रायपुर। न्यू राजेंद्रनगर स्थित महावीर स्वामी जिनालय में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान गुरुवार को साध्वी स्नेहयशाश्रीजी ने कहा कि घर में जब एक कांच का गिलास टूट जाए तो दिल दुखी हो जाता है। हम जब उस कांच के गिलास को खरीदने जाते हो तो आपको यह पता होता है कि यह कांच एक दिन टूट ही जाना है। फिर भी आप उसे अपने घर की शोभा बढ़ाने के लिए खरीदते हो।
साध्वी जी कहती है कि आपको राग करना है तो हाई क्वालिटी का करो। अगर आपको राग करने हैं तो द्वेष भी करना पड़ेगा। अगर आपको क्रोध आ जाए तो आपको किसी व्यक्ति के ऊपर क्रोधित नहीं आना है बल्कि आपको अपने क्रोध के भाव पर क्रोधित होना। आपको सभी नकारात्मक भावों के साथ द्वेष करना है। कोई व्यक्ति अपने परिवार में समाज में अपने दफ्तर में लोगों के साथ सद्भावना के साथ नहीं रहता है। उसके मन में सदस्यों के प्रति द्वेष रहता है। ऐसा करने पर कर्मसत्ता उसे तुरंत निगोद में पहुंचा देती है। जबकि आप किसी पराये या अंजान व्यक्ति से कोई सद्भावना रखते है तो कर्मसत्ता आपको सिद्धशिला में ले जाती है।
राग और द्वेष एकसाथ रहते है।
एक बार चार मित्र होटल में खाना खाने जाते हैं। वहां वह अपने अपने खाने का आर्डर दे देते हैं। थोड़ी देर में उनका खाना टेबल पर आ जाता है लेकिन पापड़ रह जाता है। उनमें से एक मित्र वेटर को बुलाता है और पापड़ में देरी की वजह पूछता है। वेटर कहता है कि पांच मिनट में पापड़ आ जाएगा। पांच मिनट बाद भी पापड़ नहीं आता तो वह किचन में जाकर देखता है, तो पापड़ सीक रहा होता है। वह व्यक्ति वेटर के ऊपर क्रोधित हो जाता है और वहां रखे चाकू से उस पर हमला कर देता हैं। वेटर की वहीं पर मृत्यु हो जाती है। साध्वीजी कहती है कि यहां पर पापड़ राग है, इसके साथ वेटर पर क्रोधित होना द्वेष है। राग और द्वेष हमेशा दोनों एक साथ ही रहते हैं।
दुनिया में सब रोगी, दुखी और अज्ञानी।
साध्वीजी कहती है कि हम जो भी काम करने हैं बाहर से कर रहे हैं। हम अंतर्मन से कोई काम नहीं कर रहे लेकिन हमें जो करना है अंदर से ही करना होगा। बाहर का किया हुआ सब दिखावा है। इस संसार के अंदर रोगी, दुखी और अज्ञानी ज्यादा है। यहां हर कोई बात-बात पर कहता है कि आज हाथ-पैर बहुत दुख रहा है आज मेरा सिर दर्द दे रहा है तो कभी पेट में परेशानी रहती है। वैसे ही लोग बात बात पर अपना दुख भी पता नहीं लग जाते हैं किसी को परिवार से दुख है, किसी को दोस्तों से दुख है तो किसी को अपने साथ काम करने वाले कर्मचारियों से दुख है। वहीं, लोग अज्ञानी भी है। कुछ भी पूछने पर वे कहते हैं मुझे नहीं पता। वैसे ही अगर व्यर्थ की किसी भी बात पर वे कहते हैं कि यह तो मुझे पता है। मुझे मालूम है, मुझे पहले से ही पता था कि यही होने वाला है। तो बताइए आप अज्ञानी कैसे हुए।
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शहर में पहली बार जन्माष्टमी पर सबसे बड़ा आयोजन, एक साथ 108 बाल कृष्ण ने फोड़ी मटकियां।
न्यू राजेंद्र नगर स्थित महावीर स्वामी जिनालय में गुरुवार को जन्माष्टमी के अवसर पर मटकी फोड़ का आयोजन किया गया। मेघराज बेगानी धार्मिक एवं परमार्थिक ट्रस्ट तथा आध्यात्मिक चातुर्मास समिति के अध्यक्ष विवेक डागा ने बताया कि शहर में यह पहला मौका है कि एक साथ 108 बाल कृष्णा बनकर बच्चों ने मटकी फोड़ी। सुबह से बच्चों में मटकी फोड़ को लेकर उत्साह का माहौल रहा। जिनालय परिसर में 4 से 5 फीट की ऊंचाई पर बच्चों के लिए मटकी लगाकर उन्हें फूल और फलों से सजाया गया। इसके बाद विचक्षण विद्यापीठ के 108 बच्चों ने बाल कृष्ण के रूप में दही हांडियां लूटी। जन्माष्टमी पर दही हांडी लूट कार्यक्रम के लाभार्थी सृजन पंडरी ओसवाल परिवार है।
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