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राजधानी रायपुर

भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक महोत्सव में देशभर में हो रहा 1008 अट्ठम, राजधानी रायपुर में 108 से हुई शुरुआत।

रायपुर - न्यू राजेंद्रनगर स्थित महावीर जिनालय में तीन दिवसीय भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाया जा रहा है। जप-तप और साधना के क्रम में 3 से 5 अगस्त तक निमित्त अट्ठम किया जा रहा है। महाव...

03 August 2022
भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक महोत्सव में देशभर में हो रहा 1008 अट्ठम, राजधानी रायपुर में 108 से हुई शुरुआत।

*भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक महोत्सव में देशभर में हो रहा 1008 अट्ठम, राजधानी रायपुर में 108 से हुई शुरुआत* रायपुर। न्यू राजेंद्र नगर स्थित महावीर जिनालय में तीन दिवसीय भगवान पार्श्वनाथ का...

03 August 2022
भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक महोत्सव में देशभर में हो रहा 1008 अट्ठम, राजधानी रायपुर में 108 से हुई शुरुआत।

रायपुर - न्यू राजेंद्र नगर स्थित महावीर जिनालय में तीन दिवसीय भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाया जा रहा है। जप-तप और साधना के क्रम में 3 से 5 अगस्त तक निमित्त अट्ठम किया जा रहा है। महा...

03 August 2022
भगवान नेमिनाथ जन्मकल्याण उत्सव न्यू राजेंद्रनगर में धूमधाम से मनाया गया।

आज नेमिनाथ भगवान जन्म कल्याण उत्सव महावीर जिनालय न्यू राजेंद्र नगर में धूमधाम से मनाया गया, जिसके मुख्य लाभार्थी श्री फूलचंद जी मनिया भाई लुणावत परिवार तथा भगवान के माता पिता श्री सज्जन कुमार जी शा...

02 August 2022
मित्र एक चुनें पर जब भी चुनें हमेशा नेक चुनें- राष्ट्रसंत ललितप्रभजी।

रायपुर, 2 अगस्त। ‘‘मित्र एक चुनें पर जब भी चुनें हमेशा नेक चुनें। आदमी की जिंदगी का निर्माण विचारों के आधार पर होता है। वातावरण को महका देता है जैसे इत्र, और जिंदगी को महकाता है एक अच्छा मित्र। एक ...

