पंडरिया :- छतीसगढ़ शाकम्भरी बोर्ड के अध्यक्ष तथा राज्य शासन में कैबिनेटमंत्री दर्ज़ा प्राप्त श्री रामकुमार पटेल तथा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री व पंडरिया जनपद पंचायत के पूर्व अध्यक्ष श्री अर्जुन तिवारी 5 जनवरी गुरुवार को दोपहर को ग्राम रोहरा में पौष पूर्णिमा के अवसर पर शाकम्भरी पूजनहवन एवं महाआरती कार्यक्रम के भव्य आयोजन एवं महोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए।
श्री रामकुमार पटेल जी का रायपुर निवास से सीधे पंडरिया स्थित लोकनिर्माण विभाग के विश्रामगृह में आगमन हुआ। जहां समाज प्रमुखों, किसानों एवं पार्टी के कार्यकर्ताओं ने श्री पटेल का बड़ी ही गर्मजोशी से व आत्मीयतापूर्वक स्वागत सत्कार किया। कुछ ही समय पश्चात श्री तिवारी जी का भी आगमन रेस्टहाउस में हुआ कार्यकर्ताओ ने श्री तिवारी का भी फूलमाला पहनाकर स्वागत किया, श्री पटेल एवं श्री तिवारी दोपहर भोजन एवं अल्पविश्राम पश्चात रोहरा में आयोजित शाकम्भरी महोत्सव के कार्यक्रम में शिरकत करने ग्राम रोहरा रवाना हुए जहां समाज प्रमुखों ने श्री पटेल एवं श्री तिवारी का भव्य स्वागत किया।
सर्वप्रथम माता शाकम्भरी के स्थापित मूर्ति में दीप प्रज्वलित भजनकीर्तन भी किए गए मौके पर मंगल पाठ के दौरान सुंदर हवनपूजन कार्यक्रम व प्रवचन औऱ बालक बालिकाओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का दर्शन हुआ विधिवत पूजन अर्चन के बाद महाआरती कार्यक्रम में शामिल हुए। ततपश्चात पटेल समाज के लोगों ने मुख्यातिथि श्री रामकुमार पटेल जी एवं कार्यक्रम के अध्यक्षता कर रहे प्रदेश महामंत्री श्री अर्जुन तिवारी को साल एवं श्रीफल भेंट कर फूल-माला पहनाकर उनका सम्मान किए व जिला पंचायत सदस्य एवं युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री तुकाराम चन्द्रवंशी का भी स्वागत सत्कार किए।
सभा को सम्बोधित करते हुए श्री तिवारी ने कहा कि देवी शाकम्भरी को साक-सब्जियों औऱ वनस्पतियों की देवी कहा गया है, माँ शाकम्भरी माता पार्वती का ही स्वरूप हैं उनके अनेक नाम है, माता शाकंभरी को देवी वनशंकरी औऱ शताक्षी भी कहा जाता है, देवी भागवत पुराण में शाकम्भरी माता को देवी दुर्गा का ही स्वरूप बताया गया है। इसके अनुसार पार्वतीजी ने शिवजी को पाने के लिए कठोर तपस्या की उन्होंने अन्न जल त्याग दिया था तथा जीवित रहने के लिए केवल शाक-सब्जियां ही खाई, इसलिए उनका नाम शाकम्भरी रखा गया एक अन्य कथा के अनुसार जब पृथ्वी पर सौ वर्षों तक वर्षा नही हुई तब मनुष्यों को कष्ट उठाते देख मुनियों ने माँ से प्रार्थना की तब शाकम्भरी के रूप में माता ने अपने शरीर से उत्पन्न हुए शाकों के द्वारा ही संसार का भरण-पोषण किया था इस तरह देवी ने सृष्टि को नष्ट होने से बचाया इसलिए शाकम्भरी जयंती के दिन फल-फूल औऱ हरी सब्जियों को दान करने का सबसे ज्यादा महत्व है इस दिन गरीबों को अन्न शाक यानी कच्ची सब्जी भाजी व जल का दान करने से अत्यधिक पूण्य की प्राप्ति होती है एवं माता उनपर प्रशन्न होकर उन्हें आशीर्वाद प्रदान करती है।
शाकम्भरी बोर्ड के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री दर्ज़ा प्राप्त श्री रामकुमार पटेल ने भी सभा को सम्बोधित करते हुए सर्वप्रथम इस निमंत्रण के लिए समाज के लोगों को धन्यवाद ज्ञापित किया, औऱ कहा कि पुराणों में यह उल्लेख है कि देवी ने यह अवतार तब लिया जब दानवों के उत्पात से सृष्टि में अकाल पड़ गया, तब देवी शाकम्भरी रूप में प्रकट हुई इस रूप में उनकी 1000 आंखें थी जब उन्होंने अपने भक्तों को बहुत ही दयनीय स्थिति में देखा तो लगतार 9 दिनों तक वे रोती रही रोते समय उनकी आँखों से जो आँसू निकले उससे अकाल दूर हुआ औऱ चारों ओर हरियाली छा गई देवी दुर्गा का रूप है माता शाकम्भरी जिनकी हज़ार आँख थी इसलिए माता को शताक्षी भी कहते हैं।
