नगपुरा (दुर्ग) - सत्य का पालन करना भी मानव जीवन का एक महाव्रत है। सत्य का पालन करना सबसे बड़ा धर्म जब! मन-वचन-कर्म द्वारा की गई सत्य क्रिया को ही तप कहते हैं! जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सत्य का विशेष महत्व है, क्योंकि झूठ के बराबर दूसरा कोई पाप नहीं है। सच की महिमा अपरम्पार है, जबकि झूठ ज्यादा दिन तक नहीं चलता, आज नहीं तो कल पकड़ा जाता है। सत्य को बनाए रखने की जरूरत नहीं होती। अगर आपको झूठ का जाल बुनना है तो आपको बहुत कुछ करना पड़ता है। उक्त उदगार तपोभूमि श्री उवसग्गहरं पार्श्व तीर्थ नगपुरा में चातुर्मासार्थ विराजित विदूषी साध्वी श्री मुक्तिप्रिया श्री जी म.सा. ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
प्रवचन श्रृंखला में उन्होंने कहा कि सत्यवादी मनुष्य का हृदय दर्पण की भांति स्वच्छ होता है। वह अपनी बात को निर्भिकता तथा आत्म विश्वास के साथ दूसरों के समक्ष प्रस्तुत करता या, क्योंकि उसके हृदय में झूठ पकड़े जाने का भय नहीं होता है। धर्मग्रंथ कहते है कि हमें सदैव सत्य बोलना चाहिए लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जो दूसरों का दुख पहुँचाये ऐसा सत्य भी न बोलें !! सत्य बोलने वाला व्यक्ति विनयी, साहसी और चरित्रवान होता है। सत्य का स्वरूप बहुत ही विस्तृत एवं महान होता है। झूठ बोलकर धोखा देकर थोड़े समय के लिए सफलता अवश्य प्राप्त की जा सकती है लेकिन झूठ पकड़े जाने पर उसे सबके सामने अपमानित होना पड़ता है! झूठ बोलने वाले का कोई चरित्र नहीं होता है। एक झूठ को सही साबित करने के लिए एक झूठ के पीछे-पीछे अनेकों बार झूठ का सहारा लेना पड़ता है। सत्य बोलने वाला जहाँ निर्भिक रहता है यहीं झूठ बोलने वाला व्यक्ति सदैव चिन्ताओं से घिरा रहता है, भयग्रस्त रहता है, अनहोनी से आशंकित रहता है और जीवन को एक बोझ की भांति वहन करता है। झूठ बोलने की आदत न केवल नैतिक तौर पर व्यक्ति का पतन करता या, बल्कि मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए भी नुकसानदायक है। बहुतायत देखने को मिलता है कि अनावश्यक एवं अप्रासंगिक रूप से झूठ का प्रयोग होता है झूठ को स्वीकार कर पश्चाताप की भावना रखने से जीवन सत्य मार्ग की ओर प्रशस्त होता है वहीं भूल को छुपाने के लिए झूठ का सहारा जीवन को मानसिक अवसाद को निराशा के पथ की ओर ले जाता है। अपनी भूल को असत्य आवरण से सुरक्षित करने के लिए झूठ और क्रोध का आलम्बन लेने से व्यक्ति एकाकी हो जाता है,अव्यावहारिक हो जाता हैं, अविश्वसनीय हो जाता है और अपने लक्ष्य से भटक जाता है।
धर्मसभा में पूणे अहमदाबाद, चेन्नई, मुम्बई आदि स्थानों के तीर्थ यात्री उपस्थित थे। सभा में परम तीर्थभक्त श्री भरत भाई जैन नेल्लूर का तीर्थ प्रबंधन की ओर से अभिनंदन किया गया।