रायपुर। आप अच्छे काम को कल-परसो पर टाल देते हो और दोष वाले काम को तुरंत करते हो। आपको पूर्ण को देखना है क्योंकि आपको पूर्ण को प्राप्त करना है। जो देखने लायक है उसे देखो और जो गलत चीजें है, उन्हें मत देखो। पर आप वैसा करते नहीं हो। परमात्मिक नियम के विपरीत चलते हो। यह बातें सोमवार को न्यू राजेंद्र नगर के मेघ-सीता भवन, महावीर स्वामी जिनालय परिसर में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान साध्वी श्री स्नेहयशाश्रीजी ने कही। साध्वीजी ने आगे कहा कि आप अगर दोष देखना चाहो तो आपकाे हर जगह दोष दिखेगा। आप अगर गुण देखना चाहो तो आपको गुण दिखेगा। वैसे ही आसमान है, आप जितना देखोगे यह उतनी ही दिखता जाएगा। आप जितनी दूर तक जाओ यह कभी खत्म नहीं होने वाला, क्योंकि यह अनंत है। आपको अगर बादल देखने छोड़ दिया जाए तो आप कभी वापस नहीं आ सकते हो। यह कभी खत्म नहीं होगा। वैसे ही एक बार की बात है, एक जेल का पहरेदार अपने जेलर से कहता है कि आज तो कमाल हो गया महोदय। जेलर कहता कि ऐसा क्या हो गया। उसने बताया कि आज जेल में कैदियों ने रामलीला की। रामलीला के दौरान भगवान लक्ष्मण मूर्छित होकर गिर पड़े और उनके इलाज के लिए एक कैदी जो हनुमान बना था, वह संजीवनी बूटी लेने गया पर अब तक नहीं लौटा है। साध्वीजी कहतीं है कि यह बिल्कुल वैसा है जैसे कि बिल्ली को दूध की रखवाली करने भेजना आैर डाकू से पैसा वसूली करवाना। वैसे ही आप कभी पूर्ण आसमान देख नहीं सकते। अपना आत्मविश्वास बढ़ाओ, दूसरों पर निराश्रित मत रहो। साध्वीजी कहती है कि एक बार माता-पिता भगवान की पूजा करते रहते है। पूजा के दौरान वे भगवान से कुछ मांगते है। आवाज तो नहीं आती पर उनका मुंह हिलता रहता है। इतना में उनका बच्चा आता है और यह देखता है कि मम्मी-पापा भगवान से कुछ तो मांग रहे है। पर वे क्या मांग रहे है यह समझ नहीं आता। उसने सोचा कि मैं भी भगवान की प्रार्थना करता हूं। पर उसे प्रार्थना करना नहीं आता था। उसने थोड़ी देर सोचा और भगवान के सामने खड़ा होकर वो ए, बी, सी, डी बाेलने लगा और एक्स, वाय, जेड तक पूरी अक्षरमाला पढ़ ली। पूजा खत्म करने के बाद माता-पिता ने उससे पूछा कि तुम ये भगवान के सामने क्या बड़बड़ा रहे थे। इस पर बच्चें ने जवाब दिया कि आप लोग भगवान की पूजा कर रहे थे, मैं भी करना चाहता था लेकिन मुझे पूजा करना और प्रार्थना करना नहीं आता तो मैंने भगवान को ए, बी, सी, डी पढ़कर सुना दी। इसके बाद मैंने भगवान से कहा कि हे भगवान मुझे तो आपकी को स्तुति नहीं आती है। मैंने अक्षरमाला पढ़कर सुना दी है। अब आपको आरती पसंद हो, आप इन शब्दों को जोड़कर उसे बना लेना। साध्वीजी कहती है यह आत्मविश्वास बढ़ाने की बात है। हमेशा दूसरों पर आश्रित नहीं रहना चाहिए। आपको जो भी, जितना भी आए उसको आधार बनाकर अपना काम करना चाहिए।