रायपुर -समरादित्य महाकथा पर चल रही प्रवचनमाला के अंतर्गत परम पूज्य मुनीराज श्री कंचन तिलक विजय जी महाराज ने बतलाया कि वे शास्त्रकार परमर्षि समस्त जीव सृष्टि पर उपकार के लिए तत्पर होते हैं. वे ज्ञान दान के द्वारा व्यक्ति को अपने भीतर के गुण वैभव का दर्शन कराना चाहते हैं. आगे पूज्य श्री ने आगे फरमाया की धर्म से हमें क्या मिलता है?
पहला उत्तम कुल - पूर्व में किए हुए अच्छे कर्म परोपकार आदि की वजह से आज हमें परमात्मा, परमात्मा का शासन एवं सद्गुरु मिले। यह सब कुछ मिलने के बाद परमात्मा ने जो बतलाया है, उसमें और हमारी मान्यता में क्या फ़र्क है परमात्मा ने संसार को ख़राब बताया है, संसार के प्रति के ममता भाव को छोड़ने को कहा है पर हमारे जीवन की दिशा क्या है यह में सोचना चाहिए। आज जो धन,संपत्ति, समृद्धि, परिवार, भोग, सामग्री आदि मिली है। वह सभी पूर्व में किए हुए धर्म का ही परिणाम हैं,धर्म से ही हमें कीर्ति, प्रसिद्धि आदि मिलती है. धर्म अतुल्य अवसर, विपुल बल को देने वाला है।