हैदराबाद/रायपुर - हैदराबाद, त्रयनगर स्थित कारवान श्री जिनकुशल दादावाड़ी में चातुर्मासार्थ विराजमान परम पूज्य गुरुदेव सूरि सम्राट, खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. ने 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मंगल प्रवचन में कहा कि यह दिन केवल स्वतंत्रता का पर्व नहीं, बल्कि गौरवशाली इतिहास को स्मरण करने, शहीदों के बलिदान को नमन करने और देश के प्रति अपने कर्तव्यों का संकल्प लेने का दिन है। संसार में अनेक शक्तिशाली देश हैं, लेकिन भारत को माता कहा जाता है, क्योंकि माँ सबको शरण देती है।
गुरुदेव श्री ने कहा कि तिरंगे के तीनों रंग प्रेरणादायी संदेश देते हैं। केसरिया त्याग, सफेद शांति और हरा समृद्धि का प्रतीक है। संदेश स्पष्ट है कि समृद्धि आवश्यक है, लेकिन उससे पहले शांति और शांति से भी ऊपर त्याग की महिमा है।
उन्होंने कहा कि हम उस भारत के निवासी हैं जहाँ श्रीराम ने पिता के वचन की रक्षा के लिए चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार किया, श्रवण कुमार ने नेत्रहीन माता-पिता की तीर्थयात्रा को अपना धर्म माना और प्राणी मात्र की रक्षा के लिए राजाओं ने अपने प्राणों तक का त्याग किया। यही हमारी संस्कृति और गौरवशाली विरासत है।
भारत की स्वतंत्रता सहज प्राप्त नहीं हुई। 1857 से 1947 तक के स्वतंत्रता संग्राम में असंख्य वीरों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया। जैन, हिंदू, मुस्लिम तथा सभी समाजों के वीरों ने इसमें योगदान दिया। हमें सभी बलिदानियों को स्मरण कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज हम स्वतंत्र भारत में श्वास ले रहे हैं, धर्म की आराधना कर रहे हैं और अपनी बात कहने की स्वतंत्रता रखते हैं। इसलिए माँ, मातृभूमि और मातृभाषा—तीनों के प्रति सम्मान और कर्तव्य होना चाहिए। दूसरी भाषाएँ और अंग्रेजी अवश्य सीखें, लेकिन मातृभाषा को न भूलें। घर में मातृभाषा का प्रयोग होगा तो आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़ी रहेंगी।
देश की स्वच्छता पर उन्होंने कहा कि विदेशों की स्वच्छता देखकर हम उनकी प्रशंसा करते हैं और वहाँ कचरा फैलाने पर दंड भी है, लेकिन अपने देश को स्वच्छ रखने के लिए केवल दंड की आवश्यकता क्यों हो? भीतर से कर्तव्यभाव जागना चाहिए। संकल्प लें—“न कचरा फैलाएँगे, न फैलाने देंगे।” जैसे घर, परिवार और व्यवसाय को अपना मानते हैं, वैसे ही देश को भी अपना मानें तथा देश की संपत्ति और प्रतिष्ठा को अपनी समझें।
गुरुदेव श्री ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर केवल गौरव अनुभव करना पर्याप्त नहीं, जिम्मेदारी का भाव भी जागृत होना चाहिए। देश सुरक्षित रहेगा तभी हमारा धर्म, संस्कृति और जीवन सुरक्षित रहेगा। संकल्प लें कि “स्वच्छ भारत, श्रेष्ठ भारत और भ्रष्टाचार-मुक्त भारत” के निर्माण में योगदान देंगे। यही सच्ची देशभक्ति, शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि और हमारे हृदय का उद्घोष है—“मेरा भारत, मेरा गौरव और मेरा कर्तव्य।”
इस अवसर पर 400 वर्ष प्राचीन श्री गोडी पार्श्वनाथ मंदिर से स्वतंत्रता सेनानियों की वेशभूषा में सजे बच्चों के साथ दादावाड़ी तक भव्य रैली निकाली गई। तत्पश्चात दादावाड़ी प्रांगण में मुख्य अतिथि तेलुगु फिल्म अभिनेत्री सुश्री प्रियंका जैन ने ध्वजारोहण किया। श्री संघ शास्ता वर्षावास समिति–2026, खरतरगच्छ युवा परिषद एवं महिला परिषद द्वारा त्रयनगर के 104 युवा एवं महिला मंडलों का समाजसेवा के लिए तथा धर्मराज जैन ज्वैलर्स, शालीबंडा द्वारा कक्षा 6 एवं उससे ऊपर के 80% या अधिक अंक प्राप्त करने वाले जैन छात्र-छात्राओं का बहुमान किया गया।