न्यू राजेंद्र नगर के मेघ-सीता भवन, महावीर स्वामी जिनालय परिसर में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान साध्वी श्री स्नेहयशाश्रीजी ने कही।
साध्वीजी ने आगे कहा कि जब कोई व्यक्ति अच्छा काम करता है तो लोग उसमें दोष निकालने से पीछे नहीं हटते है। जबकि वे लोग यह भी जानते है कि उस काम वो खुद भी नहीं कर सकते है। आपको यह भी पता होता है कि वह व्यक्ति जो अच्छा काम कर रहा है, उसे उससे सुख की प्राप्ति होगी। यह जानते हुए आप खुद ऐसा काम नहीं करते और दूसरों में दोष निकालने में आगे रहते हो। आपका आलस और आपका द्वेष उस काम को करने से आपको रोक देता है। आपको खुद के अंदर आशा की किरण जगानी होगी। आपको खुद के अंदर आत्मविश्वास जगाना होगा। किसी भी काम को अच्छा बनाने के लिए आपको नियमित अभ्यास की जरूरत है। नियमित अभ्यास करने से अापके अंदर आत्मविश्वास की अलख जगेगी। अापको खुद को यह संत्वना देकर कोई काम को शुरु करना होगा कि आज नहीं तो कल वह काम जरूर सफल होगा।
एक बूंद सुख मिले तो आप लाख दुख भूल जाते हो।
साध्वी स्नेहयशाश्रीजी कहती हैं कि आप थोड़ा सा सुख पाने के लिए अपने लाखों दुख भूल जाते हो। एक आदमी जंगल में जाता है, अचानक उसके सामने हाथी आ जाता है। हाथी उस आदमी को देखकर उसकी तरफ दौड़ने लगता है। उसे देख वह इधर-उधर भागना शुरू कर देता है। एक पेड़ को देखकर उसके मन में आशा की एक किरण जागती है, वह सोचता है कि हाथी तो पेड़ में चढ़ नहीं सकता और वह पेड़ पर चढ़ जाता है। हाथी अपने सूड़ से पेड़ को जकड़ लेता है और हिलाने लग जाता है, पर उसे यह पता रहता कि हाथी ऊपर चढ़ नहीं पाएगा। वह अपने आप को सुरक्षित करने की सोचता है तो इधर-उधर देखता है। उसके हाथ के ऊपर वाली डाली में मधुमक्खी रहती है और वह नीचे देखता है तो पेड़ के दूसरी तरफ खाई रहती है, उसमें अजगर सांप उसका इंतजार कर रहा होता है कि कब वह गिरे और उसे में खा जाऊ। फिर वह देखता है कि जिस डाल पर खुद चढ़ा हुआ है, उसमें एक सफेद और एक काला चूहा उस डाली को काट रहे होते है। वह चारों ओर से घिरा हुआ है, अब मौत से उसे कोई नहीं बचा सकता। इतने में ही मधुमक्खी के छत्ते से एक बूंद शहद उसके मुंह में टपकती है, वह उसका स्वाद लेता है। इस मीठे स्वाद को लेते समय वह सभी चीजों को भूल जाता है। अब वह अपनी जान बचाने के बजाय शहद के दूसरे बूंद के टपकने की प्रतिक्षा करने लग जाता है। यह एक बूंद शहद ही दुनिया के सुखों में से एक छोटा सा सुख है, जिसे प्राप्त करने हम प्रतिक्षा करते रहते है।
दुनिया के अमीर भी सुखी नहीं।
साध्वीजी कहती है कि आप बड़े से बड़ा, महंगे से महंगा साधन जुटा लो आपकाे वह साधन सुख नहीं दिला सकता है। दुनिया भर के सबसे टाॅप 10 अमीर लोगों से भी आप जाकर पूछोगे तो वे संतुष्ट नहीं रहते, उन्हें वह खुशी नहीं मिलती जिसकी वे तलाश में रहते है। आप खुद भी दुनिया को सबसे अमीर व्यक्ति बनना चाहते हो, पर आप वह बनने में अपना समय बर्बाद कर दोगे और फिर भी वह सुख आपको नहीं मिल पाएगा जिसकी आप तलाश में हो। दुनिया में भी आप एक उसी एक बंुद रूपी सुख की प्रतिक्षा करते रहते हो, जो आपको खुद नहीं पता कि वह कब मिलेगा। कोई गुरु, कोई साधु-संत आपको अगर रास्ता बताते है, तो भी आप उस एक बूंद के लिए रूके रहते हो। आपके पास जो है, वह पर्याप्त है। आप अपने वर्तमान के साधनों से संतुष्ट है तो आपसे बड़ा अमीर व्यक्ति इस दुनिया में कोई नहीं है। अगर आपके पास जो साधन है, अापको उससे ज्यादा की चाह है, तो आप कभी सुख का लाभ नहीं प्राप्त कर सकते हो।
तप के लाभार्थी।
धर्मराज बेगानी धार्मिक एवं परमार्थिक ट्रस्ट के ट्रस्टी मेघराज बेगानी तथा आध्यात्मिक चातुर्मास समिति के अध्यक्ष विवेक डागा ने बताया कि गुरुवार को पंचपरमेष्ठी तप और 18 पाप स्थानक निवारण तप किया गया। तप के लाभार्थी श्री सज्जन कुमार जी, अजय जी, विजय जी, संजय जी कानूगा परिवार, श्री मोहनलाल जी, प्रवीण जी, नवीन जी, नितिन जी भंसाली परिवार नगरी रायपुर वाले प्रकाशचंद जी, तारा देवी सिंगी के आत्मश्रेयार्थ संजय सिंगी परिवार रहे।