अमृत काल में भी दत्तकपुत्रों को नही मिल रहा स्वच्छ पेयजल, सरकार और प्रशासन बेसुध।
रामकुमार टंडन
कवर्धा :- बीन पानी सब सून... आजादी का अमृतकाल चल रहा है, फिर भी मूलनिवासियों को पीने के स्वच्छ जल के लिए जदोजहाद करना पड़ता है। आजादी के 75 साल बाद भी छत्तीसगढ़ राज्य के कबीरधाम जिले के अन्तिम छोर में बसा राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र विलुप्त प्रजाति के संरक्षित वर्ग बैगा जनजाति आदिवासियों को नदिनाले झिरिया कुंवा का असुरक्षित जल ही जीवन जीने के लिए पीना पड़ता है। एक तरफ लोकतंत्र में जनता की चुनी हुई सरकार विकास के दावे पर अपनी पीठ थपथपाई में ही दिन रात लगी रहती है, जाती प्रधान देश में अशिक्षा गैरबराबरी अमानवियकृत व्यवहार व गरीबी की अभिशाप के चलते गरीब और भी गरीब अमीर और भी अमीर होता जा रहा है। एक आदमी भोजन के लिए मर रहा है। दूसरे के पास अकुट धन है। गरीब स्वच्छ जल पीने को तरस रहा है, अमीर सैकड़ों रुपए का बिसलेरी बाटल का पानी पी रहा है। जिले में पंडरिया विकासखंड एक अकेला ग्राम पंचायत सेंदुरखार है, जहां के बैगा आदिवासियों को साफ पानी पीने को नहीं मिल पा रहा है। हैंडपंप से आयरन युक्त मटमैला पानी निकल रहा है। सोलरपम्प सूर्य देव की कृपा पर चलता है, उसमे भी गांव की पूरी आबादी अपनी बारी पानी लेने का इंतजार करता है। मौसम खराब होने की दशा में पूरा गांव एक किलोमीटर दूर नदी का पानी पीने मजबुर हैं। यहां पानी समस्या को दूर करने के लिये विधानसभा के पूर्व विधायक मोहम्मद अकबर भाई ने सन 2011 में नदी की जल को पाईपलाईन विस्तारकर गांव तक पहुंचाने का काम किया है। किन्तु जब तक नदी में पानी रहता है तब तक लोगों को मिलता है, बाकी समय समस्याएं ज्यों का त्यों बनी रहती है। नदी के पानी में एक छोटा सा कुंआ बनाया गया है, उसमे डेढ़ एच पी का मोटर पम्प लगाया गया है। वह बिजली से चलती है, बिजली भी गांव की विकराल समस्या है, यहां सिंगल फेस कनेक्शन बिजली मिलता है, खराब होने पर कई कई दिनों तक बिजली सप्लाई बन्द रहती है। कहते हैं सृष्टि का आरंभ जल से ही हुआ है। दिन प्रतिदिन पानी की समस्या विकराल होती जा रही है, सभी लोग भलीभांति जानते हैं।

केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना नल-जल मिशन यहां तक नही पहुंच सका है। ऐसे में सहज से अंदाजा लगाया जा सकता है, कि सेंदुरख़ार में पानी की समस्या बहुत ही कठीन है। आश्रित ग्राम बांगर के पारा सांईटोला, राहीडांड, एरूमटोला, चाऊरडोगरी सभी स्थानों में पानी की बड़ी समस्या है। चाऊरडोगरी में तो इस साल भ्रष्टाचारियों ने 4 स्थान में बोरखनन कर असफल खाली बोर में हैंडपंप लगाकर गरीब आदिवासियों के साथ धोखाकर भाग खड़े हुए हैं, इस के लिए जो भी जिम्मेदार हो उनके खिलाफ अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा लगाकर वैधानिक कार्रवाई की आवश्यकता है, इस विषय पर हमने पहले भी प्रमुखता से समाचार लिखा था, किन्तु निष्क्रिय प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है। जो कई सन्देह को जन्म देता है। पूरे ग्राम पंचायत की बात की जाय तो बैगा आदिवासियों के आवास अधूरा पड़ा हुआ स्वास्थ्य सुविधा बदहाल है, जो सरकारी योजना है, अशिक्षा के कारण दम तोड़ जाता है। कुल मिलाकर ग्रामवासियों से जानकर लगता है, सरकार और प्रशासन पंचायती राज्य व्यवस्था में पंच सरपंच के सहारे ही विकास चाहती है, जो संभव नहीं है। सरकार व जिला प्रशासन को चाहिए ग्राम पंचायत सेंदुरखार की समस्या को दूर करने व विकास के लिए विशेष पैकेज तैयार कर योजनाबद्ध तरीके से कार्य कराया जाना आवश्यक है, ताकि मूलनिवासी संरक्षित जनजाति बैगा आदिवासियों को मूलभूत सुविधाओं का समूचीत लाभ मिल सकेगा।