रायपुर, 5 अक्टूबर। राष्ट्र-संत श्री ललितप्रभजी महाराज ने कहा कि जिसके जीवन में संत नहीं होता उसके जीवन में कभी बसंत नहीं आता। राम को सच्चे संतों का समागम मिला तो वे दुनिया के पूजनीय श्री राम बन गए, पर रावण को सच्चे संतों का समागम ना मिला तो वह आज भी, हर विजयादशमी पर लोगों के द्वारा फूंका जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में 3 लोगों का ऋण होता है- माँ, महात्मा और परमात्मा। महात्मा अर्थात संत जो माँ और परमात्मा के बीच की कड़ी है जो हमें संसार में जीना भी सिखाता है और संसार से पार उतरना भी सिखाता है। उन्होंने कहा कि जीवन में केवल एक संत विशेष तक सीमित न रहें वरन अपने आप को जीवन भर विद्यार्थी बनाए रखें ताकि हम हर किसी से सीख सकें और जीवन में आगे बढ़ सकें।
संत प्रवर बुधवार को श्री ऋषभदेव जैन मंदिर ट्रस्ट द्वारा एमजी रोड स्थित जैन दादावाड़ी में नवपद ओली पर आयोजित विशेष प्रवचन माला के पांचवें दिन नवकार मंत्र में साधु पद और संत सरीखा जीवन जीने का रहस्य विषय पर श्रद्धालु भाई बहनों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि साधु-संतों के चार काम होते हैं - ज्ञान का दान करना, शील और सदाचार में शिष्य को मजबूत करना, शिष्य की कमी और कमजोरियों को दूर करना और उसे मुक्ति पथ पर आगे बढ़ाना। उन्होंने कहा कि सच्चा संत वही है जो शिष्य को स्वयं से नहीं ईश्वर से जोड़ता है ऐसे संत को जो सुबह सुबह प्रणाम कर लेता है उसे 68 तीर्थों की यात्रा का पुण्य घर बैठे मिल जाता है, संत के चरणों की रज मंदिर के चंदन की चुटकी का काम करती है। अगर हमारे ऊपर राहु, केतु या मंगल भारी है तो मात्र 27 दिनों तक हम संत के दर्शन करें तो हमारे सारे विपरीत ग्रह अनुकूल हो जाएंगे और जीवन में तरक्की के रास्ते खुलने शुरू हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि साधु पद की आराधना करते हुए अपने जीवन में गुस्से को जीतने की कोशिश करें और अगर किसी के साथ वैर भाव है तो उसे दूर करने का मन बनाएं। 36 इंच का सीना उसी का होता है जो गलती करने वाले को माफ करने का बड़प्पन दिखाता है। जिस दिन हम दुश्मन को भी गले लगा लेते हैं उस दिन महावीर और महादेव की पूजा करना सार्थक हो जाता है। अगर हमने दुश्मन के घर की 5 सीढिय़ां भी चढक़र उसे अपने गले लगा लिया तो हमें घर बैठे ही पालीताणा और हरिद्वार की यात्रा करने का पुण्य फल प्राप्त हो जाएगा।
प्रवचन में संतप्रवर ने श्रीपाल रास का वांचन कर रास से जुड़े रोचक प्रेरक प्रंसगों का जिक्र किया तो श्रद्धालु अभिभूत हो उठे। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को ओम रीं श्रीं श्री नमो लोए सव्व साहूणं मंत्र का सामूहिक जाप करवाया।
इस अवसर पर मुनि शांतिप्रिय सागर जी ने जीवन में समता लाने के लिए और अंतर्मन की विषमता को दूर करने के लिए साधु पद का ध्यान करवाया।
संघ अध्यक्ष विजय कांकरिया ने बताया कि गुरुवार को सुबह 9 बजे संतप्रवर नवकार मंत्र में दर्शन पद का रहस्य विषय पर संबोधन देंगे।