जिम्मेदारी का निर्धारण कर कार्रवाई की आवश्यकता। घटिया निर्माण कार्य पर कोर कटिंग दे रहा अच्छा प्रमाणपत्र। कवर्धा :- नगर पंचायत पंडरिया ने कार्यालय की आय बढ़ाने के दृष्टिकोण से कुछ वर्ष पहले शापिंग कांपलेक्स निर्माण कराया था, किन्तु देखरेख के अभाव व नगर में हो रहे निर्माण कार्य पर मिलने वाली अधिकारियों के लिए अतिरिक्त आय के जरिया बना कमीशन के चलते लाखों रुपयों का भवन कूडादान में तब्दील हो बेजा कब्जा का शिकार हो गया है। नगर पंचायत पंडरिया को नगर पालिका का दर्जा 1984 से प्राप्त है, त्रिस्तरिय पंचायती राज्य व्यवस्था लागू होने के बाद से जनसंख्या के आधार पर नगर पंचायत बन गया है। पंडरिया अपने 27 से 28 वर्ष के कार्यकाल के दौरान बहुत कुछ स्वरूप बदला है । छत्तीसगढ़ राज्य अलग बनाने के 22 वर्ष बाद बहुत कुछ परिवर्तन भी दिखाई देता है, कीचड़ भारी पगडंडी रास्तों से चलना पड़ता था, चारों तरफ सीसी रोड बन गया है। बिजली पानी सड़क सफाई की सेवा भी बढ़ी है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है, किन्तु यहां चलते चलते यह बताना भी आवश्यक है, कि कार्यालय की आय वृद्धि के उद्देश्य को लेकर बनाए गए, नगर के लगभग सभी व्यावसायिक कांपलेक्स निर्माण अनियमितता और भ्रष्ट्राचार के चलते नगरीय प्रशासन के लचर व्यवस्था के शिकार हो उधारी के अधिकारियों के कमीशनखोरी सोच के परिणाम स्वरूप वह चाहे नई-पुरानी बाजारस्थल या फिर बसस्टैंड के कॉम्प्लेक्स सभी ध्वस्त हो गया है, इसके लिए जिम्मेदारी निर्धारित कर कार्रवाई किया जाय तो कई नेता और अधिकारी जेल की कालकोठारी में बन्द हो सकते हैं। एक अनुमान के मुताबिक करोड़ों रुपयों का भवन कांपलेक्स तालाबों का सौंदर्यीकरण बस स्टैंड,बाजार निर्माण कार्य पर राज्य शासन ने खर्च किया है, पर कोई उपलब्धि नही दिखाई पड़ता है। जिससे कहा जा सके कि हमारे शहर का अमुक निर्माण कार्य बहुत सुंदर है। जिसे उच्चाधिकारियों को नमूना के तौर पर दिखाई जा सकती है। तीन साल पूर्व की सीसी रोड निर्माण भ्रष्टाचारियों के शिकार हो बद से बत्तर हो गया है, अधिकारियों के लिए निर्माण पर एक मात्र बहाना कोर कटिंग बन गया है। वह कौन सी लेब है, जहां घटिया से घटिया सामग्री से बनाए गए निर्माण कार्य को सुंदर यानी गुणवत्तायुक्त बना देता है, उस लेब की भी जांच होनी चाहिए। खैर यहां तो नगर पंचायत कार्यालय के सामने मुख्यमार्ग पर बनाए गए शापिंग कांपलेक्स पर बात हो रही है। नगरीय प्रशासन विभाग ने आय बढ़ाने के उद्देश्य से लाखों रुपयों की स्वीकृति दे निर्माण कार्य कराया है, पर उन्हें क्या पता कि पंडरिया में नगरीय प्रशासन विभाग रायपुर के द्वारा बैठाये गये कार्यरत अधिकारी इतने मस्त हैं, कि जनता के द्वारा दिए गए राशि का कीमत ही नही समझता है। उन्हें केवल सामाग्री खरीदी, और घटिया निर्माण कार्य पर मिलने वाली कमीशन के रूप में धनलक्ष्मी पर गिद्ध दृष्टि है। तभी तो बेरोजगारी के दौर में रोजगार की तलाश में दर-दर भटकते बेरोजगारों को काम धंधा खोलने के लिए दी जाने वाली शापिंग कांपलेक्स नगर पंचायत अधिकारी के गलत नीति सोच में खोट व अक्षमता के कारण अव्यवस्था के शिकार हो कूडादान में तब्दील हो दुकान दारों के बेजाकब्जा का शिकार हो गया है।