02 August 2022
मित्र एक चुनें पर जब भी चुनें हमेशा नेक चुनें- राष्ट्रसंत ललितप्रभजी - आज प्रवचन ‘परिवार की खुशहाली के 5 टिप्स’ विषय पर रायपुर, 2 अगस्त। ‘‘मित्र एक चुनें पर जब भी चुनें हमेशा नेक चुनें। आदमी की जिंदगी का निर्माण विचारों के आधार पर होता है। वातावरण को महका देता है जैसे इत्र, और जिंदगी को महकाता है एक अच्छा मित्र। एक अच्छा मित्र मिल जाए तो आदमी के जीवन में उुंचाइयां चढ़ जाती हैं और यदि गलत रास्ते पर चलने वाला एक दोस्त मिल जाए तो आदमी कहां तक गिरेगा, इसका कोई पता नहीं लगता। दुनिया में मित्रों ने ही वक्त बुरा पड़ने पर आदमी का साथ निभाया है और दुनिया में ऐसे दोस्त भी आ जाते हैं जो आदमी की जिंदगी में बुरा वक्त लाकर खड़ा कर देते हैं। इसीलिए पत्नी का चयन करो तो कितनी सावधानी की जरूरत होती है, उससे ज्यादा जरूरत होती है दोस्त का चयन करने में। क्योंकि गलत स्वभाव की पत्नी आ गई तो आपको दुखी करेगा और यदि गलत स्वभाव का दोस्त आ गया तो वह आपकी सात पीढ़ी को नर्क बनाकर छोड़ेगा। अगर एक गलत स्वभाव वाला एक दोस्त आपके परिवार के किसी एक व्यक्ति का मित्र बन गया तो पूरा परिवार तहस-नहस हो जाएगा।’’ ये प्रेरक उद्गार राष्ट्रसंत महोपाध्याय श्रीललितप्रभ सागरजी महाराज ने आउटडोर स्टेडियम बूढ़ापारा में जारी दिव्य सत्संग ‘जीने की कला’ के अंतर्गत परिवार सप्ताह के द्वितीय दिवस मंगलवार को ‘किसे बनाएं मित्र की अच्छा रहे चरित्र’ विषय पर व्यक्त किए। अहिंसा व करूणा के अवतार भगवान श्रीनेमीनाथजी के जन्मकल्याणक के पावन प्रसंग पर राष्ट्र्संत चंद्रप्रभजी रचित विश्वप्रसिद्ध भजन ‘जहां नेमी के चरण पड़े, गिरनार की धरती है, वो प्रेम मूर्ति राजुल, उस पथ पर चलती है...’ का भावपूर्ण गायन करते हुए संतप्रवर ने भगवान के जीवन चरित्र से मूक पशुओं व प्राणियों को अभयदान देने की प्रेरणा प्रदान की। उन्होंने कहा कि अभयदान से बढ़कर इस दुनिया में कोई दान नहीं होता। तीन बड़े नसीब से मिलते हैं- अच्छी पत्नी, अच्छी संतान और अच्छा दोस्त संतश्री ने कहा कि ढाई अक्षर के तीन शब्द हैं- धर्म, मित्र और प्रेम। ये तीन अगर इंसान को अच्छे मिल जाएं तो आदमी की जिंदगी रौशन हो जाती है। ये तीन अतुलनीय शब्द हैं, अगर इंसान इनका सही चयन कर ले जिंदगी पार लग जाती है। तीन चीजें आदमी को बड़े नसीब से मिलती हैं- एक अच्छी पत्नी, एक अच्छी संतान और एक अच्छा दोस्त। पत्नी के चयन में परिवार का हाथ होता है, एक अच्छी संतान को देने में भगवान का हाथ होता है पर एकमात्र मित्र है जिसका चयन आप खुद करते हैं। पानी पियो छान के और मित्र बनाओ अच्छी तरह जान के। पिता अगर गलत राह पर चल रहा है तब भी संतान को खतरा नहीं, क्योंकि उसका पिता यही चाहेगा कि मेरा बेटा कभी गलत राह पर न चले पर एक मित्र अगर गलत राह पर चल रहा है तो यह मानकर चलो कि वह एक दिन आपको भी गलत राह पर ले जाएगा। आप अगर अपनी लड़की के लिए लड़का देखने जा रहे हैं तो सावधान, लड़के का पता मत कीजिए कि वो कैसा है, आप बस इतना सा पता कर लीजिए कि उसके दोस्त कैसे हैं, बस वह वैसा ही होगा। क्योंकि जैसा आदमी का मित्र होगा, वैसा ही उसका चरित्र होगा। चरित्र को ठीक करना है तो मित्रों को ठीक बनाइए और मित्रों को ठीक करना है तो अपने चरित्र को ठीक बनाइए। जैसा आदमी का चरित्र होता है वो वैसा ही मित्र ढूंढता है और जैसे आदमी के जीवन में मित्र होते हैं वैसा ही उसका चरित्र होता है। एक बात यह है कि कौन आदमी कैसा