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मुनि श्री आगम सागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में संपन्न हुए दैनिक धार्मिक अनुष्ठान, मुनि श्री पुनीत सागर जी महाराज के प्रखर प्रवचन से गूंजा धर्मसभा भवन; 9 नवंबर को भव्यता से मनाया जाएगा भगवान महावीर स्वामी मोक्ष कल्याणक महापर्व।

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रायपुर -  ​समयोपदेश वर्षायोग 2026 के अध्यक्ष श्री संजय जैन नायक एवं सचिव श्री राजेश रज्जन जैन ने जानकारी दी है कि श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड में परम पूज्य मुनि श्री आगम सागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में चल रहे संयोपदेश वर्षायोग 2026 चतुर्मास के अंतर्गत 6 नवंबर को प्रातः 8 बजे मूलनायक भगवान की बेदी के समक्ष श्रीजी को पाण्डुक शिला पर विराजमान कर भव्य अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई। आज की रिद्धि-सिद्धि और सुख-शांति प्रदाता पावन शांतिधारा करने का परम सौभाग्य कोटा (राजस्थान) निवासी श्री जयप्रकाश जैन एवं श्री रजत जैन सभद्रा परिवार को प्राप्त हुआ।

​आज मुनि श्री पुनीत सागर जी महाराज ने अपनी धार्मिक कक्षा में ग्रंथराज 'इष्टोपदेश' का बहुत ही सुंदर और मर्मस्पर्शी अध्ययन करवाया। मुनि श्री ने श्रद्धालुओं को आत्म-कल्याण का मार्ग दिखाते हुए अपने उद्बोधन में निम्नलिखित विशेष बातें बताई मुनि श्री ने समझाया कि शरीर का स्वभाव धोखा देने वाला है, अतः इसे अपनी आत्मा मत समझो। आत्मा अमर है जबकि यह शरीर पूरी तरह नश्वर है। एक मूर्ख व्यक्ति ही नश्वर शरीर को अपना मानता है। जिस मकान या घर में मुनिराज के चरण नहीं पड़ते, वह घर श्मशान के समान है। जड़ पदार्थों से मोह रखने पर जड़ (कर्म) जन्म-जन्मांतर तक चिपकता जाता है। ज्ञान रूपी धन से जड़ (भौतिक) धन नहीं बढ़ता। वह धन ही उत्कृष्ट और श्रेष्ठ है जो केवल वास्तविक ज्ञान से प्राप्त होता है। भौतिक धन आत्मा के स्वभाव से सर्वथा भिन्न है।पति और पत्नी दोनों का शरीर अलग-अलग होता है। जैसे यदि किसी एक को भूख लगती है और वह भोजन करता है, तो उसी का पेट भरता है; ठीक उसी प्रकार संसार में प्रत्येक जीव को अपना-अपना धर्म स्वयं ही करना पड़ता है और उसके कर्मों का फल भी उसी को भोगना पड़ता है। किंतु आज के समय में लोगों ने मिथ्यात्व के माध्यम से अलग-अलग मान्यताएं और व्यवस्थाएं बना ली हैं। विवाह का मुख्य उद्देश्य धर्म और संतान की उत्पत्ति होता है, परंतु आज के लोग केवल अपनी कृत्रिम लाइफस्टाइल और संकीर्ण सोच के कारण संतान उत्पन्न नहीं करते, जिसे मुनि श्री ने महापाप बताया है। वृक्ष पर पक्षी आकर थोड़ी देर बैठते हैं और मौन रहते हैं, किंतु दिन निकलते ही वे चहचहाते हैं और उड़ जाते हैं। मनुष्य का जीवन भी बिल्कुल ऐसा ही है। मनुष्य जन्म लेकर इस संसार में बैठता है और अंततः नष्ट हो जाता है। अतः मोह को कम करें और यदि आपके पास बुद्धि, साहस और उचित समय है, तो बिना देर किए अपना आत्म-कल्याण कर लेना चाहिए। जो जितना अधिक सहन करेगा, वह उतना ही आध्यात्मिक रूप से ऊपर उठेगा।

