हैदराबाद/रायपुर - हैदराबाद के त्रयनगर स्थित कारवान दादावाड़ी में आयोजित श्री संघ शास्ता वर्षावास–2026 के अंतर्गत 9 अगस्त 2026 को परम पूज्य गुरुदेव सूरि सम्राट, खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. ने अपने चातुर्मासिक मंगल प्रवचन में कहा कि अक्सर यह सुनने को मिलता है कि आज की युवा पीढ़ी धर्म से दूर होती जा रही है, लेकिन उनका अनुभव इससे अलग है। आज युवा मंदिरों एवं तीर्थों में दिखाई दे रहे हैं, गुरुभगवंतों के सत्संग में सहभागी बन रहे हैं, साधु-साध्वियों के विहार में सेवा कर रहे हैं तथा तपश्चर्या के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहे हैं। अनेक युवा बालक-बालिकाएँ संसार की असारता को समझकर संयम एवं दीक्षा के मार्ग पर भी अग्रसर हो रहे हैं। यह निश्चित रूप से युवाओं की सकारात्मक दिशा का परिचायक है।
गुरुदेव श्री ने कहा कि इसके साथ हमें अपने जीवन के दूसरे पक्ष पर भी ध्यान देना होगा। हमारी दिनचर्या कैसी है और हमारे 24 घंटे किसके हवाले हैं? प्रातः आँख खुलते ही हमारी पहली दृष्टि परमात्मा पर जाती है या मोबाइल की स्क्रीन पर? उन्होंने कहा कि हम सूर्यवंशी होने के बजाय स्क्रीनवंशी होते जा रहे हैं। रात को 11-12 बजे तक मोबाइल देखने के कारण सूर्योदय के सुंदर दृश्य से वंचित रह जाते हैं। आँख खुलते ही नवकार महामंत्र का स्मरण या माता-पिता को प्रणाम करने के बजाय सीधे मोबाइल का लॉक खोलने की आदत बन गई है। दिन की शुरुआत स्क्रीन से होती है और स्क्रीन देखते-देखते दिन समाप्त हो जाता है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल साधन है और साधन ही रहना चाहिए, लेकिन आज वह हमारा मालिक बन गया है और हम उसके सेवक बन गए हैं। हर कुछ मिनट में मोबाइल देखने की आदत पड़ गई है। रील पर रील चलती जाती है। यह ऐसी गुफा है, जिसमें प्रवेश का द्वार तो है, लेकिन बाहर निकलने का कोई दरवाजा नहीं है।
इससे बचने के लिए “आर्ट ऑफ अनप्लगिंग” सीखना होगा। सप्ताह में एक दिन “डिजिटल फास्टिंग” का संकल्प लिया जा सकता है। कम से कम एक-दो घंटे मोबाइल से पूर्ण दूरी बनाई जाए। रात 10 बजे परिवार के सभी मोबाइल एक स्थान पर जमा करने का नियम बनाया जा सकता है। भोजन का समय, परिवार के साथ बैठने का समय तथा ध्यान-साधना का समय नो-मोबाइल जोन होना चाहिए।
गुरुदेवश्री ने प्रेरणा देते हुए कहा कि FOMO — Fear of Missing Out के स्थान पर JOMO — Joy of Missing Out को अपनाना चाहिए। जो नहीं देखा, उसका भी आनंद और जो नहीं किया, उसका भी आनंद लेना सीखना चाहिए। 24 घंटे के बेहतर नियोजन के लिए उन्होंने 6+6+6+6 का सूत्र बताते हुए कहा कि छह घंटे कार्य के लिए, छह घंटे परिवार, मित्र एवं सोशियल एक्टिविटीज के लिए, छह घंटे विश्राम के लिए तथा छह घंटे स्वयं, साधना एवं आत्मचिंतन के लिए निर्धारित किए जा सकते हैं। परिवार में प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा सभी मोबाइल से दूर रखकर साथ बैठना चाहिए, आँखें बंद कर परमात्मा का स्मरण और आपस में संवाद करना चाहिए।
अपने मंगल संदेश में गुरुदेव श्री ने कहा कि मोबाइल हमारी सेवा करने के लिए आया है, हमें मोबाइल की सेवा करने के लिए नहीं। यदि हमने स्वयं को स्क्रीन से अनप्लग कर लिया, तो हमारा जीवन निश्चित रूप से परम शांति एवं परम समाधि की दिशा में आगे बढ़ेगा।
प्रवचन के पश्चात् पूज्य मुनि श्री विरक्तप्रभसागरजी म.सा. ने सभी तपस्वियों की सुखशाता पूछते हुए जानकारी दी कि अगले दिन के प्रवचन का विषय “आर्ट ऑफ लिविंग” रहेगा।