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काम नहीं करने के लिए लाेगों के पास 100 बहाने होते है, जिस काम को करना ही हो उसके लिए कोई बहाना नहीं बनाता: साध्वी श्री स्नेहयशाश्रीजी।

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रायपुर। किसी काम को नहीं करने के लिए आप सौ बहाने बना सकते हाे और जो काम आपको करना हाेता है, उसके लिए तो आप कभी बहाना नहीं बनाते। दुकान जाने, ऑफिस जाने के लिए आप बहाने नहीं बनाते है। वहीं, अगर आपको मंदिर जाना हो या फिर कोई मेहमान घर आए तो आप दुकान और आफिस का बहाना बनाकर निकल जाते हो। यह बातें गुरुवार को न्यू राजेंद्र नगर के मेघ-सीता भवन, महावीर स्वामी जिनालय परिसर में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान साध्वी श्री स्नेहयशाश्रीजी ने कही। साध्वीजी स्नेहयशाश्रीजी ने बहानेबाजी करने वालों का उदाहरण देते हुए बताया कि एक बार स्कूल की टीचर ने बच्चों को घास खाते हुए गाय, कुत्ता और बिल्ली का पेंटिंग बनाने का हाेमवर्क दिया। दूसरे दिन एक बच्चा बिना होमवर्क करें स्कूल पहुंच गया। टीचर के पूछने पर उसने खाली पन्ना दिखाया। टीचर ने पूछा कि पेंटिंग कहा है। उसने जवाब दिया कि गाय घास खा रही थी, इस बीच गाय को भगाने के लिए कुत्ता झगड़ने लगा। कुत्ते ने गाय को भगाया और गाय के सिंग से कुत्ते को चोट लगी और वह भी भग गया। कुत्ते को भागते देख बिल्ली को लगा कि वह उसके ओर आ रहा है और वह भी भाग गई। ऐसा करने से पूरी पेंटिंग खाली हो गई। साध्वीजी ने कहा कि आपने देखा कि उस बच्चे के पास पेंटिंग नहीं बनाने के कितने अच्छे बहाने थे। लोगों के पास हर एक बात के लिए बहाना होता है। परन्तु किसी काे अपने दुकान जाना हो तो क्या वह बहाना करता है। भले ही नौकर बहाना करें पर मालिक कभी नहीं कर सकता। मंदिर जाने के लिए भी लोग घरवालों से कहते है कि मेरे तरफ से भी आप लोग मंदिर चले जाना। बहाना हमारे पास हर समय तैयार होता है। जबकि परमात्मा कहते है कि कोई भी अगर अच्छा काम है, तो कोई बहाना मत ढंूढों। बल्कि उसे काम को करने का बहाना बनाओ और वह काम कर जाओ। जबकि आप लोग खुद ही गाते हो- प्रभु तुझसे मिलने का, मंदिर तो बहाना है।

भगवान के सीसीटीवी का फोकस हमेशा आप पर रहता है

भगवान तो हमारे अंदर है, तो हम मंदिर क्यों जाते है। जब मंदिर भी जाते हो तो वहां कोई पाप नहीं, करते मंदिर से निकलते ही पाप करना शुरु कर देते हो। आप यह सोचते हो कि भगवान तो मंदिर के चार दीवारों के बीच ही हैं। इसके बाहर कोई देखने वाला नहीं तो खुलकर पाप करो। जबकि भगवान सब जगह है। सबके अंदर भगवान है। भगवान का केवल ज्ञान इतना व्यापक है कि कोई चीज उनसे अछूती नहीं है, कुछ भी उनसे दूर नहीं है, उनके केवल ज्ञान से हर चीज स्पष्ट है। हम सिर्फ अपने आगे कि ओर ही देख सकते है। अगर अाप आसपास नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाते हो, तो वह खराब हो सकता है, पर भगवान का सीसीटीवी कभी फ्यूज नहीं होता और उसकी रेंज भी कम नहीं होती। तो आप कभी मत सोचना कि भगवान केवल मंदिर में है, उनकी दृष्टि सब जगह है। उन्हें आंखों की जरूरत नहीं है। हर जगह परमात्मा है। जो वैभव, जो गुण भगवान के पास है, वही वैभव और गुण सबके पास है। बस फर्क यह है कि हमारे अंदर जो अनंत गुण है, उस पर हमने परदा लगा रखा है। उसे इतना ढंक दिया कि अापको यह पता भी नहीं चलता कि आपके अंदर भी कुछ है। आप सोचते है कि जब समय आएगा तो उसका उपयोग करेंगे। जबकि आपको हर समय इन्हें उपयोग करते रहना है।

अपने आप को पहचानने की साधना करो

साध्वीजी ने बताया कि आप अपने आप से कहाे कि मैं आत्मा हूं। जितने बार आप यह बोलोगे आप खुद के अंदर जाते जाओगे। पूजा के अंदर लटभवरी न्याय को परिभाषित किया गया है। इसमें एक लट भंवरे के आजू-बाजू मंडराती है, पर जब उसे लगता है कि यह भंवरा गुनगुना रहा है तो वह भी कोशिश करने लगता है। कुछ समय बाद वह भी गुंजाने लगता है। लटभंवरी न्याय में यह बताया गया है कि अगर कोई जीव बार-बार पुरुषार्थ करता है तो एक दिन वह भी भंवरों की तरह गुजांने करना सीख लेता है। तो हम भी अगर बार-बार बोलेंगे कि मैं आत्मा हंू, तो धीरे-धीरे कुछ दिन बाद अंदर से आवाज आने लग जाएगी। आप बाहर का राग भूलने लगोगे। आपसे कोई पूछता है कि आप कौन है, तो उसे आप अपना नाम बताने लग जाते हो। आप आत्मा को ढकने वाले इस शरीर का परिचय देते हो। जबकि यह आपका असली नहीं, बाहरी परिचय है।

पंचपरमेशी श्रेणी तप आज से

साध्वीजी ने बताया कि पंचपरमेशी श्रेणी तप शुक्रवार से शुरु होगा। वहीं, 18 पाप स्थानक तप और दादा गुरुदेव आराधना बुधवार से शुरु हो चुकी है। जिसने 18 पाप स्थानक तप शुरु नहीं किया है, वे शुक्रवार से तप शुरु कर सकते है। पंचपरमेशी तप और 18 पाप स्थानक तप करने वालों को अरिहंत पद की आराधना करनी है। वहीं, दोपहर में महिलाओं की धार्मिक क्लासेस चल रही हैं।

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