​आज 6 नवंबर को परम पूज्य संतों को नवधा भक्ति के साथ आहार दान देने का परम सौभाग्य रायपुर के निम्नलिखित धर्मप्रेमी परिवारों को प्राप्त हुआ:

​1. आचार्य/मुनि श्री आगम सागर जी महाराज को आहार देने का सौभाग्य निज निवास टैगोर नगर निवासी श्री जीवन लाल जी जैन, श्रीमती चंद्रवती जैन, श्री पुष्पेंद्र जैन, श्रीमती रोहिता जैन, अपराजिता जैन एवं ईशान जैन को प्राप्त हुआ।

​2. मुनि श्री पुनीत सागर जी महाराज को आहार देने का सौभाग्य निज निवास मालवीय रोड निवासी श्रीमती शालिनी प्रभात जैन को प्राप्त हुआ।

​3. एलक श्री धैर्य सागर जी महाराज को आहार देने का सौभाग्य जैन बाड़ा निवासी श्रीमती सरिता जैन, सपना जैन एवं रेखा जैन को प्राप्त हुआ।

​4. एलक श्री स्वागत सागर जी महाराज को आहार देने का सौभाग्य मंदिर जी कार्यालय के सामने निवासी श्रीमती पुष्पादेवी बंशीलाल जैन को प्राप्त हुआ।

​9 नवंबर को आयोजित होगा भव्य महा-महोत्सव: निर्वाण लाडू एवं पावन कलशों का निष्ठापन

​समयोपदेश वर्षायोग समिति एवं सकल दिगम्बर जैन समाज, रायपुर द्वारा आगामी 9 नवंबर 2026, सोमवार को आयोजित होने वाले विशाल धार्मिक महा-महोत्सव के संबंध में विस्तृत रूपरेखा जारी की गई है। 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के पावन मोक्ष कल्याणक महापर्व के मंगल अवसर पर बड़ा मंदिर, मालवीय रोड में एक विशाल धार्मिक समारोह आयोजित किया जा रहा है, जिसकी रूपरेखा इस प्रकार है:

​1. प्रातः 7:00 बजे भव्य अभिषेक एवं शांतिधारा: प्रातः काल जिनेन्द्र देव का वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ अभिषेक तथा संपूर्ण विश्व में सुख, शांति, समृद्धि एवं सर्वजन हिताय की भावना के साथ शांतिधारा संपन्न होगी।

​2. भगवान महावीर स्वामी पूजन: मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर विशेष अष्टद्रव्य पूजन एवं संगीतमय अर्घ्य समर्पण किया जाएगा।

​3. निर्वाण लाडू समर्पण: 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के मोक्ष गमन के पावन प्रसंग पर भव्य रूप से निर्वाण लाडू समर्पित किया जाएगा।

​4. कलश निष्ठापन एवं आमंत्रण: 'समयोपदेश वर्षायोग 2026' के पावन कलशों का सविधि निष्ठापन किया जाएगा तथा कलश धारकों द्वारा सपरिवार कलश प्राप्ति के लिए सभी को सादर आमंत्रित किया गया है।

​5. मांगलिक बोलियां: कार्यक्रम के दौरान फूलमाला, आरती एवं विविध मांगलिक क्रियाओं की बोलियां मुनि 108 श्री आगम सागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में संपन्न कराई जाएंगी।

​वर्षायोग समिति एवं मंदिर प्रबंधकारिणी ने रायपुर की समस्त धर्मप्रेमी जनता से विनम्र अपील की है कि वे 9 नवंबर को प्रातः 7 बजे समय पर उपस्थित होकर इस महान धार्मिक अनुष्ठान और जिनशासन प्रभावना का हिस्सा बनें तथा अपने जीवन को धन्य कर पुण्य लाभ अर्जित करें।

​प्रेषक: प्रणीत जैन (मीडिया प्रभारी)

सकल दिगम्बर जैन समाज एवं समयोपदेश वर्षायोग समिति 2026, रायपुर

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