भगवान का पालन झुलाने का हरेक को मिला पुण्यलाभ,
आउटडोर स्टेडियम बूढ़ापारा में ऐतिहासिक रहा पर्यूषण महापर्व का पंचम प्रभात।
रायपुर, 28 अगस्त। राष्ट्रसंत परम पूज्य श्रीललितप्रभ सागरजी एवं परम पूज्य मुनिश्री डॉ. शांतिप्रिय सागरजी के आउटडोर स्टेडियम बूढ़ापारा में रविवार को दिव्य सत्संग के अंतर्गत पर्युषण पर्व के पंचम दिवस सूत्र शिरोमणि कल्पसूत्र पर आधारित ‘प्रभु महावीर का भव्य जन्मोत्सव’ मनाया गया। आउटडोर स्टेडियम बूढ़ापारा में रविवार को पर्यूषण महापर्व का पंचम प्रभात ऐतिहासिक हो उठा जब राष्ट्रसंतों के श्रीमुख से भगवान के जन्म वांचन प्रसंग का श्रवण करने श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान महावीर की माता त्रिशला महारानी को भगवान के जन्म से पूर्व दिखाई दिए चौदह महास्वप्नों समेत पालनाजी व कल्पवृक्ष के दर्शन कर उन्हें बधाने न केवल जैन धर्मावलंबी अपितु पहली बार 36 कौमों के हजारों श्रद्धालुजन यहां एकत्र हुए।
दिव्य चातुर्मास समिति व श्रीऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों समेत सकल जैन समाज की इस अनुष्ठान में बड़ी संख्या में सहपरिवार उपस्थिति अत्यंत उत्साहजनक रही।
आरंभ में श्रीऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया एवं दिव्य चातुर्मास समिति के अध्यक्ष तिलोकचंद बरड़िया ने भगवान महावीर जन्म वांचन समारोह के शुभारंभ की घोषणा कर श्रद्धालुओं को चौदह महास्वप्नों के चढ़ावे का लाभ लेने के साथ-साथ एमजी रोड में आकार ले रही भव्य श्वेतधवल दादाबाड़ी एवं जिनमंदिर के निर्माण में अपनी लक्ष्मी का सुकृत्य में हरसंभव सदुपयोग करने का आह्वान किया। मंदिर ट्रस्ट कार्यकारी अध्यक्ष अभय भंसाली ने इस पुनीत प्रसंग को जैन समाज की गौरवशाली परम्परा में सहभागी होने के लिए मंदिर ट्रस्ट व चातुर्मास समिति की ओर से सबका अभिनंदन व्यक्त किया। साथ ही श्रीऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट व दिव्य चातुर्मास समिति के सभी पदाधिकारियों का इस भव्य आयोजन के लिए पूज्य संतश्री ने वासक्षेप के द्वारा अभिनंदन कर शुभाशीर्वाद दिया। तदुपरांत वरिष्ठ सुश्रावक सुपारसचंद गोलछा सहित अजय जैन, सुरेश भंसाली, रवि जैन आदि के संचालकत्व में 14 महास्वप्नों को बधाने का पुण्यलाभ सौभाग्यशाली जनों को पारम्परिक रीति से प्राप्त हुआ।
महिला मंडलों ने प्रस्तुत की हर महास्वप्न की सुंदर झांकी
जैन समाज के विभिन्न महिला मंडलों ने भगवान की माता त्रिशला महारानी को दिखाए दिए 14 महास्वप्नों में से बारी-बारी से एक-एक महास्वप्न का दर्शन श्रद्धालुओं को नयनाभिराम झांकियों के माध्यम से भक्तिपूर्ण गीतों पर नृत्य करते हुए कराया। जिसमें क्रमश: वर्धमान महिला मंडल, ऋषभ महिला मंडल, ओंकार मित्र महिला मंडल, वामा महिला मंडल, जिनकुशल महिला मंडल, जिनकुशल बहु मंडल गुढ़ियारी, एसपीजी महिला मंडल, निपुणा बहु मंडल, जागृति महिला मंडल, समृद्धि महिला मंडल, भक्ति मंडल शंकरनगर, त्रिशला महिला मंडल, मल्ली महिला मंडल, संभव महिला मंडल व नमिता सोनी ग्रुप की अत्यंत अनुमोदनीय भागीदारी रही। विशेष रूप से हर महास्वप्न की थीम पर केसरी सिंह, महालक्ष्मी, कलश धारण किए हुए दिग्कुमारियों की झांकियां हरेक को मंत्रमुग्ध कर गर्इं। श्रद्धालुओं ने भावोल्लास के साथ मुक्तहस्त से अपनी लक्ष्मी का सदुपयोग कर अपूर्व पुण्यार्जन किया। वहीं भक्तिभावों से ओतप्रोत कर देने वाले प्रसिद्ध भजन गायक व विधिकारक विमल गोलछा, सुरेश भंसाली व साथियों ने सांगीतिक भजनों की प्रस्तुति देकर भगवान के जन्म प्रसंग को अविस्मरणीय बना दिया। भगवान के जन्म प्रसंग पर सभी ने भगवान महावीर स्वामी की जय-जयकार के साथ खुशियां मनाईं।
महास्वप्नों को इन परिवारों ने बधाया।
