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आज के मशीनरी युग में लोग मेहनत नहीं करते, जबकि कर्म से भी मिलता है धर्म का लाभ: साध्वी स्नेहयशाश्रीजी

रायपुर। न्यू राजेंद्रनगर स्थित महावीर जिनालय में चल रहे भव्य आध्यात्मिक चातुर्मास के दौरान साध्वी स्नेहयशाश्रीजी ने शुक्रवार को कहा कि हे वत्स तू क्यों चंचल बनता है। यह चंचलता तेरे विशाद का कारण बन...

12 August 2022
आज के मशीनरी युग में लोग मेहनत नहीं करते, जबकि कर्म से भी मिलता है धर्म का लाभ: साध्वी स्नेहयशाश्रीजी।

रायपुर। न्यू राजेंद्रनगर स्थित महावीर जिनालय में चल रहे भव्य आध्यात्मिक चातुर्मास के दौरान साध्वी स्नेहयशाश्रीजी ने शुक्रवार को कहा कि हे वत्स तू क्यों चंचल बनता है। यह चंचलता तेरे विशाद का कारण बन...

12 August 2022
रक्षाबंधन प्रेम, पवित्रता और मानवीय सुरक्षा का पर्व: राष्ट्रसंत ललितप्रभजी।

रायपुर, 11 अगस्त। ‘‘रक्षाबंधन प्रेम, पवित्रता और मानवीय सुरक्षा का पर्व है। आओ हम सब इसका तहेदिल से स्वागत करें। यह वो पर्व है जब एक भाई अपनी बहन के लिए असीम प्रेम को लुटाता है, दुनिया में भाई-बहन ...

11 August 2022
रक्षा से बना राखी शब्द, शास्त्रों में इसका अर्थ कर्तव्य का पालन है: साध्वी स्नेहयशाश्रीजी।

रायपुर। रक्षा शब्द से बना है राखी, शास्त्रों में इसका मतलब कर्तव्यों का पालन करना है। भाई मतलब सिर्फ खून का रिश्ता नहीं होता। भाई वह होता है जो सुहाता है, जो हम को भाता है। भाई अगर बहन को एक बार सा...

11 August 2022
एकता समाज की सबसे बड़ी ताक़त है: - राष्ट्रसंत ललितप्रभजी।

रायपुर -10 अगस्त। ‘‘ जहां संप यानि मेल-मिलाप होता है, वहीं पर संपत्ति रहती है। आज जब हम सामाजिक एकता की बात कर रहे हैं तो उस पुरानी कहावत को याद कर लें, बंद मुट्ठी लाख की और खुल गई तो खाक की। आदमी ...

10 August 2022
आम का पेड़ भी झुककर लोगों को मीठा फल देता है इसीलिए अहंकार छोड़ दीजिए: साध्वी स्नेहयशाश्रीजी।

रायपुर - अहंकार से आदमी में अकड़ आ जाती है, आम का पेड़ भी जब अकड़ कर रहता है, तो उसके फल खट्टे रहते है। मीठे फल देने के लिए भी उसे झुकना पड़ता है। जब वह झुकता है तब ही वह लोगों को फल देता है। किसी मंच ...

10 August 2022
इष्ट फल की प्राप्ति और मुक्ति का आधार है महामंत्र नवकार : राष्ट्रसंत ललितप्रभजी।

रायपुर, 9 अगस्त। इष्ट फल की प्राप्ति और मुक्ति का आधार है महामंत्र नवकार। जिस मंत्र के पहले, बीच में और अंत में कोई बीजाक्षर लगाने की जरूरत नहीं होती, जिसे ऊपर से बोल लो तो वही परिणाम और नीचे से शु...

09 August 2022
पाप छोड़ने से बड़ा कोई धर्म नहीं और इच्छा ही सबसे बड़ा पाप है: साध्वी स्नेहयशाश्रीजी

रायपुर। आप घर में सब्जी बनाते हो और उसे एक दिन में ही खत्म कर देते हो। वैसे ही आप अचार भी बनाते हो और वह महीनों तक चलता है। क्रोध और बैर भी इन्हीं की तरह होते हैं। क्रोध सब्जी की तरह होता है एक दिन...

09 August 2022
धर्म की पहली सीख-खुद भी सुख से जिओ, दूसरों को भी सुख से जीने दो: राष्ट्रसंत ललितप्रभजी।

रायपुर, 8 अगस्त। ‘‘धर्म हमेशा सुई-धागे की भांति आपस में जो टूटे हुए हैं उन्हें जोड़ने का काम करता है। इसीलिए हम सब लोगों को इस बात के लिए हमेशा अपने अंतर्मन को तैयार रखना चाहिए, कि हम कभी-भी धर्म, प...

08 August 2022
पाप और धर्म, दाेनों मन से शुरु होती है, लेकिन पाप आसान और धर्म उतना ही कठिन होता है: साध्वी स्नेहयशाश्रीजी।

रायपुर - न्यू राजेंद्रनगर स्थित महावीर जिनालय में भव्य आध्यात्मिक चातुर्मास के दौरान साध्वी स्नेहयशाश्रीजी ने सोमवार को कही। मग्नता के विषय पर उन्होंने कहा कि स्थिरता के बिना मग्नता नहीं आती और मग्...

08 August 2022

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