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आसक्ति छोड़िये क्योंकि यही क्रोध और द्वेष की जननी है: साध्वी स्नेहयशाश्रीजी।

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रायपुर। न्यू राजेंद्र नगर स्थित महावीर स्वामी जिनालय में चल चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान साध्वी स्नेहयशश्रीजी ने मंगलवार को कहा कि आसक्ति किसी वस्तु या व्यक्ति के प्रति हो सकती है। ज्यादातर यह वस्तुओं के प्रति ही होती है। कई लोगों को अपने घर के प्रति आसक्ति होती है। घर में थोड़ी सी गंदगी होने पर उन्हें वह पसंद नहीं होता है। कामवाली बाई भी अगर थोड़ी लापरवाही कर दे तो उसके प्रति आपको क्रोध आ जाता है। आप उसे चिल्लाते हो कहते हो कि तुम्हें इतने पैसे दे रहे हैं और तुम ढंग से काम नहीं कर रही हो। वहीं, कुछ लोगों को पैसे के प्रति आकर्षण और ममत्व होता है। कोई अच्छा या बहुत जरूरी काम भी हो तो आप उसे सोच सोच कर करते हो। आपका बेटा ही अगर 5 हजार की जगह 10 हजार खर्च कर दें तो आप उसे थप्पड़ भी मार दोगे और कहोगे कि जब बजट 5 हजार का है तो 10 हजार खर्च क्यों किया। किसी को गाड़ी के प्रति आसक्ति होती है। वहां अपने साथ गाड़ी में बैठने वाले लोगों के लिए कई नियम बनाते हैं जैसे कि गाड़ी के अंदर बैठकर कुछ नहीं खाना, कचरा नहीं फैलाना और भी ऐसे बहुत से शर्तें रखते हैं। ऐसे नियम टूटते हैं तो आपको क्रोध और द्वेष आ जाता है। जबकि आपको यह पता है कि मैं आपके साथ घर जाने वाला है, ना पैसा और ना ही गाड़ी आपके साथ जाएगी। लेकिन क्रोध और द्वेष आपके साथ जरूर जाएंगे। यहां आपको कर्म नहीं बांधना है। कर्म हमें इसी मानव जीवन में ही छोड़ना है क्योंकि हम अन्य भवों में करण बनते ही हैं क्योंकि उस भाव में हमें किसी चीज का ज्ञान नहीं होता है। हमें इस जीवन में कर्मों का छह करना है। साध्वीजी कहती है कि बहुत समय पहले की बात है एक व्यक्ति दो वक्त की रोटी के लिए चक्की पीसने का काम करता था। उसकी आए दो वक्त की रोटी के हिसाब से ठीक-ठाक हो जाती थी। उसने धीरे-धीरे करके कुछ पैसे जमा किए और एक उपाश्रय का निर्माण करवाया। अब आप सोचिए कि आप कितना पैसा बचाते हो और उन्हें किस काम में खर्च करते हो। जबकि एक नगर में उपाश्रय बनने का काम शुरू होता है और सभी लोग मंदिर में लगने वाली राशि के लिए आर्थिक रूप से मदद करने के लिए सामने आते हैं। कोई एक लाख देता है तो कोई 10 लाख रुपए, ऐसा करते हुए 50-50 रुपये देकर लोग अपना नाम लिखवाते है। एक व्यक्ति जिसकी आए दो वक्त की रोटी के लायक भी नहीं थी वह भी मंदिर निर्माण में पैसे देना चाहता था। उसकी 1 दिन की आय 7 पैसे थी, वह उसे दान करना चाहता था। उसने पूछा कि क्या मैं अपने 7 पैसे दान कर सकता हूं क्योंकि मेरे पास केवल इतने ही है और एक दिन की कमाई भी यही है। मंदिर ट्रस्ट उससे 7 पैसे लेकर उसका नाम पट्टिका में लिख देते हैं। अगले दिन जब सारे लोग देखते हैं तो मंदिर में बवाल खड़ा हो जाता है क्योंकि 7 पैसे देने वाले व्यक्ति का नाम लिस्ट में सबसे ऊपर होता है और लाखों रुपए देने वाले का नाम उसके बाद लिखा होता है। इस पर ट्रस्ट के सदस्य बताते हैं कि आपने 10 लाख रुपये दिया और किसी ने 50 लाख रुपये दिया पर जिसने 7 पैसे दिए वह उसकी पूरी कमाई थी। जिन लोगों ने लाखों रुपये दिये उन्होंने कुछ अंश ही दिया है। अष्टाह्निका महोत्सव ● बच्चों ने नृत्य, कव्वाली और गीत गायन पर दी प्रस्तुतियां। न्यू राजेंद्र नगर स्थित महावीर स्वामी जिनालय में परम पूज्य स्नेहयशाश्रीजी म.सा. की निश्रा में निपुणा आराधक मंडल के द्वारा अष्टाह्निका महोत्सव निमित्त ज्ञानवल्लभ पाठशाला के छोटे बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। आध्यात्मिक चातुर्मास समिति के अध्यक्ष श्रीमान विवेक डागा जी ने बताया कि सोमवार को यहां विविध प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया। जिसके अंतर्गत नृत्य में मौली चोपड़ा, पीहू चोपड़ा, विदुषी कोचर। कव्वाली में ख्याति, खुशी, अरिहंत, वृद्धि, लक्ष्य, मोक्ष, सान्वी, हर्षिल, मौलिक, राजवर्धन, करुणा, हृदय आदि बच्चों ने अपनी प्रस्तुति दी। वही गायन में सुनीता, मनीता, शिल्पा, प्रीति, कविता, पिंकी, पद्मा। नृत्य द्वय में आरना, धनिष्ठा, आज्ञा, परी, हिमानी, काव्या ने अपनी प्रस्तुति दी। महापुरुषों के किरदार में दर्शिका डागा, दर्श डागा और खेमराज नजर आए। कार्यक्रम की तैयारी में विधि, नीतिषा, पूजा और पूजा चोपड़ा का विशेष योगदान रहा। वहीं, निपुण आराधक मंडल सदर बाजार द्वारा न्यू राजेंद्र नगर महावीर जिनालय में शानदार प्रस्तुति दी गई। उनके उत्साहवर्धन के लिए 11 हजार की राशि आध्यात्मिक चातुर्मास समिति द्वारा प्रदान की गई।

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