पंडरिया छेत्र में इन दिनों जुवा-सट्टा का जोर, कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति, प्रभावी कार्रवाई नही।
रामकुमार टण्डन
पंडरिया - इन दिनों धान कटाई के बाद से किसानों के पास धन आना आरंभ हो गया है, वहीं जिले सहित अन्य जिलों में भी जुवा-सट्टा बाजार पर रौनक दिखने लगी है। जुवाअड्डों में ताश के बावनपत्तो का खेल गांव सहित शहरी इलाकों में असर दिखने लगी है। इन दोनों जुवा-सट्टा बाजार ने जुवाडियो, सट्टाप्रेमियों को अपने आगोश में ले लिया है।
यह एक ऐसी अवैधानिक खेल व सामाजिक बुराई है, जिसे प्रशासन चाहकर भी पूर्णतया बंद करने में हमेशा ही नाकाम रही है। सत्ता शासन बदलतें रहें हैं, पर खेल में रुकावट नही है, प्रशासन को सरकारें हिदायत देती रही हैं। जिस क्षेत्र में जुवा-सट्टा शराब की अवैध धंधा होते पाया जायेगा उस इलाके के पुलिस अफसर पर कार्रवाई होगी, किन्तु अब तक कहीं भी इस बात पर कोई कार्रवाई अमल नही लाया गया है। शायद इसी का परिणाम है कि प्रशासनिक जिम्मेदार अफसर भी रुची नही लेते हैं। ठोस कार्रवाई पुलिस प्रशासन नही करने के पीछे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने का ठोस प्रमाण जनमानस एवम प्रशासनिक अमला के तरफ से मिलते रहे हैं। कई बार अधिकारियों के ऊपर पनिस के तौर पर कार्रवाई हुई है, पर संरक्षणधारी नेताओं के ऊपर असर नही हुआ है।
खैर पंडरिया पुलिस ने तो पिछले दिनों 23 नवंबर को मुख्यालय से 15 किलामीटर दूर ग्राम नरसिंगपुर में 10 जुवाडियों को 12,500/- रुपये के साथ रंगे हाथों पकड़ा है। किशुनगढ़ के दो शराबखोरों के ऊपर कार्यवाही कर जेल भेज दिया है। पुलिस ने मुखबीर के सूत्र पर कार्रवाई करी है, सवाल खड़े यह होता है कि सूचनातंत्र उन अड्डों का नाम और पता क्यों नही बता रही है, जहाँ हमेशा संचालन में एक मंडल लगी हुई है। पंडरिया क्षेत्र के जुवाड़ी सट्टाडी खाम्ही, लोरमी, सेतगंगा, मुंगेली, खुड़िया, पांडातराई, पोंडी, कवर्धा, बिलासपुर, नवागढ़, नांदघाट, सिमगा, खरियाररोड तक खेलने जाते हैं। इन दिनों सिमगा में लाखों रुपये का जुवा खेला जा रहा है।
कारोबार से जुड़े संलग्न सूत्रों की माने तो जुवाअड्डा में खेलने वाले जुवाडीयों से प्रशासनिक अमला और राजनीतिक लोगों के नाम पर मोटी रकम वसूल किया जाता है, नाल भी दांव व चकरी की राशि देखकर संचालकों के द्वारा लिया जाता है। नेता व अफसर बताते हैं सरकार और प्रशासन के पास इन अवैधानिक खेलों को बंद करने के लिए ठोस उपाय तो है, किंतु करना नही चाहती है क्योंकि इनसे मिलने वाली अवैध धन से आय अर्जित होने के साथ ही कई प्रोग्रामिंग तैयार किया जाता है।