रायपुर - आज 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड में चल रहे पवन समयोपदेश वर्षा योग 2026 के शुभवसर पर विविध धार्मिक एवं देशभक्तिपूर्ण कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। प्रातः 7:30 बजे मूलनायक भगवान के समक्ष श्री जी का अभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन किया गया। आज की शांतिधारा करने का सौभाग्य श्री इंदर चंद प्रियांक जैन (टैगोर नगर) एवं श्री अजय, अंश, हर्ष जैन को प्राप्त हुआ। अभिषेक और शांतिधारा के उपरांत प्रातःकालीन धार्मिक कक्षा में मुनि 108 श्री पुनीत सागर जी महाराज द्वारा तत्त्वार्थसूत्र का अध्ययन करवाया गया।
इसी क्रम में आज प्रातः जिनालय प्रांगण में 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के हर्षोल्लास के साथ झंडा वंदन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर की ट्रस्ट, कार्यकारिणी, वर्षायोग 2026 समिति, विभिन्न मंदिरों के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर ध्वजारोहण किया, भारत देश का राष्ट्रीय गीत गाया और भारत माता की जय के गगनभेदी नारे लगाए।
धर्माराधना के अंतर्गत आज नवधाभक्ति पूर्वक मुनि संघ को आहार देने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ। मुनि 108 श्री पुनीत सागर जी महाराज को आहार देने का सौभाग्य श्रीमती संगीता संजीव जैन पूरी (मैत्री परिवार, डीडी नगर) को प्राप्त हुआ। वहीं, एलक 105 श्री धैर्यसागर जी महाराज को आहार देने का सौभाग्य श्रीमती शिखा श्री प्रशांत जैन (एक्सल प्रिंटर, कंकाली पारा) को प्राप्त हुआ।
धार्मिक कक्षाओं के अगले चरण में मुनि 108 श्री आगम सागर जी महाराज ने छह ढाला का अध्ययन करवाया और अपनी मंगल देशना प्रदान की।
मुनि श्री ने अपने उद्बोधन में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने जेलों में अमानवीय यातनाएं सही हैं। आज हम उन्हीं के संघर्ष और परिश्रम के परिणामस्वरूप इस स्वतंत्र भारत में बिना किसी रोक-टोक के स्वतंत्र जीवन जी पा रहे हैं। हम देश की सुरक्षा में तैनात उन सैनिकों के प्रति अत्यंत कृतज्ञ हैं, जो कड़ाके की ठंड, मूसलाधार बारिश और चिलचिलाती गर्मी की परवाह किए बिना सीमाओं पर निरंतर पहरा दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे आचार्यश्री के वचनों के अनुसार, सीमा पर तैनात सैनिक भले ही सांसारिक दृष्टि से कम धन कमाते हों, परंतु वे देश की रक्षा करते हुए सबसे बड़ी पुण्य की कमाई करते हैं। देशवासियों की सुरक्षा उनके कंधों पर होती है। यदि दुश्मन देश में घुसपैठ कर दे, तो वह अशांति, मारकाट और लाखों बेगुनाहों का खून बहाकर हाहाकार मचा सकता है। सैनिक अपना व्यक्तिगत स्वार्थ त्यागकर, अपने माता-पिता, पत्नी, बच्चों और सभी रिश्तेदारों को छोड़कर सीमा पर देशवासियों की रक्षा करते हैं। स्वार्थी व्यक्ति केवल अपने और अपने परिवार की सोचता है, जबकि परमार्थी सैनिक समस्त देशवासियों का भला चाहता है और सबका भला चाहने वाला जीव तीर्थंकर प्रकृति का बंध करता है।
मुनि श्री ने देश के नागरिकों को संदेश देते हुए कहा कि हम सभी भारत देश के नागरिक हैं और हमें अपने देश के प्रति वफादार और ईमानदार रहना चाहिए। इस देश का नाम भारत है, जो कि युग के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के पुत्र भरत के नाम पर रखा गया है। हमें इस देश को गर्व से भारत कह कर ही संबोधित करना चाहिए, न कि विदेशी शब्द का प्रयोग करना चाहिए। आप सभी स्वतंत्र भारत के गौरवान्वित नागरिक हैं, अतः गर्व से कहें कि हम भारतीय हैं।
सूचनादाता - प्रणीत जैन (मीडिया प्रभारी)
सकल दिगंबर जैन समाज, रायपुर
नवोदय तीर्थ श्री दिगम्बर जैन आदिश्वर धाम "समयोपदेश वर्षायोग 2026"
श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड, रायपुर