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बिलासपुर के श्रेष्ठि वर्य समाजसेवी हीरचंद चोपड़ा द्वारा सपत्नीक मृत्युपरांत देहदान की घोषणा।

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बिलासपुर - बिलासपुर के वरिष्ठ चोपड़ा दम्पति ने समाजसेवा एवं मानवीय मूल्यों की एक अनुकरणीय मिसाल प्रस्तुत की है।

क्रांति नगर, बिलासपुर निवासी चोपड़ा परिवार के वरिष्ठ एवं सम्माननीय श्री हीरचंदजी चोपड़ा (86) एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कांतादेवी (82) ने भविष्य में निधन उपरांत देहदान का संकल्प लिया है।

इसकी प्रेरणा उन्हें बड़े भाई स्व. श्री शांतिलाल चोपड़ा से मिली, जिनकी अंतिम इच्छा अनुरूप उनके निधन पश्चात भी उनका पार्थिव शरीर रायपुर मेडिकल कॉलेज को अध्ययन एवं अनुसंधान हेतु समर्पित किया गया था।

श्री हीरचंदजी-कांतादेवी चोपड़ा के इस महान एवं समाजोपयोगी निर्णय का उनके पुत्र सर्व श्री संजय, सुनील एवं संजीव चोपड़ा, पुत्री संगीता एवं दामाद डॉ. अजयजी ओसवाल ने भी पूर्ण सहमति, श्रद्धा एवं सम्मान के साथ स्वागत किया है।

नगर के गणमान्य लोगों के साथ-साथ मित्र श्री अनिलजी टाह जी, श्री राजेशजी चौकसे व सभी शुभचिंतकों ने इस निर्णय की भूरी भूरी प्रशंसा एवं सराहना की है एवं समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायी और अनुकरणीय कदम बताया।

देहदान मानवता की सर्वोच्च सेवा का एक ऐसा माध्यम है, जिससे मेडिकल विद्यार्थियों को व्यावहारिक शिक्षा एवं अनुसंधान में अमूल्य सहयोग मिलता है। साथ ही यह समाज में अंगदान एवं देहदान जैसी पुण्य परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने का सशक्त संदेश भी देता है।

चोपड़ा परिवार ने समाज के सभी नागरिकों से अपील की है कि, वे इस विषय पर आगे सकारात्मक सोच विकसित करें तथा मृत्यु उपरांत भी मानवता की सेवा के इस महान कार्य से जुड़ने का संकल्प लें।

"जीवन का सबसे बड़ा दान वह है, जो मृत्यु पश्चात भी मानवता के काम आए।"

इस निर्णय को समाज में सेवा, संवेदना एवं मानवीय मूल्यों की दिशा में एक प्रेरक कदम माना जा रहा है।

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