जैनसाध्वी श्री स्नेहयशा श्रीजी व श्री सिद्धान्त निधि श्रीजी म सा की निश्रा में श्री गुरुदेव दयाल को मन मे ध्यान लगाएं अष्ठ सिद्धि नव निद्धि मीले मनवांछित फल पाए के गुणानुवाद की चौपाइयों के साथ गुरु एक्तिशा के संगीतमय पाठ के साथ चमत्कारी श्री जिनकुशल सूरी जैन दादाबाड़ी भैरव सोसाइटी में अमावस्या की बड़ी पूजा का आगाज किया गया, बड़ी पूजा का प्रारम्भ नारियल अक्षत नैवैद्य के समर्पण मंत्र के साथ भक्तों ने प्रारम्भ कि, उपरोक्त जानकारी श्री सीमंधर स्वामी जैन मंदिर व दादाबाड़ी ट्रस्ट के महासचिव महेन्द्र कोचर व ट्रस्टी नीलेश गोलछा ने देते हुए बताया कि सर्वप्रथम ट्रस्ट के अध्यक्ष संतोष बैद ने चातुर्मास पूर्व की अंतिम अमावस्या पूजा में चारो दादा गुरुदेव के चमत्कारिक जन हितेषी उपकारों का वर्णन करते हुए प्रथम पूजा के जलाभिषेक विधान की पूजा गुरु पर तीख सुरतरु रूप सुगुरु सम दूजो तो नही दूजो तो नही के भाव पूर्ण बोलो से लाभार्थी परिवारों ने अभिषेक किया, उसी तारतम्य में क्रमशः जल, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, अक्षत, नैवेद्य व फल के समर्पण के 8 विधान सस्वर मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुई, फल पूजा का विधान फल पूजा से फल मिले प्रगटे नवे निधान के बोलो के साथ संपन्न हुई , नवा विधान वस्त्र पूजा का साध्वी श्री के मुखारविन्द से लक्ष्मी लीला पावे रे सुंदर जे गुरु वस्त्र चढ़ावे जे गुरु वस्त्र चढ़ावे के संगीतमय बोलो से प्रारम्भ हुआ वही सुप्रसिद्ध भजन गायक वर्धमान चोपड़ा ने, कैसे कैसे अवसर में गुरु राखी लाज हमारी मोको सबल भरोसो तेरो चंद्र सूरी पट्टधारी के समर्पण बोलो से गुरु से अरदास की कु दीप्ती बैद ने गुरु तेरे चरणों की धूल जो मिल जावे सच कहता हूं मेरी तगदीर बदल जाये दादा तेरे चरणों की के बोलो से सभी भक्तों के लिए गुरु का आशीर्वाद मांगा वही निर्मल पारख ने ,चांद से सुंदर मुखड़ा तेरा नयन के अमृत के प्याले वो तो कोई और नही है वो तो दादा मालपुरा वाले के बोलो से गुरु महिमा की बलिहारी ली दसवीं पूजा में चांदी की ध्वजा को महिलाओं ने सिर पर रखकर धूप दीप चवर के साथ दादा गुरु की छतरी की 3 फेरी देकर इन बोलो ध्वज पूजन कर हरख भरी- हरख भरी रे देवा हरख भरी रे के चौपाई के साथ शिखर पर ध्वजारोहण किया। पूजा में पदम गोलछा, अशोक कोचर, प्रकाश पारख, नीलेश गोलछा, वर्धमान चोपड़ा, श्री निलमचंद बरडिया, कपूरचंद भंसाली, श्रीमती मंजू बरडिया, शैला बरडिया, सपना गोलछा स्वेता कोचर ममता जैन, आदि भक्तजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे, पूजा का समापन आरती मंगल दीपक के साथ हुआ । पूजा के लाभार्थी परिवार जयचंद, रमेशचंद, मोहनचंद, बच्छावत बसंत जी जितेंद्र जी नाहर, निलमचंद डॉ अंशुल बरडिया, वर्धमान, वर्तिक, वैभव चोपड़ा, गुमानचन्द, कांतिलाल झाबक, मूलचंद सन्तोष, सरला बैद हैं।