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दान रुचि, अल्प कसाय एवम साधर्मिक भक्ति के गुणों से ही मनुष्य जन्म का योग बंद होता है :- खरतरगच्छाधिपति आचार्य जिन मणिप्रभसूरी

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सूरत चातुर्मास में गुरुदेव के आशीर्वाद से तपस्या का ठाठ लगा हुआ है।

 सूरत 14/08/24 - पाल स्थित कुशल कांति खरतरगच्छ जैन श्री संघ सूरत के तत्वधान में चल रहे चातुर्मास में नियमित प्रवचन में खरतर गच्छाधिपति आचार्य श्री जिन मणि प्रभ सूरीश्वर जी ने कहा की दान रुचि, अल्प कसाय एवम साधर्मिक भक्ति के गुणों से ही मनुष्य जन्म का योग बंद होता है।

भगवान महावीर की जिनवाणी में उत्राध्यन सूत्र के तीसरे अध्याय के बारे में प्रवचन देते हुवे कहा की चतुरंगी जिसका दूसरा नाम दुर्लभता है मनुष्य जन्म को दुर्लभ बताया,प्रमात्मा के प्रति श्रद्धा को दुर्लभ बताया, वीरवाणी को सुनना दुर्लभ बताया।

मनुष्य जन्म के लिए कितना ही पुरुषार्थ करना पड़ता है।

दुर्लभ का मतलब ही कठिन होता है जो परिश्रम एवम काफी मेहनत से किया जाए उसे दुर्लभ कहते है इसलिए श्रद्धा को भी दुर्लभ बताया है।

वितराग के प्रति, धर्म के प्रति, सत्य के प्रति श्रद्धा दुर्लभ है उस श्रद्धा को क्रियान्वित करना और भी दुर्लभ है। बड़े ही पुण्य से मिलता है मनुष्य जन्म।

मनुष्य जन्म को पाने के लिए हम कितने कितने भवो तक कहां कहा भटके होंगे तब जाकर मनुष्य जन्म मिला होगा।

अगर आपको अगला भव भी मनुध्य का चाहिए तो क्या गुण होना जरूरी है मनुष्य में दान रुचि, अल्प कसाय,साधर्मिक भक्ति इन तीनो का भावो एवम श्रद्धा के साथ होने पर ही मनुष्य जन्म का बंद होता है।

संघ अध्यक्ष ओमप्रकाश मंडोवरा ने बताया की संघ में गुरुदेव के आशीर्वाद से तपस्या का ठाठ लगा हुआ है कई तरह की तपस्या चल रही है।

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