रायपुर - एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला में रविवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कहा कि संसार का सारा चक्र शक्ति द्वारा चलता है। यह शक्तियां धन बल, मिथ्या बाल, क्रिया बल जैसे बलों से संचालित होती है। इन सभी में सबसे शक्तिशाली एवं सर्वोपरि कर्म बल है। इतिहास साक्षी है कि पांच पांडवों के पास शक्ति, धन, बल सब कुछ था फिर भी वह वनवास में रहे। महावीर स्वामी को 400 दिनों तक आहार नहीं मिला। शरद कुमार चक्रवर्ती क्षण भर में 16 बीमारियों से ग्रसित हो गए। 18 देश के महाराज कुमारपाल राजा को बेटे ने जेल में डाला और इतना ही नहीं हर दिन 500 कोड़े भी मारे। यह कर्म हमें क्या-क्या नहीं दिखाता, साधारण व्यक्ति को अभिनेता बना देता है। आप सोचिए कि कोई चाय बेचने वाला इंसान प्रधानमंत्री तक का सफर भी तय कर सकता है और कोई पूरे बॉडीगार्ड के साथ चले तो भी उसे एक गोली आकर लग सकती है। हम समझ नहीं सकते इस लीला को क्योंकि इन पर कर्म हावी होता है।
एक श्रावक ने गुरु से पूछा कि कर्म में अनंत शक्ति होती है और आत्मा में भी अनंत शक्ति होती है लेकिन दोनों में फर्क क्या है, किसमें ज्यादा है और किसमें कम। गुरु कहते हैं कि अध्यात्म से हमें शक्ति मिलती है और कर्म से प्रयोग किए जाते है और प्रयोग ही सफल होता है। आज हम शोरूम, बैंक आदि में स्ट्रांग रूम देखते हैं। इन स्ट्रांग रूम में चारों और लोहे की दीवार होती है। अब आप बताइए कि एक तरफ लोहा है और दूसरी तरफ पानी है दोनों में शक्तिशाली कौन है। दिखने में तो लोहा बहुत कठोर और बलवान लगता है और पानी को आप देखो तो वह बहुत ही लचीली और सारे आकार में ढल जाने वाली होती है। अगर लोहे में पानी पड़ जाए तो उसमें जंग लग जाता है और वह निर्बल हो जाता है। वैसे ही कर्म बल लोहे के समान होता है और आत्मा का कर्म बल पानी के समान होता है।
साध्वीजी ने बताया कि एक बकरी का टोला जंगल में चरने जाता है और उसमें से एक बच्चा बिछड़ जाता है और जंगल में घूमते-घूमते वह शेरों की टोली में शामिल हो जाता है। दिन बीत जाते हैं वह बकरी का बच्चा शेरों के साथ ढलने लगता है। एक दिन जब वह पानी पीने जाते हैं उसे दिन झील का पानी बिल्कुल शांत रहता है और उसमें बकरी का बच्चा परछाई देखता है और तुलना करता है कि यह तो कोई और है और मैं इनसे अलग हूं। फिर कुछ दिन बाद एक बकरी के बच्चे को गरजने की आवाज सुनाई देती है। उस आवाज को सुनकर वह भी वैसी ही आवाज निकालने की कोशिश करता है। पहले धीरे फिर थोड़ा जोर से फिर बहुत जोर से, ऐसा करते-करते वह शेरों जैसी आवाज निकालने लग जाता हैं। वह इतनी जोर से गरजता है कि पास से गुजर रहे बकरियों की टोली उससे डर कर भाग जाती है। हमारी आत्मा भी शेर की बकरी की तरह बनी हुई है और सत्संग के माध्यम से हम अपनी आंखें खोल सकते हैं। आपके अंदर भी सिंहत्व की भावना कैसे जागृत हो, इसकी पहचान आपको स्वयं करनी होगी। कर्म कितना भी बलवान हो लेकिन सर्वशक्तिमान नहीं हो सकता पर आत्मा है। भगवान से प्रार्थना करो कि आपकी आत्मा में भी सिंहत्व आ जाए।
मनोहरमय चातुर्मास समिति के अध्यक्ष श्री सुशील कोचर और महासचिव श्री नवीन भंसाली ने बताया कि मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन 2023 ललित विस्त्रा ग्रंथ पर आधारित है। नवकार जपेश्वरी परम पूज्य शुभंकरा श्रीजी आदि ठाणा 4 के मुखारविंद से सकल श्री संघ को जिनवाणी श्रवण का लाभ दादाबाड़ी में मिल रहा है। साथ ही उन्होंने नगरवासियों से साध्वीजी के मुखारविंद से जिनवाणी का श्रवण करने का आग्रह किया है।