चातुर्मास समिति के महासचिव पारस पारख, प्रशांत तालेड़ा व कोषाध्यक्ष अमित मूणोत के अनुसार महास्वप्नों को बधाने के सौभाग्यशाली परिवारों के नाम हैं-
गज/हाथी- श्रीमती सरला देवी अमरचंद पुत्र- पारसमल संतोष, बसंत, उज्जवल कुमार झाबक परिवार।
मोतियों की माला- ज्योत्सना बेन अनिल भाई घेलानी व राजकुमार शाह परिवार।
वृषभ- कस्तूरचंद, महावीरचंद, प्रकाशचंद, आनंदराज बुरड़ परिवार।
माला- हीरचंद, केशरीचंद सुनील कुमार, कोमलचंद चोपड़ा परिवार।
केसरी सिंह- सम्पलाल, गुलाबचंद, गौतमचंद, नवलजी मालू परिवार।
माला- कन्हैयालाल, राजकुमार बैद परिवार मुंगेली।
महालक्ष्मी- चूकी देवी चंदनमलजी पुत्र- प्रकाशचंद, माणकचंद, राजेंद्रकुमार सुराना एवं कमलाबाई झांबड़ परिवार।
माला- सरसदेवी पांचीलालजी, राजेंद्र, नरेंद्र, वीरेंद्र पारख परिवार।
पुष्प युगल माला- पानीबाई आसकरणजी तिलोकचंद ललित कमल सुरेश सुनील अभय भंसाली परिवार।
माला- गौतमचंद मीनादेवी, अभिनव, अभिषेक लोढ़ा परिवार।
पूर्ण चंद्र- डॉ. अनूपचंद, स्वरूप कुमार, नीरज, विशेष छाजेड़ परिवार एवं मुकेश चोपड़ा परिवार।
माला- कमलाबाई जयवंत राजजी, पुत्र- तिलोकचंद पारख परिवार।
सूर्य- खेमराज, नेमीचंद पारसचंद श्रीश्रीमाल परिवार।
माला- पुखराज मुणोत परिवार-सूरजदेवी गुलाबचंद चेरिटेबल ट्रस्ट।
केसरिया ध्वजा- सरसदेवी-पांचीलाल, नरेंद्र, वीरेंद्र, अरिहंत पारख परिवार।
माला- गौतमचंद निलेशचंद बोथरा परिवार।
कुम्भ कलश- चंदरी देवी भंवरलाल पुत्र- टोडरमल सुरेश अशोक विजय अजीत कांकरिया।
माला- महेंद्र, नरेंद्र, तेजस सराफ परिवार।
पद्म सरोवर- श्रीमती मदनाबाई-जसराज, पुत्र तिलोकचंद, शांतिलाल, अशोक कुमार बरड़िया परिवार।
माला- पुष्पादेवी-सम्पतलाल पारख-नैवेद्य परिवार।
क्षीर समुद्र- हुकुमचंद अशोक, कमल, ललित, कमल राजेंद्र पटवा परिवार एवं सुशीलादेवी साधना देवी मुणोत परिवार।
माला- जेवीएन ग्रुप।
देव विमान- खरतरवसिही ट्रस्ट मंडल।
माला- कमलाबाई पारसचंद, पुत्र सुपारसचंद, विमल, कमल, राजेंद्र गोलछा परिवार।
रत्नों की राशि- सरसदेवी-पांचीलाल, नरेंद्र, वीरेंद्र, अरिहंत पारख परिवार एवं सरलादेवी
पुत्र- पारसचंद, संतोष, बसंत झाबक परिवार।
माला- अनुमोदना ग्रुप हस्ते- संतोष झाबक।
निर्धूम अग्नि- चंदरी देवी भंवरलाल पुत्र- टोडरमल सुरेश अशोक विजय अजीत कांकरिया-सुमित ग्रुप।
माला- पारसमल दिलीप, बसंत कुमार कोचर परिवार।
कल्पवृक्ष- कमलाबाई-पारसचंद पुत्र- विमल, राजेंद्र गोलछा परिवार।
पालनाजी- राजेश मूणत परिवार, कमल भंसाली परिवार, मनोज कोठारी परिवार, हुकुमचंद पटवा परिवार, महावीर तालेड़ा परिवार, अशोक पटवा परिवार, कांकरिया परिवार-सुमित ग्रुप।
भगवान के जन्म पर थाली बजाने का लाभ- अशोक कुमार पूर्वेश कुमार तातेड़ परिवार।
रात्रि में हुई प्रभु भक्ति।
श्रीऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टीगण तिलोकचंद बरड़िया, राजेंद्र गोलछा व उज्जवल झाबक ने बताया कि जन्म महोत्सव के उपरांत हजारों श्रद्धालुओं ने गौतम प्रसाद-स्वधर्मी वाल्सल्य का लाभ लिया। रात्रि में सत्संग पांडाल में पालनाजी के लाभार्थी परिवार द्वारा प्रभु भक्ति की गई। पर्यूषण पर्व पर प्रात: एवं सायंकालीन प्रतिक्रमण कर श्रावक-श्राविकाओं द्वारा जीवों को अभयदान दिया जा रहा है। वहीं महिलाओं का पौषध आराधना हॉल सदरबाजार में एवं पुरुषों का पौषध व्रत दादाबाड़ी में किया जा रहा है। पर्युषण पर आंगी समिति सदरबाजार द्वारा प्रभु परमात्मा की प्रतिमाओं की मनोहारी आंगी सदर जैन मंदिर में सजाई जा रही है।
सोमवार का प्रवचन ‘महान तीर्थंकरों का महान जीवन दर्शन’ विषय पर।
दिव्य चातुर्मास समिति के महासचिव प्रशांत तालेड़ा व कोषाध्यक्ष अमित मुणोत ने बताया कि सोमवार 29 अगस्त को पर्वाधिराज पर्युषण पर्व आराधना के छठवें दिन प्रात: ठीक 8.40 बजे से कल्पसूत्र आधारित ‘महान तीर्थंकरों का महान जीवन दर्शन’ विषय पर विशेष प्रवचन होगा।