रायपुर - पर्यूषण पर्व के चौथे दिन रविवार को न्यू राजेंद्र नगर स्थित महावीर स्वामी जिनालय के मेघ-सीता भवन में दोपहर 2 बजे तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामीजी का जन्मवाचन हुआ। श्री जैन श्वेतांबर आध्यात्मिक चातुर्मासिक समिति के अध्यक्ष श्री विवेक डागा ने बताया कि भगवान महावीर स्वामी के माता-पिता के रूप में बनकर आएं 51 जोड़ों को देखकर श्रावक-श्राविकाओं ने भगवान के माता-पिता की अनुभूति की। साथ ही भगवान के जन्म वाचन का श्रवण कर पुण्य अर्जित किया। इसी कड़ी में परम पूज्य गुरूवर्या साध्वीश्री स्नेहयशाश्रीजी के सानिध्य में श्री पालनाजी झुलाने का सौभाग्य जतनबाई बैद, संघवी के मोहनचंद मल्लीचंद बैद, कमलचंद प्रवेश कुमार बैद परिवार को मिला।
भोजन ही नहीं, दोषों का भी व्रत करो।
साध्वीजी कहती है कि चातुर्मास का यह 4 माह जप-तप और साधना को समर्पित होता है। इस दौरान श्रावक-श्राविकाएं कई तप करते हैं। तप के दौरान वे भोजन का त्याग करते हैं। इस चातुर्मास आप यह प्रण ले कि आपको केवल भोजन ही नहीं बल्कि अपने दोषों का भी त्याग करना है। तप के साथ आप यह संकल्प ले कि आज के दिन मुझे किसी के बारे में गलत नहीं कहना है, ऐसी कोई बात नहीं कहनी है, जिससे कि किसी को ठेस पहुंचे। एक बार की बात है प्रवचन सुनने एक दादी मां और उनका पोता सत्संग में आते थे। पोता जवान था और अपनी दादी को वह लेकर आना-जाना करता था। एक दिन किसी कारण से किसी व्यक्ति में पोते को कुछ बुरा भला कह दिया। इस पर अगले दिन वह अपनी दादी को प्रवचन स्थल के बाहर ही छोड़कर चला गया। गुरु ने दादी से पोते के बारे में पूछा कि आज वह क्यों नहीं आया है। दादी ने पूरी बात बताई तो गुरु ने कहा कि आप कल उसे अपने साथ लेकर आइएगा। दूसरे दिन दादी अपने पोते को लेकर आती है और गुरु से मिलने को कहती है। गुरु पूछते हैं कि ऐसा क्या हुआ कि तुमने प्रवचन में आना बंद कर दिया। उसने भी गुरु को पूरी बात बताई। गुरु ने कहा कि अगर कोई बोले कि आप अपनी संपत्ति छोड़ दो, अपना घर द्वार छोड़ दो, अपना परिवार छोड़ दो, तो क्या तुम उन्हें छोड़ दोगे। पोते ने कहा नहीं। गुरु ने कहा तो तुम्हें किसी ने कुछ कह दिया तो तुमने प्रवचन में आना छोड़ दिया।