रायपुर - पर्युषण पर्व, मन के प्रदूषण को मिटाने के लिए आता है। व्यक्ति के मन के भीतर पलने वाला पहला प्रदूषण है बैर-विरोध का प्रदूषण। दूसरा है- मन में लगी हुई द्वेष की गांठ। जिस आदमी के मन में गांठ बंध जाती है, उसकी जिंदगी रसमय होकर भी नीरस हो जाती है। जैसे मीठे रस से भरे हुए गन्ने में जहां-जहां गांठें होती है, वहां-वहां उसमें रस नहीं होता। आदमी कितना जबरदस्त है कि वह टूटने तैयार हो जाता है पर वह झुकने तैयार नहीं होता। याद रहे हम अरिहंतों की संतानें हैं तो इतने कमजोर भी नहीं हो सकते कि हम झुकने को भी तैयार न हों। अगर भूल-चूक कर भी आपकी किसी से बोलचाल बंद हो तो आज उस गांठ को खोल दें। उसका सर हमसे बड़ा होता है जो हमारे सामने झुका होता है। याद रखें कि अगर आपने रात को सोने से पहले किसी की एक गलती को माफ कर दिया तो भगवान आपकी अगली सुबह होने से पहले ही आपकी सौ गलतियां माफ कर देता है। यह बातें एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला के दौरान पर्युषण पर्व के दूसरे दिन सोमवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कही।
प्रवचन के दौरान श्रावक के 11 कर्तव्यों के बारे में बताते हुए साध्वी जी ने संघ पूजा, साधार्मिक भक्ति, तीन रथ यात्रा, छहरी पालित संघ, स्नात्र पूजा, देव द्रव्य की वृद्धि, महापूजन, सूत्र भक्ति, ज्ञान-पूजा, रात्रि भक्ति, उद्यापन, उजामना, शासन प्रभावना, आत्मशुद्धि और आलोचना पर व्याख्यान दिया। साध्वीजी ने आगे कहा कि कोई आपसे खाने के लिए पैसे मांगे तो आप उसे 50-100 रुपए दे देते हो। वह आपके दिए हुए पैसे से अपनी दो वक्त की भूख तो मिटा लेता है लेकिन अगले दिन फिर वह लोगों से पैसे मांगने लगता है। इसलिए आप किसी जरूरतमंद को पैसे ना देकर उनकी आजीविका की व्यवस्था करें ताकि उसे किसी से पैसे नहीं मांगना पड़े और वह खुद ही अपना छोटा-मोटा व्यवसाय स्थापित कर
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साध्वीजी कहती है कि पर्युषण पर्व आपको अपने मन को विशाल और उदार बनाता है। आपके घर में काम करने वाली बाई या ऑफिस में काम करने वाला आपका कर्मचारी अगर आपसे पैसे मांगे तो आप बिना संकोच उन्हें पैसे दे दीजिए क्योंकि वह जरूरत आने पर पैसे मांग रहा है। उधार देकर बिल्कुल भी ऐसा मत करना कि उसकी उधारी आप उसी के तनख्वाह से काट रहे हैं। आपकी दी हुई तनख्वाह से उनका घर चलता है और आपकी उधार से उनकी जरूरतें पूरी होती है। कई बार वे लोग पैसे चुकाने में असमर्थ हो जाते हैं और उनकी वह स्थिति नहीं रहती कि वह आपको रुपए लौटा सकें तो कभी भी उनकी तनख्वाह मत काटना और उस उधार को माफ कर देना। ऐसा करके भी आप साधार्मिक भक्ति का लाभ ले सकते हैं। आप नदी पार करते हुए उसमें अपनी स्वेच्छा से फूल या सिक्के डाल देते हैं क्योंकि वह आपको पीने के लिए शीतल जल प्रदान करती है। आप सूर्य को नमस्कार करते हैं क्योंकि वह आपको उजाले की किरण के साथ ऊर्जा देता है। सुबह जब अपने दुकान जाते हैं तो दुकान की सीढ़ियों को आप प्रणाम करते हैं क्योंकि वहां आपकी आजीविका का केंद्र है और आपको आय का साधन प्रदान करता है। ऐसा ही समझ कर कि वह आपके सहयोगी हैं, आप उस उधार को माफ कर दीजिएगा।
साध्वीजी कहती है कि बंधे हुए कर्मों को तोड़ना और नए कम ना बंधे, यह जिनवाणी की निरंतर प्रेरणा है। अपने कर्म चक्र को चलाते रहना है या उसे तोड़ना है, यह आप पर निर्भर करता है। जो हमारा भूत है, इस पर हमारा वर्तमान निर्भर करता है और जो वह हमारा वर्तमान है इस पर हमारा भविष्य निर्भर करता है। आपको हमेशा यह चिंता सताती रहती है कि हमारी आखिरी सांस तक जब हम बूढ़े हो जाएंगे, बीमार हो जाएंगे तो हमें कौन संभालेगा। हमारा भविष्य भी हमारे हाथ में है। जिस उम्र में हमें सीखना था, हमने मौज मस्ती कर उस समय को व्यतीत कर दिया। जब पिता कहते थे कि दुकान में बैठकर सीखो, तो आपने नहीं किया। कुछ ऐसे बच्चे भी होते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होती फिर भी वह कुछ काम कर अपनी आगे की पढ़ाई पूरी कर लेते हैं और बाकी सारे बच्चों से वह आगे बढ़ जाते हैं। जबकि यह उम्र खेलने कूदने और शारीरिक विकास के लिए होती है। जब कोई बड़े हमसे कुछ कहते तो वह अपना अनुभव हमारे साथ साझा करते हैं और हम उसे नजरअंदाज कर देते हैं, फिर हमें बाद में प्रायश्चित करना पड़ता है कि हमने उनकी बात पहले क्यों नहीं सुनी, क्यों नहीं मानी। अब आप यह जान लीजिए कि जब तक आपका शरीर साथ दे रहा है, वही आपका बैंक बैलेंस है। आपका भविष्य भी वैसा होगा जैसा आपका वर्तमान है।
"पर्युषण पर्व में करें पुण्यार्जन"
मनोहरमय चातुर्मास समिति के अध्यक्ष सुशील कोचर और महासचिव नवीन भंसाली ने बताया कि भव्यतिभव्य प्रतिष्ठा महोत्सव के बाद प्रथम चातुर्मास में धर्म-आराधना हर्षपूर्वक चल रही है। पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व की आराधना शुरू हो गई है। परमात्मा एवं दादा गुरुदेव की मनमोहक आंगी ओर खूबसूरत गवली राष्ट्रीय कलाकार चिराग भाई सूरत वालों द्वारा बनाई जा रही है। सभी धर्म प्रेमी बंधुओं से अनुरोध है कि वे परमात्मा के भव्य एवं दिव्य स्वरूप को निहारने सपरिवार पधार कर पुण्यार्जन करें।
श्री धर्मनाथ भगवान एवं दादाबाड़ी की भव्य अति भव्य प्रतिष्ठा के पश्चात प्रथम पर्युषण महापर्व के प्रथम दिन त्रिलोकीनाथ श्री धर्मनाथ भगवान के पूरे मंदिर एवं दादाबाड़ी की सजावट, आंगी और आरती का लाभ महेंद्र, सौरभ धाड़ीवाल परिवार, रिद्धि सिद्धि मेटल वालों ने लिया है। समिति की ओर से धाड़ीवाल परिवार की बहुत बहुत अनुमोदना।