हैदराबाद/रायपुर - हैदराबाद, त्रयनगर स्थित कारवान दादावाड़ी में आयोजित श्री संघ शास्ता वर्षावास–2026 के अंतर्गत 11 अगस्त 2026 को परम पूज्य गुरुदेव, गुणायाजी तीर्थ जीर्णोद्धार प्रेरक, खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. ने अपने चातुर्मासिक मंगल प्रवचन में कहा कि यह जिंदगी अनमोल है, हमारी साँसें अनमोल हैं और हमारी आँखें भी अनमोल हैं। हमें ऐसा मानव भव मिला है, जिसमें पंचेंद्रिय जीवन के साथ बुद्धि, प्रतिभा, योग्यता और कुछ करने की क्षमता प्राप्त हुई है। इसलिए इस जीवन की सार्थकता को समझना और इसे सही दिशा देना आवश्यक है।
गुरुदेव श्री ने चंदन और कोयले का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे हाथ में काला कोयला रखना भी हमारे हाथ में है और चंदन का टुकड़ा रखना भी। हम अपनी जिंदगी को कोयले जैसी काली बनाना चाहते हैं या चंदन जैसी सुगंधित, इसका निर्णय हमें स्वयं करना है। परिस्थितियाँ चाहे जैसी हों, अपने जीवन को किस दिशा में ले जाना है, यह हमारे हाथों में है।
उन्होंने कहा कि यदि हम अपने जीवन को कलात्मक बनाना चाहते हैं, आर्ट ऑफ लिविंग सीखना चाहते हैं तथा जीवन को मधुर और आनंदमय बनाना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपनी दृष्टि और मन को बदलना होगा। हमारी निगाह कभी दूसरों की बुराई की ओर नहीं जानी चाहिए। आँखों पर चौकीदार होना चाहिए, वाणी पर चौकीदार होना चाहिए और कानों पर भी चौकीदार होना चाहिए। इन सभी का सबसे बड़ा पहरेदार विवेक है। विवेक को आँखों पर लगाना है, वाणी पर रखना है और कानों पर भी बिठाकर रखना है।
गुरुदेव श्री ने प्रेरणा देते हुए कहा कि अप्रिय प्रसंगों को जीवनभर याद नहीं रखना चाहिए। अप्रिय घटना को मिट्टी पर लिखे शब्दों की तरह छोड़ देना चाहिए, जबकि अच्छी घटनाओं और दूसरों के अच्छे व्यवहार को पत्थर की लकीर की तरह हृदय में संजोकर रखना चाहिए। इससे जीवन में कटुता के स्थान पर मधुरता और नकारात्मकता के स्थान पर सकारात्मकता का भाव विकसित होता है।
जीवन में सदैव सकारात्मक एवं माधुर्यपूर्ण दृष्टिकोण रखना चाहिए। यदि हम चाहते हैं कि हमारा जीवन माधुर्य रस से परिपूर्ण हो, तो हमें अपने विचारों, वाणी और व्यवहार में भी माधुर्य भरना होगा। जिस प्रकार चंदन स्वयं सुगंधित रहता है और अपने आसपास के वातावरण को भी सुगंधित करता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने जीवन को ऐसा बनाना चाहिए कि उसके विचार और व्यवहार आसपास के वातावरण में सकारात्मकता एवं मधुरता का संचार करें।
गुरुदेव श्री के प्रेरणादायी प्रवचन ने सभी को अपने दृष्टिकोण, विचारों एवं व्यवहार में सकारात्मकता और मधुरता अपनाकर जीवन को सार्थक एवं सुगंधित बनाने की प्रेरणा दी।