है, अगर यह पता करना है तो पहले ये पता कर लो कि उसके मित्र कैसे हैं, आपको उसका चरित्र का पता चल जाएगा। चरित्रवान-संस्कारशील मित्र मिलना बड़ी उपलब्धि है संतप्रवर ने आगे कहा कि एक चरित्रवान, संस्कारशील मित्र मिलना आपके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। क्योंकि आपको वह हमेशा उुंचाई के रास्ते पर लेकर जाएगा। मैं बताना चाहता हूं, आदमी जब अपनी माँ की भी नहीं सुनता है, पिता की भी नहीं सुनता है तब भी आदमी मित्र की सुन लेता है। अगर आप सुंदर और संपन्न नहीं हैं, तब भी अगर आपका कोई मित्र बनने आ रहा है तो मित्रता हाथ आगे बढ़ा लें, पर अगर आप सुंदर हैं और संपन्न हैं तब कोई आपसे मित्रता करने हाथ बढ़ा रहा है तो सावधान, हो सकता है वह कुछ और देख कर आपके पास आ रहा हो, उसे पहले जान लो फिर मित्र बनाओ। भगवान ने हमें अमूल्य मंत्र दिया है- सव्वेसु मैत्री। ऐसे व्यक्ति से मित्रता स्थापित करो जो सभ्य हो, निर्मल बुद्धि का व्यक्ति हो, उसकी न तुम्हारी चमड़ी पर नजर हो और न पैसे पर नजर हो। घर-परिवार में बेटे-बेटियों की संगत कैसी है, इस ओर माँ-बाप, अभिभावकों को ध्यान देना आवश्यक है। जितना बच्चों को प्यार-दुलार देते हैं, उतना ही अंकुश और अनुशासन होना भी जरूरी है। जो अपने हाथों से लगाम छोड़ देते हैं उनकी जिंदगी भी हाथों से निकल जाया करती है। हमें नियंत्रण करना होगा, देखना पड़ेगा, बेटा हमारा किन दोस्तों के बीच रह रहा है। यदि वह किसी एक गलत आदतों वाले दोस्त के साथ है तो उसे आपको रोकना होगा। मित्रता हो तो मोमबत्ती और धागे की जैसी संतश्री ने कहा कि याद रखें सीढ़ियों से चढ़ने वाले यानि सही रास्ते से चलने वाले लोग भले देर से उुपर पहुंचते हैं, पर पहुंचते जरूर हैं। और सीधे छलांग लगाने वाले लोग न नीचे के रहते हैं और न उुपर के। और एक दिन अपने परिवार को सड़क पर लाकर खड़ा कर देते हैं। धीरज, धरम मित्र और नारी आपतकाल पडे़ ये चारी। मित्र बनाओ तो ऐसा बनाओ जैसा मोमबत्ती और धागा होता है। धागा जले तो मोम पिछले और मोम पिघले तो धागा जले। मित्र ऐसा कीजिए जो ढाल सरीखा होय, दुख में जो आगे रहे और सुख में पीछे होय। मित्र बनाओ तो ऐसा बनाओ जैसा कृष्ण ने सुदामा को बनाया। क्या जरूरत है नजारों की और क्या जरूरत है तारों की, जब एक अच्छा दोस्त जीवन में मिल गया तो क्या जरूरत है हजारों की। मूर्ख, स्वार्थी व चापलूस से न बढ़ाएं दोस्ती का हाथ संतप्रवर ने कहा कि उन संतों पर गौरव करो, जो निष्ठा, नैतिकता, संयम से जीवन जीते हैं। तो जरा सोचो कि आप लोग श्रेष्ठ जीवन के लिए जरा संयम भी नहीं रख सकते। मंदिर जाने, पूजा करने से पहले जरूरी यह है कि आदमी व्यसनमुक्त रहे। हर व्यक्ति की जिंदगी में तीन तरह के दोस्त आया करते हैं। उन तीनों से आदमी को बचना चाहिए, उनमें पहला है मूर्ख मित्र, दूसरा- स्वार्थ मित्र और तीसरा चापलूस मित्र। मूर्ख, स्वार्थी और चापलूस को कभी अपना मित्र न बनाओ। मित्रता हो तो हाथ और आंख जैसी हो, हाथ में चोट लग जाए तो आंख में आंसू आ जाएं और आंख में आंसू आएं तो हाथ उन्हें पोंछने उठ जाए। दोस्ती में सम्मान, आपसी समझ, समानता, विश्वास, सहयोग की भावना और नेकनियती चाहिए। सौ-सौ फालतू के दोस्त इक्ट्ठा करने की बजाय एक सही दोस्त को साथ रखना ज्यादा अच्छा है। क्योंकि हजार तारे मिलकर भी आसमान में उजाला नहीं कर सकते, जो उजाला एक चाँद कर देता है। भगवान करे आपके जीवन में ऐसा कोई मित्र आए जैसा कि कृष्ण को सुदामा