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जैनम एकेडमी की संस्थापिका एवं शिक्षाविद् दीपाक्षा जैन को मिला एक और सम्मान।

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निःशुल्क शिक्षा, संस्कार एवं बाल विकास के क्षेत्र में योगदान के लिए जैन समाज के नवकार जाप ग्रुप ने "जैन गौरव सम्मान' से किया सम्मानित।

रायपुर - जैनम एकेडमी की संस्थापिका एवं शिक्षाविद् दीपाक्षा जैन को शिक्षा, संस्कार एवं बाल विकास के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए जैन समाज के नवकार जाप ग्रुप द्वारा सम्मानित किया गया। श्री शांति कल्याण चातुर्मास समिति 2026 के अंतर्गत आयोजित नवकार जाप कार्यक्रम में यह सम्मान परम पूज्य मुनिराज श्री शांतिलाल विजय जी म.सा. एवं पूज्य साध्वी श्री ज्ञानदर्शिता श्रीजी म.सा. की पावन उपस्थिति में प्रदान किया गया।

इस अवसर पर दीपाक्षा जैन ने भावुक होते हुए अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, “हर बच्चे को आगे बढ़ने का अवसर और सम्मान मिले। समाज अलग-अलग हों, लेकिन दिलों में प्रेम और अपनापन हो। हम सब मिलकर ऐसा भारत बनाएँ, जहाँ मानवता ही सबसे बड़ा धर्म हो।” उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि कोई भी बच्चा आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा और अपने सपनों से वंचित न रहे।


मुख्यमंत्री से सम्मानित होने के बाद दीपाक्षा जैन की उपलब्धियों की कड़ी में यह एक और महत्वपूर्ण सम्मान जुड़ा है। उनके लिए यह सम्मान विशेष रूप से गौरवपूर्ण रहा, क्योंकि परम पूज्य गुरु मरासा जी की पावन उपस्थिति में सम्मानित होना उनके लिए भावनात्मक और अविस्मरणीय अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि जीवन में अनेक उपलब्धियाँ और सम्मान महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन कुछ अवसर अपनी आध्यात्मिक गरिमा और भावनात्मक महत्व के कारण हमेशा याद रहते हैं। यह सम्मान उन्हें शिक्षा, संस्कार एवं समाज सेवा के क्षेत्र में और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता रहेगा।

दीपाक्षा जैन जैनम एकेडमी के माध्यम से बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के साथ उनके सर्वांगीण विकास, रचनात्मकता और संस्कारों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। एकेडमी में नियमित कोचिंग के साथ निःशुल्क बाल संस्कार कक्षाएँ तथा ड्रॉइंग और डांस जैसी रचनात्मक गतिविधियाँ भी निःशुल्क कराई जाती हैं। इसके अतिरिक्त, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के 50 से अधिक बच्चों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने में भी उन्होंने सहयोग दिया है।


उन्होंने कहा कि जैन समाज सदैव दान, सेवा, शिक्षा और संस्कारों की परंपरा में अग्रणी रहा है। इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने की सोच के साथ वे बच्चों की शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रयासरत हैं। उनका मानना है कि जब हर बच्चे को शिक्षा, संस्कार और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा, तभी एक सशक्त, संवेदनशील और संस्कारित भारत का निर्माण होगा।

दीपाक्षा जैन ने नवकार जाप ग्रुप, श्री शांति कल्याण चातुर्मास समिति 2026 तथा सभी आयोजकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा, संस्कार और सर्वांगीण विकास के लिए उनके प्रयास आगे भी निरंतर जारी रहेंगे।

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