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पांडातराई के शासकीय अस्पताल बीमार, वर्षों से डाक्टर नही।

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कवर्धा - स्वास्थ्य की दृष्टि से कबीरधाम जिले की बदहाल व्यवस्था देखकर नही लगता है, कि प्रशासन संवेदशीलता के साथ संजीदिगी के साथ लोगों के जीवन से ख्याल रखता है। तभी तो जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों के परवाह किए बिना ही अवैधानिक तरीके से बिना डिग्री धारी डाक्टर नर्सिंग होम खोलकर संचालित कर रहे हैं। जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर और ब्लाक मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर नगर पंचायत पांडातराई में 1972 से उपस्वास्थ्य केन्द्र संचालित है, आज प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्थिति बदहाली का शिकार है। 9 हजार की आबादी वाले इस शहर के अस्पताल में वर्षों से डाक्टर नहीं है। जो स्वास्थ्य सुविधा की बदहाली को बताने काफी है। नगर सहित आसपास के लोग झोला छाप डाक्टर, बैगा-भूनिया, झाड़फुक, तंत्र-मंत्र वालों के पास जान बचाने की डर से इलाज कराने मजबुर हैं। वहीं पांडातराई के मुख्यमार्ग पर बिना डिग्रीधारी डाक्टर जो निजी अस्पताल डाक्टरों के नाम का बड़ा-बड़ा बोर्ड लगाकर संचालित कर रहे हैं। इन निजी अस्पतालों में मुख्य नगर पालिका अधिकारी अनुज्ञा, ब्लूप्रिंट नक्शा, खसरा के अलावा नर्सिंग एक्ट के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। ये फर्जी निजी अस्पताल वाले एक्सरे ,सोनोग्राफी, ईसीजी मशीन आदि रखकर पुलिस थाना से महज 100 से 200 मीटर व 500 मीटर दूरी पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है, वहां संचालित कर रहे है। ब्लाक एवम् जिला के चिकित्सा अधिकारी कार्रवाई भी नही कर रहे हैं। यहां पर यह बताना आवश्यक है, कि कुछ निजी अस्पताल और पैथॉलाजी लेब के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बन्द किए थे, इसके लिए पीठ थपथपाई जा सकती है, किन्तु आश्चर्य तो इस बात से होता है, कि नर्सिंग एक्ट की कड़े कानून के बाद भी ये संचालित दुकान फिर से खुल गई है। जो जिले के मेडिकल ब्यवस्था को देख रहे हैं, वह कानून को मजाक बना दिए हैं। जानकार लोगों की माने तो उस अस्पताल के डॉक्टरों के खिलाफ पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्जकर नर्सिंग एक्ट के तहत कार्रवाई होना चाहिए जो की नही किया जा रहा है। इसका सीधा मतलब है, जिले व ब्लाक मुख्यालय मेडिकल आफिसर के मिलीभगत से मामला जुड़ा हो सकता है। कुछ अस्पताल के डॉक्टर बी.एम.एस. की डिग्री लेकर अस्पताल संचालित कर पैथॉलाजी इलाज कर रहे हैं। सभी अस्पतालों के सामने मेडिकल स्टोर भी खोल लिए है। सरकारी अस्पतलों में सुविधाएं नही मिलने से हैरान परेशान गरीब परिवार के लोगों को जान जोखिम में डालकर उन गैर डिग्रीधारी डाक्टर के पास जाकर इलाज कराने मजबुर हैं। पांडातराई के शासकीय अस्पताल के संबंध में पूछा गया, तो नगर पंचायत अध्यक्ष फिरोज खान ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र 1972 से संचालित है, डाक्टरों के अभाव में नगर सहित आसपास के लोगों को सुविधाएं उपलब्ध नही हो पा रही है। अस्पताल चलाने लायक भवन भी नही है। नया अस्पताल भवन निर्माण कार्य चल रहा है। पांडातराई में लंबे समय से डाक्टर नही है, दो महीने पूर्व एक डाक्टर की नियुक्ति हुई थी वह भी नदारत है। पांडातराई के अधिकांश स्टाफ पंडरिया कवर्धा में संलग्न हैं। एक R.M.A. त्रिय वर्षीय पाठ्यक्रम वाले व कार्यकर्ता के भरोसे दो छोटे-छोटे कमरों वाली अव्यवस्थित भवन में अस्पताल चल रहा है। विभागीय जानकार अफसर सूत्र की माने तो मंत्रालय स्तर पर गैरकानूनी तरीके से खोले गए निजी चिकित्सालय पर कार्रवाई में शिथिलता अपनाई जा रही हो तो किसी को आश्चर्य नही होना चाहिए। तभी तो निजी अस्पताल खोलने वालों की बाढ़ सी आ गई है। इसलिए कबीरधाम जिले के पांडातराई प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र उपेक्षा के शिकार होना स्वाभाविक है, तथा फर्जी डिग्रीधारी डाक्टर के निजी अस्पताल में इलाज कराने भी आम गरीब आदमी मजबुर हैं।

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