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जहां है विनम्रता वहां है रिश्तों में मधुरता और जीवन में सरसता-राष्ट्र-संत श्री ललितप्रभ जी।

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रायपुर, 1 अक्टूबर। राष्ट्र-संत श्री ललितप्रभ जी महाराज ने कहा कि किसी भी तरह के रोग, शोक, कष्ट, उपद्रव निवारण के लिए नवपद ओली वरदान की तरह है। नवपद औली के नौ पद हैं: अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधू, दर्शन, ज्ञान, चारित्र और तप। औली में आयंबिल की तपस्या करते हुए रोज क्रमशः एक-एक पद की आराधना की जाती है। अगर इन नौ पदों के पट्ट को घर या दुकान में लगा दिया जाए तो वास्तु दोष दूर हो जाते हैं, सुख, शांति, समृद्धि बढ़नी शुरू हो जाती है। संत प्रवर शनिवार को श्री ऋषभदेव जैन मंदिर ट्रस्ट द्वारा एमजी रोड स्थित जैन दादावाड़ी में नवपद ओली पर आयोजित विशेष प्रवचन माला के पहले दिन नवकार मंत्र का रहस्य और अरिहंत पद का सार विषय पर श्रद्धालु भाई बहनों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नवकार मंत्र की शुरुआत नमो अरिहंताणं से होती है जिसका अर्थ है अरिहंतों को नमस्कार। जिन्होंने भीतर के राग, द्वेष, क्रोध, काम, लोभ रूपी शत्रुओं का हनन कर लिया उसे अरिहंत कहते हैं। उन्होंने कहा कि अरिहंत बनने की यात्रा नमो अर्थात झुकने से होती है। विनय धर्म का सार है और मोक्ष की नींव। जहां विनम्रता है वहां रिश्तों में मधुरता है जीवन में सरसता है। इस अवसर पर संतप्रवर ने श्रीपाल रास का वांचन किया और श्रद्धालुओं को ओम रीं श्रीं श्री नमो अरिहंताणं मंत्र का सामूहिक जाप करवाया। इस दौरान सैकड़ों भाई-बहिनों ने ओली की आराधना करते हुए आराधना भवन में आयंबिल की तपस्या भी की। इस अवसर पर मुनि शांतिप्रिय सागर जी ने अरिहंत पद का ध्यान करवाया। संघ अध्यक्ष विजय कांकरिया ने बताया कि रविवार को सुबह 9 बजे संतप्रवर नवकार मंत्र में सिद्ध पद का रहस्य विषय पर संबोधन देंगे।

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