कवर्धा :- इंसान की जिंदगी में सबसे पहले मुलभूत आवश्यकता रोटी, कपड़ा, मकान है, रोटी सरकार दे रही है।तन ढकने के लिए गरीबी के पास कपड़े कम है, मकान सरकार व्यवस्था कर रही है, उसे पर भी भ्रष्ट्राचारियों ने अपने लिए रुपए कमाने का जरिया बना लिया हो तो सारा दोष सिस्टम का ही माना जा सकता है। आप सोच रहे होंगे किसी फिल्म की कहानी बताई जा रही है, जी नही कबीरधाम जिले के विकास खंड पंडरिया के दुरस्त सुदूर वनांचल क्षेत्र बीहड़ जंगल के बीच बसा, कभी किसी तत्कालीन बिलासपुर जिला कलेक्टर हर्शमंदर साहब ने अपने पदयात्रा के दौरान सेंदुरखार पहुंचकर वहां का क्लाइमेट देखकर छोटा कश्मीर के नाम से पहचान दिया था। मध्यप्रदेश के सरहद किनारे बसा सेंदुरखार का मान बढ़ाया था, वहां के आश्रित ग्राम चाउरडोंगरी के बैगा आदिवासियों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ बोले भाले बैगाओ को दिया गया था, उसे विगत तीन साल से ठेकेदार ने राशि खाकर चंपत हो अधूरा छोड़ दिया है, उस पर बात हो रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना देश की सबसे महत्वपूर्ण बहुप्रतीक्षित योजना में से एक मानी जाती है। उन गरीबों को सरकार मकान बनाकर देने जा रही है, जो अपने बल-बूते कभी अपने सर के नीचे छत नही बना सकते हैं। मानव समाज में सभ्यता के सबसे नीचे पहचान की जाती है, विलुप्त प्रजाति के संसक्षित जनजाति बैगा समाज जो पहाड़ों के बीच ज्यादातर बसे हुए हैं। इन्हें रोटी कपड़ा मकान की मूलभूत आवश्यकता के अलावा शिक्षा स्वास्थ्य बिजली पानी सड़क की भी जरूरत है, जो समस्या बनकर खड़ी हुई है। बैगा विकास के नाम करोड़ों रुपयों का खर्च सरकार कर रही है। उसे बन्दर बांट साल दर साल शासन-प्रशासन से जुड़े हुए लोग कर रहे है, इसलिए समस्या आज भी बना हुआ है। तीन साल पूर्व प्रधानमंत्री आवास योजना अन्तर्गत चाऊर डोंगरी के बैगा चरनु और रति के नाम पर आवास पास हुआ है, जिसे सरकारी तंत्र के द्वारा बनवाया जा रहा था, मकान बनाने का ठेका राहीडाढ़ के पंसारी मिस्त्री को दे दिया गया। चरनु बैगा के मकान प्लिंथ तक काम हुआ है, पहली किस्त 34 हजार दूसरी किस्त 45 हजार निकालकर ठेकेदार को दे दिया है, आगे काम नही किया है, मकान अधूरा रह गया है। सीमेंट से भरी बोरी पत्थर हो गया है। रति बैगा के आवास तो मात्र जमीन पर चार कालम छड़ के खड़ा दिखता है, इसने भी पहली व दूसरी किस्त की राशि पंसारी मिस्त्री को दे दिया है। आवास के लिए 1लाख 30 नकद राशि और 15 हजार मजदूरी के लिए अलग से रोजगार गारंटी योजना के अन्तर्गत दिया गया है। किन्तु सवाल ये उठता है कि इस योजना में लगे सरकारी तंत्र ने क्या देखा निर्माण कार्य के प्रोग्रेस रिपोर्ट दिए, जिस के आधार पर राशि निकालने की अनुमति दिया गया है जिस अधार पर हितग्राही राशि निकाल दे दिया है। ठेकेदार और सरकारी तंत्र दोनों के मिलीभगत से बैगा का मकान नही बन सका है। इसके लिए जिम्मेदार भ्रष्ट लोगों के खिलाफ सख्त कड़ी कार्रवाई होना चाहिए। इस कार्य में आवास मित्र इंजिनियर, सरपंच, सचिव, सीईओ सभी की भूमिका है। प्रधानमंत्री का नाम जिस योजना में जुड़ा हो उसे भी भ्रष्ट्राचारियों ने नही छोड़ा है। इसका सीधा सा मतलब है, कि सिस्टम में ही खराबी होने के चलते विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा आदिवासियों के मकान विगत तीन साल से अधूरा पड़ा हुआ है और प्रशासन को कोई जानकारी नहीं है।