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आत्महित वर्षा आवास 2023 श्री हीरसुरी भवन नाकोड़ा भैरव सोसाइटी में गतिमान हैl

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परम पूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय योगतिलक सूरीश्वरजी महाराजा के सुशिष्य पूज्य श्री श्वततिलक विजयजी आदि साधू साध्वी जी भगवंत की निश्रा में आत्महित वर्षा आवास 2023 श्री हीरसुरी भवन नाकोड़ा भैरव सोसाइटी में गतिमान हैl इसके अंतर्गत कषायों की व्यथा-समरादित्य कथा ग्रंथ पर चल रही प्रवचनमाला में पूज्य श्री ने बतलाया की कथाकार परम पूज्य आचार्य हरिभद्र सूरीश्वरजी ने श्रोता के तीन प्रकार बतलाए हैं, यह प्रकार श्रोता की मनोवृत्ति के आधार पर किया गया है, क्योंकि जिसकी जैसी मनोवृत्ति होगी वह वैसा ही ग्रहण करेंगे, इसके अंतर्गत अधम ( तामसी ) एवं मध्यम (रजोगुणी) श्रोता की व्याख्या करने के बाद उत्तम श्रोता की व्याख्या बतायी गई है, उत्तम श्रोता आत्म कल्याण के लिए जागृत होता है, वह जीवन का लक्ष्य निर्धारित करने के लिए कथा सुनता है, वस्तु या पदार्थों को छोड़कर उसके अभाव में आनंद की अनुभूति करने के लिए विवेक का प्रकट होना आवश्यक है, उससे सम्यकत्व की अनुभूति होती है. भगवान का धर्म मिलने के बाद थी मेरे भीतर कितने सारे दोष हैं, यह विचार करके वह सदैव त्याग करने की भावना रखता है, यहाँ पर त्याग का अर्थ सब कुछ छोड़ना नहीं बल्कि उसके प्रति के ममत्व भाव को छोड़ना है, भोग करने की प्रवृत्ति का त्याग कर आवश्यकता अनुसार उपयोग करने में वह स्वयं को प्रवृत्त करता हैl

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