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माता-पिता या गुरुवर आपके प्रगति पर संकोच करें तो उस राह का त्याग करें : साध्वी शुभंकरा श्रीजी

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रायपुर - एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में शनिवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि जब व्यक्ति का अंतिम समय आ जाता है, तो वह भगवान को याद करने लगता है। यह भी सौभाग्य की बात होती है कि किसी को अंतिम समय में प्रभु को याद करने का अवसर मिल जाता हैं। कुछ लोग तो ऐसे भी होते हैं, जिन्हें अंतिम समय में मंत्रों का जाप भी कंझट लगने लगता है। सोचिए जी आपको ऐसा अवसर ना मिले इसलिए हर रोज हमें प्रभु की आराधना करनी चाहिए। साध्वीजी कहती है कि अगर हम प्रगति करते हैं और वह हमारे माता पिता और गुरुजनों को पसंद नहीं आता, तो उस रास्ते का हमें त्याग कर देना चाहिए। उन्हें धर्म आराधना पसंद होती है और वह अपने बच्चों को भी उसी राह पर चलने कहते हैं। लेकिन अब वे आपका कहना नहीं मानते हैं, क्योंकि जब आपको उन्हें धर्म स्थान पर लाना था तब आपने उंगली पकड़कर उन्हें सिनेमा, वाटर-पार्क और पिकनिक जैसी जगहों पर ले गए। अब बड़ी उम्र में आप उन्हें धर्मस्थान पर चलने कहोगे तो वे आपकी बात नहीं मानेंगे। क्योंकि संस्कार देने के समय आपने उन पर ध्यान नहीं दिया उन्हें लाड प्यार किया। अब आप कहते हो कि वह आपकी बात नहीं मान रहे है। ठीक है, लेकिन अब बच्चों का यह कर्तव्य है कि वे अपने माता पिता के कहने पर अपना रास्ता बदल लें। साध्वीजी कहती है कि यदि माता-पिता धर्म के लिए मना करते हैं, तो आप उनका विरोध कर सकते हैं। कोई बच्चा दीक्षा लेना चाहे और माता पिता उन्हें मना करें तो भी विरोध किया जा सकता है। जब बच्चे शादी के लायक हो जाते हैं तो कितने माता-पिता ने उनसे पूछा कि तुम शादी करना चाहते हो या संयम अपनाना चाहते हो। किधर है माता पिता ने अपनी बेटी से पूछा कि तुम्हें रानी बनना है या दासी। आज आपने संसार का अनुभव लिए है उसके आधार पर आपने कभी अपने बच्चों को सांसारिक जीवन में रहने से मना नहीं किया। जैसे बच्चे शादी को तैयार होते हैं, आप झट से उनका बायोडाटा बनाकर शादी के लिए वर वधु की तलाश करना शुरू कर देते हो। शादी की बात हो तो आप अपने बच्चों की परीक्षा नहीं लेते हो और जब संयम लेने का अवसर आता है तो आप उनका परीक्षण करते हो। आपने कभी अपनी बच्ची को ससुराल का भय नहीं दिखाया कि तुम्हें ससुराल जाकर काम करना पड़ेगा, सास-ससुर का सम्मान करना पड़ेगा, रिश्ते निभाने होंगे लेकिन आप संयम मार्ग पर जाने वाले बच्चों को भयभीत करते हैं कि वहां तो आपको बाल लोचने होंगे, पैदल चलना होगा और भी बहुत कुछ...

कलश एवं अखंड दीपक की हुई स्थापना।

मनोहरमय चातुर्मास समिति के अध्यक्ष श्री सुशील कोचर और महासचिव श्री नवीन भंसाली ने बताया कि एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी में शनिवार को हर्षोल्लास एवं मंत्रोच्चारण के साथ परम पूज्य साध्वी शुभंकरा श्रीजी म.सा. आदि ठाणा 4 की पावन मिश्रा में आज अक्षय निधि, समवसरण तप एवं कषाय विजय तप का प्रारंभ कलश एवं अखंड दीपक स्थापना के साथ हुआ। 27वें श्री नवकार दरबार का कल होंगा भव्य आगाज। दादाबाड़ी में 27वें श्री नवकार दरबार का भव्य आगाज 6 अगस्त से होने जा रहा है। मनोहरमय चातुर्मास 2023 की श्रृंखला में नवकार जपेश्वरी परमपूज्य शुभंकरा श्रीजी म.सा. की पावन निश्रा में दरबार के पावनकारी प्रथम दिवस 6 अगस्त रविवार को दादाबाड़ी में कालसर्प दोष निवारण एवं नवग्रह दोष निवारण पूजा होगी। दरबार संबंधित जानकारी के लिए स्वरूप सकलेचा से 7999578437 पर संपर्क किया जा सकता है।

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