मिले और सुदामा को कृष्ण। आखिर में संतश्री ने कृष्ण-सुदामा की इतिहास की अमर मित्रता पर लोकप्रिय भजन- अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो... की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। ये दुगुर्ण जिनमें हों उन्हें ना बनाएं मित्र सात प्रकार के दुर्गुणों वालों को मित्र न बनाने की सीख देते हुए संतश्री ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को कभी भी मित्र न बनाएं, जिसकी जिंदगी में गलत आदतें हों, जो दूसरों को तो धोखा दे रहा हो और आपके साथ वफादारी दिखा रहा हो, जो माता-पिता का सम्मान न करता हो-उनका तिरस्कार करता हो, जो हमेशा निराशावादी हो-हमेशा नेगेट्वि सोचता हो, जो अपने गलत कार्यों में आपको भी भागीदार बनाना चाहता हो, ऐसे लोगों से बचो जिनके खान-पान का आपके साथ तालमेल न हो, जो आपके धन को ही महत्व देता हो, जिसने किसी एक के दिल को रखने के लिए दो का दिल दुखाया हो। जन्म-मरण का मूल है मोहः डॉ. मुनि शांतिप्रियजी दिव्य सत्संग के पूर्वार्ध में डॉ. मुनिश्री शांतिप्रिय सागरजी ने भगवान श्रीमहावीर की वाणी से प्रवचन का शुभारंभ करते हुए कहा कि राग और द्वेष कर्म के बीज हैं, कर्म मोह से उत्पन्न होता है, मोह जन्म-मरण का मूल है और जन्म-मरण को ही दुख का मूल कहा जाता है। अर्थात् दुखों का मूल कारण है राग और द्वेष। भगवान ने हमें राग और द्वेष को जीतने की प्रेरणा दी है। हमें अपने जीवन में द्वेष या नफरत को जरूर जीत लेना चाहिए। प्रेम और क्षमा से जीवन में सुखों की बगिया खिलती है। यह जीवन तो सुधरता ही है आने वाले जीवन भी सुधर जाते हैं। हम अपने दिमाग में हमेशा प्रेम और मैत्री का चैनल चलाएं। जीवन में मित्र को एक भी ऐसा मौका मत दो कि वह हमारा दुश्मन बन जाए, पर दुश्मन को हजार मौके दो कि कभी वह हमारा मित्र बन जाए। इन अतिथियों ने प्रज्जवलित किया ज्ञानदीप श्रीऋषभदेव मंदिर ट्र्स्ट के अध्यक्ष विजय कांकरिया, कार्यकारी अध्यक्ष अभय भंसाली, ट्र्स्टीगण तिलोकचंद बरड़िया, राजेंद्र गोलछा व उज्जवल झाबक ने संयुक्त जानकारी देते बताया कि मंगलवार की दिव्य सत्संग सभा का शुभारंभ अतिथि गण राजेंद्र बैदकुमारी, शाहजी माय एफ परिवार रायपुर, पार्षद श्रीमती सीमा कंदोई, मुकेश कंदोई, मोहन गोलछा नगरी, आदेश, संजय देशमुख द्वारा ज्ञान का दीप प्रज्जवलित कर किया गया। अतिथि सत्कार दिव्य चातुर्मास समिति के अध्यक्ष तिलोकचंद बरड़िया, श्रीऋषभदेव मंदिर ट्र्स्ट के कार्यकारी अध्यक्ष अभय भंसाली, पीआरओ समिति के स्वागताध्यक्ष कमल भंसाली, महावीर तालेड़ा व मनोज कोठारी द्वारा किया गया। सभी अतिथियों को श्रद्धेय संतश्री के हस्ते ज्ञानपुष्प स्वरूप धार्मिक साहित्य भेंट किये गये। सूचना सत्र का संचालन चातुर्मास समिति के महासचिव पारस पारख ने किया। आज प्रवचन ‘परिवार की खुशहाली के 5 टिप्स’ विषय पर दिव्य चातुर्मास समिति के अध्यक्ष तिलोकचंद बरड़िया, महासचिव पारस पारख, प्रशांत तालेड़ा, कोषाध्यक्ष अमित मुणोत व स्वागताध्यक्ष कमल भंसाली ने बताया कि बुधवार, 3 अगस्त को सुबह 8ः45 बजे से दिव्य सत्संग के अंतर्गत परिवार सप्ताह के तृतीय दिवस ‘परिवार की खुशहाली के 5 टिप्स’ विषय पर प्रवचन होगा। श्रीऋषभदेव मंदिर ट्रस्ट एवं दिव्य चातुर्मास समिति ने श्रद्धालुओं को चातुर्मास के सभी कार्यक्रमों व प्रवचन माला में भाग लेने का अनुरोध किया है। खेमराज बैद प्रिंट मीडिया प्रभारी दिव्य चातुर्मास प्रचार-प्रसार समिति

