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13 नवंबर की सुबह 5.25 बजे शुरू होगी महावीर निर्वाण कल्याणक की शिखर आराधना।

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रायपुर - 21 दिवसीय महावीर निर्वाण कल्याणक महोत्सव चरम पर है। जैसी सभा राजा प्रजापाल के दरबार में सजी थी, उस सभा का समोशरण लालगंगा पटवा भवन में निर्मित हो गया है। भगवान महावीर ने अपने निर्वाण से पहले राजा प्रजापाल के दरबार में 48 घंटों तक अपने अमृत वचनों की वर्षा की थी। परमात्मा की अंतिम देशना सुनने के लिए देवताओं के साथ इंद्र भी धरती पर उतरे थे। 18 राजा, हजारों साधु-साध्वियां और संसार के समस्त प्राणी इस सभा में उपस्थित थे। 24 तीर्थंकरों में से केवल प्रभु महावीर ने अपने निर्वाण से पहले धर्मसभा में अंतिम देशना दी थी, जिसे सुधर्मस्वामी ने उत्तराध्ययन श्रुत में अपने शब्दों में पिरोया था।

https://youtu.be/XEGw1pYbMWY?si=fLQN_hhWYft352mZ रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने बताया कि आनंद जन्मोत्सव, नवकार तीर्थ कलश अनुष्ठान जैसे शीर्ष आयोजनों के बाद रायपुर की धन्य धरा पर 21 दिवसीय महावीर निर्वाण कल्याणक महोत्सव अनुष्ठान का समापन होने जा रहा है। प्रभु महावीर की अंतिम देशना, जिसे सुनने के लिए देवताओं के साथ इंद्र भी उनकी धर्मसभा में पहुंचे थे, वही देशना विगत 24 अक्टूबर से लालगंगा पटवा भवन में उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि के मुखारविंद से अनवरत गूँज रही है।13 नवंबर की सुबह 5.25 बजे से लालगंगा पटवा भवन में महावीर निर्वाण कल्याणक के शिखर दिवस का अनुष्ठान शुरू होगा। उन्होंने सकल जैन समाज से प्रातः 5.25 बजे से पहले धर्मसभा में उपस्थित होने का आग्रह किया है। महावीर निर्वाण कल्याणक महोत्सव शिखर दिवस के लाभार्थी परिवार है हुकमचंद पटवा परिवार। लालगंगा पटवा भवन में महावीर कल्याणक महोत्सव के बाद गौतम स्वामी केवलज्ञान महोत्सव, सुधर्मा स्वामी पट्टारोहण मनाया जाएगा, और इसी के साथ श्रुत आराधना का समापन होगा। उपाध्याय प्रवर ने कहा कि इस वक्त हमें स्वाध्याय की नहीं आराधना  की आवश्यकता है, और श्रुतदेव इसका जवाब है। उत्तराध्ययन श्रुतदेव आराधना प्रभु महावीर का वरदान है, इसे पवित्र आगम के रूप में हर घर में स्थापित करना है। श्रुतदेव आराधना 21 दिनों के लिए नहीं जीवन भर होनी चाहिए।  महोत्सव के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रभु महावीर के निर्वाण के 48 मिनट बाद इंद्रभूति गौतम को केवलज्ञान प्राप्त हुआ और वे परमात्मा बन गए। सुधर्मा स्वामी का महावीर के उत्तराधाकारी के रूप में अभिषेक हुआ। उन्होंने पूछा कि इंद्रभूति गौतम को महावीर का उत्तराधाकारी क्यों नहीं बनाया गया? वे तो महावीर के बेहद करीब थे, परम भक्त थे? इंद्रभूति गौतम सूर्य थे और सुधर्मा स्वामी दीपक, लेकिन शासन ने महावीर के प्रकाश को फ़ैलाने के लिए दीपक को चुना। ऐसा इसलिए क्योंकि सूरज बोलेगा कि महावीर ने ऐसा बोलै, उसके माध्यम से ज्ञान पहुंचेगा, प्रभु नहीं। संघ तब बनता है जब प्रभु पहुंचते हैं। सूरज कभी नहीं कहेगा की मैंने ऐसा सुना है, वह कहेगा मैं जनता हूँ। सुधर्मा स्वामी को सुनना मतलब दुनिया में प्रभु के शब्दों को पहुंचाना। सुधर्मा स्वामी ने कभी अपने आप को प्रस्तुत नहीं किया। आज तक कई लोग ऐसे भी हैं को इंद्रभूति गौतम को जानते हैं, लेकिन सुधर्मा स्वामी से भलीभांति परिचित नहीं हैं। अगर हम अपने आप को प्रस्तुत करेंगे यो महावीर को लोगों के बीच नहीं पहुंचा सकेंगे, परमात्मा को पहुंचाना है तो खुद को शून्य बनाना पड़ेगा। यह सुधर्मा स्वामी के चरित्र की सुन्दरतम बात है। उन्होंने कहा कि निर्वाण कल्याणक के बाद इंद्रभूति गौतम की भक्ति शुरू होगी। ललित पटवा ने सकल जैन समाज से इस अनुष्ठान में सपरिवार जुड़ने का आग्रह किया। धर्मसभा में गौतमपात्र की स्थापना हो गई है, उपाध्याय प्रवर ने श्रावकों से निवेदन किया है कि इस पात्र में सहपरिवार सूखा मेवा समर्पित करना है, जिसे महावीर निर्वाण कल्याणक के शिखर दिवस पर प्रसादी के रूप में वितरित किया जाएगा। निर्वाण कल्याणक की आराधना के लिए सकल जैन समाज को आमंत्रण है।

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