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बच्चों को झूठ बोलना और चोरी करना आप ही सीखा रहे, जब वह ऐसा करें तो आपको बर्दाश्त नहीं: साध्वी स्नेहयशाश्रीजी

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रायपुर - बचपन से ही बच्चों को ऐसी जगह भेजो जैसा आप उन्हें बनाना चाहते हो। बच्चों का मन कच्चा होता है उन्हें आप जिस आकार में ढालना चाहो वे ढल जाएंगे। बच्चे को अपने पास बुला कर उसे कहोगे कि यह चॉकलेट यही खालो और पापा को मत बताना नहीं तो डांट पड़ेगी। यह बच्चे के प्रति आपके प्रेम को जरूर दर्शाता है पर ऐसा करके आप उन्हें चोरी करना सीखा रहे हैं। यह बातें न्यू राजेंद्र नगर के मेघ-सीता भवन, महावीर स्वामी जिनालय परिसर में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान गुरुवार को साध्वी स्नेहयशाश्रीजी ने कही। साध्वीजी कहती है कि आप शॉपिंग करने जाते हो तो बच्चों को अपने साथ ले जाते हो। आप हजारों की शॉपिंग करते हो यह सब बच्चा देखता है और उसके बाद आप उनसे कहते हो कि यह बातें पापा को मत बताना। बच्चा आपकी बात मान कर ऐसा नहीं करता लेकिन आप ऐसा करके उन्हें झूठ बोलना सीखा रहे हो। आपके दोस्त जब घर पर आते हैं और आपको उन से नहीं मिलना होता तो आप बच्चों को कह देते हैं कि जाओ दरवाजा खोल कर कह देना कि पापा नहीं है। जबकि बच्चा दरवाजा खोलता है और कह देता है कि पापा कह रहे हैं कि पापा घर पर नहीं है। अब यहां पर आपको सोचना होगा कि आपके दोस्त की नजर में आपकी छवि क्या होगी। आपने कभी सोचा है कि अगर आपके साथ ऐसा हो जाए तो आपको कैसा लगेगा। आपका बच्चा कभी झूठ बोले यह आप बर्दाश्त नहीं करोगे लेकिन यह कला तो आपने ही बच्चों को सिखाई है। जब भी आपने अपने बच्चों के सामने कोई गलती की तो यह समझ लेना उस गलती को वह बच्चा झट से अपने मन बसा लेता है। आप चाहे अच्छे काम करो या बुरे, बच्चा वही सीखेगा और वही काम करेगा क्योंकि बच्चे को वह काम कभी गलत नहीं लगेगा। उसके लिए वह कृत्य हमेशा के लिए सही होगा। क्यों, क्योंकि उसके पापा अगर वैसा काम करते है तो वह काम उस बच्चे के लिए कभी बुरा नहीं हो सकता है। बचपन से बोएं गुण के बीज। साध्वीजी कहती है कि यह एक सत्य घटना है कि एक व्यक्ति का बच्चा 4 महीने का था। झूले पर खेल रहा था और उसके पिता घर आएं तो उसे झुलाने लगे। इतने में बच्चे की माता भी कमरे में आती है। वह व्यक्ति अपनी पत्नी के कंधे पर हाथ रख देता है तो पत्नी झटके से अपने पति का हाथ कंधे से हटा देती है। पति हैरान रह जाता है। उसे समझ नहीं आता कि ऐसा क्यों हो रहा है। वह पूछता है कि यह सब क्या है। पत्नी कहती है कि आप पर पुरुष के सामने मेरे कंधे पर हाथ डाल रहे हो। पति आश्चर्यचकित हो जाता है, वह कहता है कि यह तो हमारा ही बेटा है तो यह पर-पुरुष कैसे हुआ। दूसरी बात यह बच्चा तो केवल चार महीने का छोटा सा बालक है, इसे क्या समझ में आएगा। साध्वी जी कहती हैं कि ऐसा नहीं है कि बच्चे छोटे हैं और वह कुछ समझ नहीं रहा है। पैदा होते ही बच्चे के अंदर संस्कार ढलना शुरू हो जाते हैं। यह आपके ऊपर है कि आपको बच्चे को कैसे संस्कार देने हैं। सारे संस्कार बच्चों के अंदर बचपन से ही आने शुरू हो जाते हैं। आप कोई ऐसा काम मत करो जिसकी अपेक्षा आप अपने बच्चों से नहीं करते हो। वर्तमान परिदृश्य में पिता पैसा कमाने की दौड़ में सुबह से घर छोड़ देता है। घर में माता भी सुबह से लेकर शाम तक घरेलू व्यवस्थापन में लगे रहती है। अब आप सोचिए कि बच्चों में संस्कार कैसे आएगा।

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