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प्रेम माधुर्य व परोपकार के गुणों से जीवन को बनाएं स्वर्गः महोपाध्यायश्री ललितप्रभसागरजी।

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रायपुर - राष्ट्र्संत गुरूदेव श्री ललितप्रभजी एवं डाॅ. मुनिश्री शांतिप्रियजी के रायपुर से प्रस्थान से पूर्व जीवन जीने कला पर पांच दिन की विशेष प्रवचनमाला पं. दीनदयाल उपाध्याय आॅडिटोरियम, साइंस काॅलेज परिसर में बुधवार से आरंभ हुई। इस पावन दुर्लभ प्रसंग पर संतप्रवर महोपाध्यायश्री ललितप्रभ सागरजी ने जीवन को कैसे स्वर्ग बनाएं विषय पर कहा कि मनुष्य की जिंदगी तीन पन्नों की किताब की तरह है, जिसका पहला पन्ना है जन्म, बीच का पन्ना है जीवन और तीसरा अंतिम पन्ना है मृत्यु। जन्म और मृत्यु के बीच के पन्ने जीवन का अगर आदमी सार्थक उपयोग कर ले तो उसका जीवन यहीं पर स्वर्ग बन जाता है। उन लोगों से पूछिए जिन्होंने अभाव और गरीबी में जीवन का आनंद उठाया है, उनसे पूछिए कि जीवन कितना आनंदमयी, रसमयी है। जन्म और मृत्यु के बीच एक बहुत महत्वपूर्ण अवधि है, जिसका नाम है जीवन। अपने इस जीवन को हम प्रेम, मार्धुय और परोपकार के गुणों से आनंदमयी बना लें। अपनी जिंदगी को स्वर्ग बना लें। स्वर्ग को पाने के लिए स्वर्ग जाना जरूरी नहीं है, आदमी को अपनी मनोदशा को अच्छा बनाना जरूरी है। अगर आदमी की मनोदशा, भावदशा अच्छी बन गयी तो जीवन का हर पल स्वर्ग-सा हो जाएगा। आरंभ में धर्मसभा का शुभारंभ तीर्थंकर परमात्मा के छायाचित्र पर श्रीमती सुशीला देवी मूणोत, राजनांदगांव के पूर्व विधायक लाभचंद बाफना, भाजपा रायपुर अध्यक्ष जयंती भाई पटेल, श्रीऋषभदेव मंदिर ट्र्स्ट के पूर्व ट्र्स्टी प्रकाशचंद सुराना, मंदिर ट्र्स्ट के कार्यकारी अध्यक्ष अभय भंसाली, वरिष्ठ समाजसेवी सीताराम अग्रवाल, पार्षद मृत्युंजय दुबे, पार्षद श्री ध्रुव, प्रफल्ल विश्वकर्मा, दिव्य चातुर्मास समिति के महासचिव पारस पारख व प्रशांत तालेड़ा द्वारा माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। सभा का कुशल संचालन कार्यक्रम प्रभारी महावीर तालेड़ा ने किया। जिसने अपने आज के जीवन को स्वर्ग बना लिया, अपने अगले जीवन को भी वह स्वर्ग बनाने में सफल हो जाएगा। https://youtu.be/kf7l-Ssm4Nc   यह प्रवचनमाला 6 नवम्बर तक प्रतिदिन प्रातः 9 से 10.30 बजे तक चलेगी। पांच दिवसीय इस विशेष प्रवचनमाला का आयोजन श्रीऋषभदेव मंदिर ट्र्स्ट, श्री दिव्य चातुर्मास समिति के तत्वावधान में एवं श्रीमती साधना-राजेश मूणत परिवार की विशेष सहभागिता से किया गया है। 3 नवम्बर को अपनी सोच को कैसे बनाएं पाॅजीटिव एवं पाॅवरफुल, 4 नवम्बर को आखिर रिश्तों को कैसे मधुर बनाएं, 5 नवम्बर को कैसा बनाएं स्वभाव कि दूसरों पर पड़े प्रभाव विषय पर प्रवचन होंगे। 6 नवम्बर को विदाई समारोह- याद रहेगा रायपुरः याद रखेगा रायपुर का आयोजन होगा। 2 से 6 नवम्बर तक प्रवचन के पश्चात् कार्यक्रम स्थल पर ही भोजन प्रसाद की व्यवस्था रखी गई है। इस यादगार व नगर की आखिरी प्रवचनमाला के आयोजन में प्रमुख सहभागी बने श्रीमती सुशीला देवी, साधना-राजेश मूणत, अक्षिता-रविश मूणत व रोशनी-शुभम संचेती परिवार सहित श्रीऋषभदेव मंदिर ट्र्स्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय भंसाली, ट्र्स्टी त्रय- तिलोकचंद बरड़िया, उज्ज्वल झाबक, राजेन्द्र गोलछा, श्रीदिव्य चातुर्मास समिति के अध्यक्ष तिलोकचंद बरड़िया, महासचिव पारस पारख व प्रशांत तालेड़ा, कोषाध्यक्ष अमित मूणोत, स्वागताध्यक्ष कमल भंसाली व कार्यक्रम प्रभारी महावीर तालेड़ा आदि सहित आयोजन समिति सदस्यों ने सभी धर्मप्रेमीजनों से इस दुर्लभ दिव्य प्रवचनमाला का अधिकाधिक लाभ लेने का अनुरोध किया है।  

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