रायपुर - लालगंगा पटवा भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए उपाध्याय प्रवीण ऋषि ने कहा कि क्षमा करने की लिए कोई भावना नहीं होती है। जैसे हम सोच कर गुस्सा नहीं होते है, वैसे सोच कर क्षमा भी नहीं करना चाहिए। जैस बिना सोचे प्यार हो जाता है, वैसे ही बिना सोचे क्षमा कर देना चाहिए। यही महावीर का सिद्धांत है, जैन धर्म का सिद्धांत है। उक्ताशय की जानकारी रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने दी।
लालगंगा पटवा भवन में चल रही महावीर गाथा को आगे बढ़ाते हुए रविवार को प्रवीण ऋषि ने कहा कि आनंद महोत्सव से चले आ रहे पर्युषण पर्व का आज शिखर दिवस, संवत्सरी पर्व है। अन्तःगढ़ सूत्र की आपकी आराधना तीर्थेश ऋषि महाराज ने बहुत सरलता से आपके सामने उन्होंने बात रखी। संवत्सरी की मूलभूत आराधना की भूमिका के बारे में बताता हुए प्रवीण ऋषि ने कहा कि क्यों हम संवत्सरी पर्व मानते है, और कैसे मानते है। उन्होंने कहा कि दुनिय में कई त्यौहार है, लेकिन उनके पीछे एक इतिहास है। जैसे महावीर जन्मकल्याणक है तो भगवन महावीर कर जन्म का इतिहास है। ऐसे ही दीवाली, दशहरा, होली के पीछे कुछ न कुछ घटना का क्रम है। लेकिन संवत्सरी के पीछे किसी व्यक्ति का कोई इतिहास नहीं है। इसके पीछे वैश्विक इतिहास है। जब काल का परिवर्तन होता है, उसे ऋषि पंचमी कहते है। सालभर में 2 तिथियां है जिन्हे सभी धर्मों ने स्वीकार किया, जैन परंपरा ने इसे संवत्सरी के रूप में और सनातन परंपरा ने ऋषि पंचमी के रूप में स्वीकार किया। यह मैत्री का पर्व है। मनुष्य के जीवन की सबसे जरुरी होता है मित्र, और वह पर्व है संवत्सरी का मैत्री पर्व। प्रवीण ऋषि ने पूछा कि क्या बिना आलोचना के और बिना क्षमापना के संवत्सरी की साधना हो सकती है? आप कितना भी दान कर लें, कितने भी आगम याद कर लें, जिनशासन एक ही बात कहता है, कि यदि आलोचन, क्षमापना और प्रतिगमन नहीं है तो तुम्हारी सारी साधना मुर्दे का श्रृंगार है। इनके बिना संवत्सरी की आराधना पूरी नहीं होती।
उन्होंने पूछा कि क्षमापन किसे कहते हैं? क्या क्षमा के लिए कोई शर्त रहती है? क्षमापना किसी परंपरा के कटघरे में बंद नहीं हो सकती है। और कोई इसे कटघरे में बंद करता है तो वह सबसे बड़ा दोषी है। क्षमापना खुले आसमान की क्षमापना है, वो पिंजड़े की क्षमापना नहीं है। आत्मा का आत्मा के साथ परमात्मा के रूप में व्यवहार करना इसको क्षमापना कहते हैं। जिस दिन आप क्षमापना का आनंद लोगे, उस दिन संवत्सरी आपकी जिंदगी का सबसे बड़ा त्यौहार हो जाएगा। इसमें ख़ुशी का एक तूफ़ान आना चाहिए। गुस्सा आप सोच कर करते है, या बिना सोचे? वैसे क्षमापना दिल का मामला है, प्यार का मामला है। और प्यार कभी सोचकर नहीं किया जाता है। सोचकर केवल राजनीति चलती है। क्षमापना प्यार का सागर है, सोचकर क्षमापना नहीं होती, जो बिना सोचे हो जाती है उसे क्षमापना कहते हैं। जैन धर्म क्षमा का त्यौहार का मनाता है, मैत्री का उत्सव मनाता है।
रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने बताया कि धर्मसभा के बाद प्रवीण ऋषि ऑनलाइन माँ हुलसा पुरस्कार कार्यक्रम में शामिल हुए जो महाराष्ट्र के चिचोंडी में आयोजित था। लगभग 70 बच्चे ने 10 साल के उम्र में प्रतिक्रमण को कंठस्थ कर एक रिकॉर्ड बनाया है। इन बच्चों को ऑनलाइन पुरस्कार दिया गया। प्रवीण ऋषि ने सभी बच्चों को आर्शीवाद दिया और उनके लिए मंगलकामना की।
अर्हम गर्भसंस्कार के अपडेट सेशन का कार्यक्रम 2 दिन चला। आज ट्रेनर्स सर्टिफिकेशन कोर्स के लिए बाहर से लगभग 150 टीचर्स पहुंचे। ललित पटवा ने बताया कि प्रवीण ऋषि का लक्ष्य है कि जनवरी 2025 तक उन्हें 25,000 ट्रेनर्स तैयार करने हैं, ताकि देश के कोने कोने में ये ट्रेनर्स अर्हम गर्भसंस्कार के ट्रेनिंग दें।