रायपुर - शरीर एक मशीन है, हमें इसे हमेशा चलाते रहना है। किसी मशीन को अगर नहीं चलाओगे तो उसमें जंग लगने लगता है। आज लोगों को आराम चाहिए, यह आराम जंग की तरह है जो अनेक बीमारियों की जड़ है। पहले के लोग घर में काम करते रहते थे, जमीन पर बैठ कर पोंछा लगाते थे, जमीन पर बैठ कर खाना पकाते थे तो उनका शरीर दिनभर चलता रहता था और उनका खाना भी अच्छे से पच जाता था। ऐसा करने से उनका शरीर भी मजबूत और स्वस्थ रहता था, वे घी और काजू-किशमिश-बादम भी खाते तो पचा लेते। आजकल तो लोग शरीर को मजबूत बनाने के लिए जिम जाते है। घी और काजू-किशमिश भी खाए तो उसे पचा नहीं पाते है। पहले के जमाने में लोग कुंए से पानी खींचकर निकालते थे और ऐसा कर वे पानी को घी के समान बना लेते थे। आज तो हर घर में नल लगा हुआ है। उसमें भी लोग उसे छानने तक की भी मेहनत नहीं करते है। हमें पानी को छान कर पीना चाहिए। यह छन्नी साफ कपड़े की होनी चाहिए और समय-समय पर उस कपड़े को भी हमें धोना चाहिए। यह बातें एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी प्रांगण में चल रहे मनोहरमय चातुर्मास 2023 की प्रवचन श्रृंखला के दौरान रविवार को नवकार जपेश्वरी साध्वी शुभंकरा श्रीजी ने कही।
21 दिवसीय दादा गुरुदेव इकतीसा: निमत्ते त्रिदिवसीय भक्ति महोत्सव का हुआ समापन।
एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी में प्रतिष्ठा के बाद प्रथम दादागुरूदेव इकतीसा महोत्सव मनाया जा रहा है। दादाबाड़ी में 7 अगस्त से 27 अगस्त तक 21 दिवसीय दादा गुरूदेव इकतीसा का आयोजन किया गया है, जिसका आज समापन हुआ। इकतीसा के अंतिम तीन दिनों में निमत्ते त्रिदिवसीय भक्ति महोत्सव का आयोजन किया गया। मनोहरमय चातुर्मास समिति के अध्यक्ष श्री सुशील कोचर और महासचिव श्री नवीन भंसाली ने बताया कि महोत्सव के तृतीय एवं अंतिम दिन, रविवार को राजिम मंडल और मणिधारी मंडल द्वारा दादा गुरुदेव पूजन विधि की गई। यहां बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति रही।