रायपुर, 2 अगस्त। ‘‘मित्र एक चुनें पर जब भी चुनें हमेशा नेक चुनें। आदमी की जिंदगी का निर्माण विचारों के आधार पर होता है। वातावरण को महका देता है जैसे इत्र, और जिंदगी को महकाता है एक अच्छा मित्र। एक ...

02 August 2022
गाड़ी वाले को जैसे आप हर दिन कचरा देते हो वैसे ही प्रतिदिन मन की गंदगी भी निकालो: साध्वी स्नेहयशाश्रीजी

रायपुर। रायपुरवासी हर दिन शुबह अपने घर के सामने कचरे का डिब्बा निकाल कर रख देते हैं। फिर एक गाड़ी आती है जिसमें गाना बजता है- गाड़ी वाला आया घर से कचरा निकाल आैर वह उस डब्बे के कचरे को गाड़ी में ले...

02 August 2022
गाड़ी वाले को जैसे आप हर दिन कचरा देते हो वैसे ही प्रतिदिन मन की गंदगी भी निकालो: साध्वी स्नेहयशाश्रीजी

रायपुर। रायपुरवासी हर दिन सुबह अपने घर के सामने कचरे का डिब्बा निकाल कर रख देते हैं। फिर एक गाड़ी आती है जिसमें गाना बजता है- गाड़ी वाला आया घर से कचरा निकाल आैर वह उस डब्बे के कचरे को गाड़ी में ले...

02 August 2022
गाड़ी वाले को जैसे आप हर दिन कचरा देते हो वैसे ही प्रतिदिन मन की गंदगी भी निकालो :- साध्वी स्नेहयशाश्रीजी

रायपुर। रायपुरवासी हर दिन शुबह अपने घर के सामने कचरे का डिब्बा निकाल कर रख देते हैं। फिर एक गाड़ी आती है जिसमें गाना बजता है- गाड़ी वाला आया घर से कचरा निकाल आैर वह उस डब्बे के कचरे को गाड़ी में ले...

02 August 2022
गाड़ी वाले को जैसे आप हर दिन कचरा देते हो वैसे ही प्रतिदिन मन की गंदगी भी निकालो :- साध्वी स्नेहयशाश्रीजी

रायपुर - रायपुरवासी हर दिन सुबह अपने घर के सामने कचरे का डिब्बा निकाल कर रख देते हैं। फिर एक गाड़ी आती है जिसमें गाना बजता है- गाड़ी वाला आया घर से कचरा निकाल आैर वह उस डब्बे के कचरे को गाड़ी में ल...

02 August 2022

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