कुंआमालगी सरपंच निलंबित सचिव पर कार्रवाई का प्रस्ताव, राजस्व न्यायालय पंडरिया का आदेश।
रामकुमार टन्डन
पंडरिया - पंचायती राज अधिनियम 1993 की धारा 39-1(ख) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित किये जाने का मामला सामने आया है।
ग्रामपंचायत कुंआमालगी से सरपंच एवम सचिव के विरुद ग्राम पंचायत के पन्चो ने अनियमितता की शिकायत किये थे जिसकी जांच कराई गई। जांच अधिकारी RES SDO पी.सी. ठाकरे व लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीय विभाग सयुंक्त टीम ने जांच किया, जिसमें अनियमिता पाये जाने की रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया, उस पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पंडरिया ने सरपंच सचिव के पद पदीय कर्तब्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरते जाने की मामला बनाकर छ. ग. पँचायतराज अधिनियम की धारा 48-49 के विपरीत होने से सरपंच श्रीमती भानुमति साहू को पद पर बने रहना पंचायत में ठीक नही मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित 7-12-2022 को किया गया है। वही सचिव सुशीलकुमार चंद्रवंशी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कबीरधाम को निलंबित करने का प्रस्ताव भेजा गया है।
यहाँ सवाल यह खड़ा होता है, कि सरपंच सचिव पर कार्य मे अनियमितता होने के दोषी ठहराया गया है। उन पर कार्रवाई भी हो रही है, किंतु कार्य का गुडवत्ता पर मूल्यांकन सत्यापन करना इंजीनियर व SDO का काम होता है, उन पर तत्काल कार्रवाई नही होने का मतलब लोगों को समझ में नहीं आता है। इसी कानूनी दांवपेंच में सचिव सरपंच को कुछ दिनों बाद बहाल कर न्यायालय में पेशी चलाई जाती है। जितना दोषी सरपंच सचिव को माना जाता है, कहीं उससे ज्यादा दोषी टेक्निकल अधिकारियों को माना जाना चाहिए, जिन पर कार्रवाई नही किया जाना या तो बचाने की कोशिश है, या फिर पंचायती राज अधिनियम में झोल है। जिसका बखूबी इस्तेमाल अधिकारियों के द्वारा किया जा रहा है।