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सेंदुरखार में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क का लाभ बैगा आदिवासियों को मिल रहा, दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में भी विभाग सड़क बनाने में सफल।

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                रामकुमार टंडन

कवर्धा :- जिले के अन्तिम छोर दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसा गांव सेंदुरखार तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़क पहुंची, ग्रामवासियों के साथ ही अविभाजित मध्यप्रदेश के निवासियों ने भी राहत भरी सांस लेने के साथी खुशी जाहिर कर रहे हैं। सड़क निर्माण एजेंसी के संवेदनशीलता और ठेकेदार ने दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसे बैगा आदिवासियों के कठिनाईयों को समझकर समय सीमा में ही आवागमन के साथ ही विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का सफल प्रयास किया है। परिणामस्वरूप सड़क बनकर तैयार हो गया है, सुविधा देने के लिए जनमानस खुशी जाहिर कर रही है। ज्ञातब्य हो कि पोलमी से सेंदुरखार तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़क बनाने लगभग एक दशक पहले भी पास हुआ था, कुछ दूरी तक सड़क निर्माण भी हुआ, किन्तु निर्माण एजेंसी ठेकेदार ने दुर्गम स्थान होने व संसाधनों की कमी के चलते निर्माण कार्य छोड़ भाग खड़े हुए थे, इस बार जिले विभागीय ऊर्जावान युवा सब इजीनियार ने निर्माण कार्य अपने हाथों में लेे ठेकेदार के साथ तकनीकी सामंजस्य बनाकर परिश्रम के बल पर पूरा करने में सफतापूर्वक मंजिल पार कर लिया है। जो जिले की विभागीय सफलता की पहचान कही जा सकती है। ग्राम सेंदुरखार की जनसंख्या लगभग 750 की है, अविभाजित मध्यप्रदेश के ग्राम धूर्कुटा से सटा हुआ है, सड़क की लंबाई 16.700 किलोमीटर की है, जो बनकर तैयार हो गया है, लोग इस मार्ग का लाभ ले रहे हैं। सेंदुरखार और धूर्कुटा की दूरी 4 से 5 किलोमीटर की है, मध्यप्रदेश की सरकार इस सड़क निर्माण कार्य को जोड़ कर निर्माण करती है, तो दो प्रदेश के सरहद किनारे रह रहे सगे संबंधियों को लाभ मिलने के साथ ही इस मार्ग से यात्रा करने वाले दोनों प्रांत के लोगों को मिला सकता है। सेंदुरखार हील सेंटर होने के साथ ही इसे छोटा कश्मीर क्षेत्र के लोग कहते हैं। सैलानियों को दुर्गम पहाड़ियों के वादियों का प्राकृतिक छटा भी देखने का अवसर प्राप्त होता है। खैर इन सब बातों का मजा तो प्रकृति पसंद शहरी लोगों को मिलेगा, उससे भी अधिक लाभ सेंदूरखार के उन दत्तकपुत्र जो प्रकृति के संरक्षक हैं। उन पहाड़ी बनवासियों को समाजिक आर्थिक सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होने के साथ ही मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिलेगा। सेंदुरखार के गरीब बैगा आदिवासियों ने सपने में भी नही सोंचा था, कि हमारे गांव तक सड़क आयेगी, जो आज केंद्रीय योजना के अन्तर्गत राज्य सरकार ने मैदानी क्षेत्रों के विकास की कल्पना पर आधारित है उसे फलीभूत कर दिया है।

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