रायपुर - टैगोर नगर के श्री लालगंगा पटवा भवन में रविवार को धन वर्षा हुई थी। मौका था सैकड़ों गौतम लब्धि कलश में बीते डेढ़ साल से जमा हो रही दान की रकम को इकट्ठा करने का। इन पैसों से अब समाज के जरूरतमंदों की शिक्षा, इलाज, रोजगार में मदद की जाएगी। दान का ये महानुष्ठान उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने संपन्न कराया।
प्रवचन में उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने कहा, साधक की पहचान क्या है? जैसा अंदर है, वैसा ही बाहर रहे। जैसा बाहर है, वैसा अंदर रहे। जिसके पास दो चेहरे न हों। सिंगल फेस। सिंगल कैरेक्टर। प्रॉब्लर्म कहां से शुरू होती है? परिस्थिति से नहीं। हमारे डबल कैरेक्टर से। ये प्रसिद्ध है कि रावण के पास 10 सिर थे। राम के पास एक ही सिर था। जीता कौन? सिंगल ब्रेन या दस माइंड वाला? भगवान महावीर का चरण चिन्ह शेर है। शेर सिंगल माइंड का होता है। उसके दो चेहरे नहीं होते। जब डबल कैरेक्टर नहीं होता है तो जीना आसान हो जाता है। बच्चा आराम से जीता है क्योंकि वह जैसा है, वैसे ही जीता है। निर्मलता उसी के जीवन में आती है जो सरल है। धर्म वही टिकता है जो सरल होता है। शकुनि के पास जुआ खेलने की कला है। वह किसी को हरा सकता है। लेकिन, शकुनि जिंदगी की बाजी कभी नहीं जीत सकता। रिश्तों में पारदर्शिता होनी चाहिए। सच को कितना भी छिपा लो, पता चल ही जाता है। जब सच किसी और से पता चलता है तो भरोसे के साथ रिश्ता भी टूट जाता है।
छिपाने का गणित लोगों सियार बना सकता तो।
छिपाने का गणित ही किसी व्यक्ति को सियार बनने पर मजबूर करता है। बिना छिपाए राजनीति नहीं चलती। छुपाकर धर्म नहीं चलता। गांधीजी और दूसरे क्रांतिकारियों में कोई फंडामेंटल फर्क था तो दूसरे क्रांतिकारी बातें छिपाकर रखते थे। गांधीजी सब ओपन रखते थे। चर्चिल ने भी खुद कहा था, मुझे किसी से डर लगता है तो वह पतला-दुबला आदमी है। वो गांधी है।