रायपुर - श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड, चल रहे श्री दिगम्बर जैन आदीश्वरधाम नवोदय तीर्थ समयोपदेश वर्षायोग 2026 में आज 10 अगस्त सोमवार का दिन धर्म, भक्ति और ज्ञान की त्रिवेणी से ओत-प्रोत रहा। आज प्रातःकालीन अभिषेक, शांतिधारा व पूजन। आज प्रातः 8 बजे श्री पार्श्वनाथ जिनालय टैगोर नगर दिगंबर जैन मंदिर के समस्त समाजजन उपस्थित रहे। अभिषेक व शांतिधारा करने का सौभाग्य श्री सनत, अनिल, मनोज, रोमिल जैन चूड़ी वाला परिवार एवं द्वितीय शांतिधारा करने का सौभाग्य श्री संदीप जैन परिवार आम्रपाली, अध्यक्ष - टैगोर नगर परिवार को प्राप्त हुआ।
श्री दिगम्बर जैन आदीश्वरधाम नवोदय तीर्थ समयोपदेश वर्षायोग 2026 समिति के अध्यक्ष श्री नरेंद्र जैन गुरुकृपा एवं कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय नायक जैन ने बताया कि आज श्री जी के अभिषेक और शांतिधारा के पश्चात संतों के दिव्य सान्निध्य मे स्वाध्याय संपन्न हुआ जिसमें आज मुनि श्री 108 पुनीत सागर जी महाराज द्वारा तत्त्वार्थ सूत्र का अध्ययन करवाया गया।
मुनि श्री 108 आगम सागर जी द्वारा छह ढाला की कक्षा में 7 नरक का सूक्ष्म व्याख्यान करते हुए सुंदर मंगल देशना दी गई। आज संतों की आहारचर्या का सौभाग्य मुनि श्री 108 आगम सागर जी: श्री राजकुमार - संस्कार जैन (भाटापारा परिवार), झाबक बाड़ा, मुनि श्री 108 पुनीत सागर जी: श्रीमती पुष्पा बंशीलाल जैन, जैन बाड़ा, एलक श्री 105 धैर्य सागर जी: श्रीमती चंपादेवी विजय कुमार जैन, सिटी कोतवाली चौक, एलक श्री 105 स्वागत सागर जी: श्रीमती शालिनी आनंद जैन, बढ़ईपारा - ललिता चौक को प्राप्त हुआ।
आज मुनि 108 श्री आगम सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में बताया कि स्वाध्याय सुनना भी एक प्रकार की महान तपस्या है। यह तपस्या हर किसी से नहीं हो पाती, जिसका विशेष सौभाग्य होता है, उसी को इसका लाभ मिलता है। उन्होंने बहुत ही सुंदर उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे पहले बच्चे स्कूल जाने से कतराते थे और बहाने बनाते थे, लेकिन जब उन्हें धीरे-धीरे पढ़ाई का चस्का लग जाता है, तो वे बाकी सब भूल जाते हैं। ठीक उसी प्रकार, जिधर चाह (रुचि) उत्पन्न होती है, मनुष्य सब दुखों को भूलकर अपना मन उसी ओर लगा लेता है।
प्रथम ढाला के अंतर्गत नरक गति के स्वरूप को समझाते हुए मुनि श्री ने बताया कि वहाँ सुई की नोक बराबर भी सुख नहीं मिलता और संपूर्ण वातावरण केवल दुःख से भरा होता है।नरक में एक नारकी जीव दूसरे नारकी जीव के तिल-तिल बराबर टुकड़े कर देता है, और पाप के प्रभाव से वे शरीर के अंग स्वतः ही फिर से जुड़ जाते हैं। और पुनः कष्ट को प्राप्त करते रहते है। असुरकुमार जाति के देव और अम्बा (व्यन्तर) जाति के देवता नरक में आपस में नारकीय जीवों की आपसए लड़ाई करवाते हैं और नारकियों के टुकड़े करवा देते हैं। वहाँ का पूरा वातावरण अत्यधिक पीड़ादायक होता है। जीवन भर मास जिसने खाया है उसे एक नारकीय अपने हाथ पांव काट कर खिलाता है। शराब जिसने पिया उसे गरम गरम रांगा पिलाया जाता है। उसकी आत्मा को अनेको प्रकार के कष्ट बिना रुके मिलते ही रहते है।
मुनि श्री ने कहा कि जो मनुष्य इस लोक और भव के दुःखों से ऊपर उठना चाहता है, वह पाप का त्याग कर देता है और पूरी तरह जिनेंद्र भगवान की भक्ति में लीन हो जाता है। सच्चा जिनेंद्र भक्त क्रोध, मान, माया और लोभ रूपी चारों कषायों की दशा से धीरे-धीरे दूर होता जाता है।
आत्मा की गति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि बुरे कर्मों के भार से हमारी आत्मा भारी हो जाती है और जीव पतन की ओर यानी नीचे की ओर चला जाता है, जबकि अच्छे कर्मों वाली आत्मा सदैव ऊर्ध्वगामी (ऊपर की ओर) होती है।
उन्होंने रात्रि भोजन करने वाले सभी के लिए दृष्टांत देते हुए कहा कि सनातन धर्म में रात्रि भोजन नहीं करना है ऐसा सनातन धर्म के ग्रंथ मार्कण्डेय पुराण में भी लिखा हुआ है। इसलिए सभी को दिन के भोजन और रात्रि भोजन नहीं करने के नियम लेना चाहिए उसके परिणाम भी शुभ मिलते है।
सच्चे धर्मात्मा के लक्षणों को परिभाषित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि धर्मात्मा जीव कभी किसी के प्राण नहीं लेता, बल्कि वह हर प्राणी की रक्षा करता है। सच्चा धर्मात्मा वही है जो अपनी ही आत्मा के समान संसार की अन्य समस्त आत्माओं के हित और सुख-दुःख के बारे में सोचता है।
इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित धर्मप्रेमी जैन समाज के बंधुओं ने मुनि श्री की मंगल देशना का श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया।
सूचनादाता - प्रणीत जैन मीडिया प्रभारी
सकल दिगम्बर जैन समाज, रायपुर (छ.ग.)
श्री दिगम्बर जैन आदीश्वरधाम नवोदय तीर्थ समयोपदेश वर्षायोग 2026 समिति
श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड, रायपुर (छ.ग.)