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बच्चों का जन्मदिन धूमधाम से मनाते मनाकर गुरु की जयंती भूल जाते हो क्योंकि परमात्मा के प्रति आपका प्रेम कम है: साध्वी स्नेहयशाश्रीजी।

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रायपुर। न्यू राजेंद्र नगर के महावीर स्वामी जिनालय में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान शनिवार को साध्वी स्नेहयशाश्रीजी ने कहा कि आप हर दिन मंदिर जाते हो पर फिर भी आपको गुरु भगवंतों की जयंती याद नहीं रहती जबकि आप अपने बच्चों का जन्मदिन कभी नहीं भूलते हो। बच्चों का जन्मदिन मनाने आप घर में भी ज्यादा तैयारी नहीं करते हैं क्योंकि उस में मेहनत लगती है उससे अच्छा आप सोचते हो कि कुछ रुपये ज्यादा खर्च हो जाए लेकिन किसी होटल में जाकर बर्थडे पार्टी मना ले। साध्वी जी कहती है कि भगवान के प्रति हमें प्रेम नहीं है इसीलिए हमें पैसे खर्च करते समय ताकत नहीं लगती हैं। जबकि आप को बच्चों के जन्मदिन पर खर्च करते समय कुछ नहीं सूझता है। अभी यहां पर आपको विचार करना है कि वर्तमान समय में आप किस पायदान में खड़े हो। आपको यह जन्म पुण्य करने के लिए मिला है। इस जन्म में आप पुण्य नहीं करोगे तो सोचिए आप कौन से भव में पुण्य कर सकोगे। यह मानव जीवन है, इसी जीवन में आप पुण्य कमा सकते हो। इस जन्म में आप किसी भूखे को खाना खिलाओगे तो अगले भव में धन-संपत्ति आपको मिलेगी और कभी आप भूखे नहीं रहोगे। इस जीवन में किसी रोगी की सेवा करोगे तो अगले रूम में आप भी निरोगी रहोगे। शांति ढूंढने की जरूरत नहीं, वह आपके अंदर ही है। साध्वीजी कहती है कि परमात्मा के लिए आपके पास समय नहीं है पर फालतू के कामों के लिए आपके पास वक़्त कहां से आता है पता नहीं चलता। जबकि परमात्मा के दर्शन मात्र से ही आप मोक्ष प्राप्त कर सकते हो। राग, द्वेष, मोह और माया यह चार चीजें आपसे छूटती नहीं इसलिए आप मोक्ष को प्राप्त नहीं कर पाते हैं। जब आप मंदिर भी जाते हो तो अपने अंदर इतने अवगुण लेकर जाते हो कि वहां की पवित्रता को आप स्वीकार नहीं कर पाते हो। मछली अगर पानी में रहती है तो क्या उसे प्यास नहीं लगती होगी। उसे प्यास लगती हो होगी तो वह पानी में भी पानी खोजती होगी। वैसे ही हम अपने जीवन में पवित्रता को पाना चाहते हैं। हम पवित्र स्थानों को ढूंढते हैं जबकि वह हमारे आसपास ही होती है और हम उसे पहचान नहीं पाते हैं। इसके लिए आपको स्वयं को बदलने की आवश्यकता है। आप चाहते हो कि जीवन में शांति रहे लेकिन शांति आपकी अंदर है। आप चाहते हो कि माता ऐसा करें, पिता अपनी सोच बदले, भाई को यह नहीं वह काम करना चाहिए। यह सब सोचकर आप शांति चाहते हो पर जब आपके मन में ही अशांति हो तो कभी शांति की अनुभूति आप नहीं कर पाओगे।

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