रायपुर - आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनिश्री सुधाकर जी अपने सहवर्ती मुनिश्री नरेश कुमार जी के साथ गुरु इंगित को ध्यानार्थ करते हुए सिमोगा, कर्नाटक से लगभग 1500 किलोमीटर का विहार करते हुए वर्षावास अर्थात चातुर्मास हेतु रायपुर, छत्तीसगढ़ पधारे तदर्थ उनका आज भव्य चातुर्मासिक मंगल प्रवेश चातुर्मास काल हेतु टैगोर नगर स्थित श्री लालगंगा पटवा भवन में भव्य शोभायात्रा के माध्यम से हुआ। जिसमें रायपुर के साथ ही विशेष रूप से राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई आदि क्षेत्रों से भी आगमित श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति रही।
शोभायात्रा परिसंपन्नता के पश्चात मुनिश्री ने महामंगल पाठ से उपस्थित जन-मानस को लाभान्वित कराया। शोभायात्रा स्वागत सभा के रूप में परिणित हुई जिसमें मुनिश्री नरेश कुमार जी ने गीतिका के माध्यम से चातुर्मास की महिमा का संगान किया। उपस्थित जन-मानस को अपनी ओजस्वी वाणी से मुनिश्री सुधाकर जी ने परिचित करवाते हुए अन्य धर्मों के साथ ही विशेष रूप से जैन धर्म में चातुर्मास की महिमा से अवगत कराया। मुनिश्री ने फ़रमाया कि इस चातुर्मास काल में विशेष रूप से जप और तप का संगम देखने को मिलगा। जप और तप दोनों की अपनी अलग-अलग महिमा है परन्तु जब तप के साथ जप का समायोजन/संगम होता है तो उसका लाभ/फल कई गुना बढ़ जाता है। मुनिश्री ने आगे फरमाते हुए बताया कि देव-गुरु-धर्म की शरण में रह कर हम लक्षित मंजिल को बहुत ही आसानी के साथ पा सकते हैं साथ ही जो व्यक्ति देव-गुरु-धर्म की आराधना में रमा रहता है अर्थात् परिस्थिति चाहे जैसी भी हो पर विमुख नहीं होता उसका सदा मंगल ही मंगल होता है।
उपरोक्त जानकारी देते हुए वीरेंद्र डागा ने आगे बताया कि मंगलाचरण कन्या मंडल व स्वागत गीतिका तेमम, तेयुप, टीपीएफ व स्वागत वक्तव्य गौतम गोलछा, सूर्य प्रकाश बैद, महेन्द्र धारीवाल, सम्पत डागा, शिवराज भंसाली, सौम्या लूंकड, मधुर बच्छावत, ललिता धारीवाल, दानमल पोरवाल एवं संचालन मनीष नाहर के साथ आभार अभिषेक गांधी ने किया।