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श्री हीर सूरी भवन में छत्तीसगढ़ के विहार सेवा ग्रुपों का किया गया बहुमान।

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रायपुर - श्री हीर सूरी भवन श्री नाकोड़ा भैरव सोसायटी मैं आत्माहित चतुर्मास परम पूज्य श्वेत तिलक जी एवं परम पूज्य कंचन तिलक जी आदि ठाणा 7 साधु भगवंत जी व साध्वी भगवंत जी की निश्रा में चल रहा और, जिसमें आज परम पूज्य साधु भगवंत ने रावण के चरित्र के विश्लेषण करते हुए बताया की वे बहुत विद्वान थे, लेकिन अहंकार व द्वेष के कारण उन्होंने सीता जी का हरण किया और वहीं से इनका पतन प्रारंभ हुआ और रावण ने अपना कर्म बंधन किया। साधु भगवान जी ने बताया कि जीवन सहज और सरल रहे तथा धर्म के मार्ग में चलते हुए अहंकार से दूर रहें संसारी वस्तुओं से परे जाकर आत्मा के कल्याण के लिए अग्रसर होवे। प्रवचन के पश्चात चातुर्मास समिति व ट्रस्ट के द्वारा दुर्ग, भिलाई, मुरमुंदा, खोपरा व रायपुर के जैन विहार ग्रुप का बहूमान किया गया। तथा सदस्यों को शॉल ओढ़ा कर उनके कार्यों की अनुमोदना की गई। तत्पश्चात साधु भगवन के द्वारा विहार ग्रुप को हित उपदेश दिया गया। कल साधर्मिक स्वामी वात्सल्य रखा गया, जिसके लाभार्थी परिवार जितेंद्र कुमार जी सुभाष कुमार जी बंटी जी दर्शन जी कोचर परिवार रहे। वही आज के एकसना तप के लाभार्थी श्री पारसचंदजी नेमीचंदजी गौतमचंदजी खटोड परिवार गुढियारी रायपुर रहे। 2:00 से 4:00 बजे बच्चों की अध्यात्म शाला का आयोजन किया गया, जिसमें 300 से अधिक बच्चों ने भाग लिया और स्टार रूपी अंकों के माध्यम से पुरस्कार प्राप्त किया तथा साधु भगवन व साध्वी भगवान से धार्मिक व अध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर स्वल्पाहार का लाभ दिया।

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